Wednesday, September 7, 2011

हिन्‍दू महासभा ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में हुये बम विस्‍फोट की कड़ी निंदा की

अखिल भारत हिन्‍दू महासभा ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में हुये बम विस्‍फोट की कड़ी निंदा की है। अखिल भारत हिन्‍दू महासभा के वरिष्‍ठ नेता बाबा पं0 नंद किशोर मिश्रा व केश्‍वानंद सरस्‍वती ने संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में  कहा‍ कि इस तरह की कायराना कुकृत्‍य को किसी भी तरह से जायज नही ठहराया जा सकता। नेता द्वय  ने आतंकवादी संगठन  हूजी की भी तीव्र भर्त्‍सना की क्‍योंकि हूजी द्वारा मीडिया को भेजे ई मेल में कहा गया है कि , ‘हम दिल्‍ली हाईकोर्ट के पास हुए बम धमाके की जिम्‍मेदारी लेते हैं। हमारी मांग है कि  अफजल गुरु की फांसी की सजा तत्‍काल वापस ली जाए नहीं तो हम बड़े उच्‍च न्‍यायालयों और सुप्रीम कोर्ट को भी निशाना बनाएंगे।

नेता द्वय ने कहा कि इसका मतलब यही होता है कि हमारे पवित्र संसद रूपी मंदिर में हमला करने वालों के आगे हम झुक जायें। आगे उन्‍होने कहा कि अफजल के मामले पर नेताओं को राजनीति नही करनी चाहिये व देश को आतंकवाद रहित करने के लिये उन्‍हें अपने कर्तव्‍यों के पालन से विमुख नही होना चाहिये।

नेता द्वय ने कहा कि  हमारी सहानुभूति इस विस्फोट में जान गंवाने वालों के परिजनों और घायल होने वालों के साथ है। हम इस कायराना हरकतों की तीव्र निंदा करते हैं।
यह कायराना कृत्य है इसे संसद में बैठे नेताओं को निपटना होगा। किसी भी कीमत पर आतंकियों के साथ कोई समझौता नही होना चाहिये और आतंकवाद पर राजनीति करने से नेताओं को  बाज आना चाहिये।
नेता द्वय ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में बम विस्‍फोट के बाद संसद कार्यवाही ठप होने की भी  निंदा की। उन्‍होने कहा कि इससे यही संदेश आतंकियों को जायेगा कि नेता आतंकियों से डर गये। 


1 comment:

राहुल पंडित said...

दिल्ली में फिर विस्फोट और फिर मरे आम आदमी .
इसमें कोई शक नहीं है की यह एक दुखद घटना है,लेकिन यह इतनी भी दुखद नहीं है की जिसके लिए हम आशूं बहायें.हमें तो आदत हो चुकी है बम बिस्फोटों में मरने की.कभी मुंबई में मरते हैं,कभी दिल्ली में.कभी जयपुर में मरते हैं तो कभी बनारस में.जम्मू कश्मीर का नाम तो मत लेना वहां तो रोज ही मरते हैं.तो फिर मरने जैसी इस छोटी सी घटना के लिए हम आशूं क्यूँ बहाए.हम तो आम आदमी हैं,कल से फिर अपने काम पर लौट जायेंगे.
मै इससे ज्यादा इस विषय पर नहीं लिख सकता.आखिर की बोर्ड का बटन दबाने में भी उर्जा ख़तम होती है,और मै यह भी जान चूका हूँ की मेरे लिखने से कुछ होने वाला नहीं है.आज हम चिल्लायेंगे कल चुप हो जायेंगे