Wednesday, August 17, 2011

रसूल लीला :इस्लामी कामसूत्र !!

बी.एन. शर्मा

प्रस्‍तुतिः डॉ0 संतोष राय

कुछ दिनों से देखा जा रहा है कि मुस्लिम ब्लोगर जब कोई तर्कपूर्ण समुचित जवाब देने में असफल हो गए हैं ,तो बेनाम के भेस में अश्लील कमेन्ट करने लगे हैं .और इस्लाम का असली घिनावना रूप दिखा रहे है .इस से मुझे कोई ताज्जुब नहीं हो रहा है .असल में यह लोग मुहम्मद की सुन्नत का पालन कर रहे .मुहम्मद जैसा था ,और जैसी उसकी शिक्षा थी वही गन्दगी मुसलमानों के दिमागों में भरी हुई थी .यद्यपि मैंने यह लेख काफी पहले तय्यार कर लिया था .लेकिन इन बेनामी मुस्लिम ब्लोगरों ने इसे प्रकाशित करने का अवसर दे दिया .
यह बात तो सर्वविदित है कि मुहम्मद एक अय्याश व्यक्ति था .लेकिन वह सेक्स गुरु भी था .वह मुसलमानों को सेक्स के नये नए तरीके सिखाता रहता था .ताकि मुसलमान उसका अनुकरण करके वैसा ही करें .क्योंकि जिहादियों को क्रूर होने के साथ साथ अय्याश होना भी जरुरी है .अगर इस दुनिया में अय्याशी नहीं करेंगे तो ,मर कर जन्नत में अय्याशी कैसे करेंगे .यही इस्लाम का आधार और मुसलमानों का एकमात्र लक्ष्य है . 
यद्यपि मुहम्मद ने सेक्स के बारे में कोई अलग से किताब नहीं लिखी है ,परन्तु उसने जो भी आय्याशियाँ कि हैं ,वे सब हदीसों में मौजूद हैं .उन से छांट कर यह इस्लामी कामसूत्र الكِتاب الجِنس الاسلاميه प्रस्तुत किया जा रहा है .इसमे प्रारम्भ से अंत तक इस्लामी सेक्स की जानकारी है .यह ज्ञान मुस्लिम महिलाओं के लिए अवश्य उपयोगी होगा . "  فقط للنساء المسلمات "केवल मुस्लिम महिलाओं के लिए !
  
1 -सेक्स की तय्यारी कैसे करें 
"औरतें अपने जिहादी पतियों के घर में आने से पहिले अपने निचे के बाल(Pubic Hair )साफ़ करके रखें ".बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 173 
"मुस्लिम औरतें अपनी योनी और बगल के बाल साफ करके तय्यार रहें "बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 177 
2 -सेक्स के लिए सदा तय्यार रहें 
"यदि कोई औरत घर के काम में व्यस्त हो ,और उसका जिहादी पति उसे सेक्स के लिए बुलाये तो ,औरत को चाहिए कि सब काम छोड़कर तुरंत ही वहीँ पर सम्भोग करवा ले "मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3240 
"सम्भोग करना जरुरी है ,चाहे तुम्हारी पत्नी राजी हो या नहीं ."मुस्लिम -किताब 3 हदीस 677 और 680 
3 -छातियाँ मसलवाना(Breastpresing ) 
"अबू मूसा बिन अशरी ने कहा कि मैं अपनी पत्नी की छातियाँ दबाकर उसका दूध पीता हूँ .मुझे लगा कि यह हराम है .फिर अब्दुल्लाह बिन मसूद ने रसूल से पूछा तो रसूल ने कहा कि यह काम जायज है "मुवत्ता-किताब 30 हदीस 214 
"याहया बिन मालिक ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के स्तनों से दूध पीता हूँ ,क्या यह हराम है .तब अबू मूसने कहा कि इसे रसूल ने जायज कहा है .और मैं दो सालों से यही कर रहा हूँ "मलिक मुवत्ता -किताब 30 हदीस 215 
4 -कुंवारी लड़कियाँ सेक्स के लिए उत्तम हैं 
"अल्लाह की नजर में कुंवारी और अक्षत योनी लड़कियाँ उत्तम होती है "बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 16 
"कुँवारी लड़कियाँ सेक्स के लिए श्रेष्ठ होती हैं "बुखारी -जिल्द 38 हदीस 504 . 
"रसूल ने कहा कि ,कुंवारी कन्या के साथ सम्भोग करने में अधिक आनंद आता है "मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3459 . 
5 -औरत की माहवारी में सम्भोग की विधि 
"आयशा नेकहा कि ,रसूल उस समय भी सम्भोग करते थे जब मैं माहवारी में होती थी "बुखारी -जिल्द 3 किताब 33 हदीस 247 
"रसूल ने कहा कि ,तुम औरतों से मास्क के समय भी सम्भोग कर सकते हो "अबू दाऊद-किताब 1 हदीस 270 
"मासिक के समय किसी भी औरत के साथ सम्भोग करना हलाल है "अबूदाऊद -किताब 1 हदीस 212 
"अगर कोई गलती से पत्नी के आलावा किसी ऐसी स्त्री से सम्भोग करे ,जो मासिक से हो ,तो उसे प्रायश्चित के लिए आधा दीनार खैरात कर देना चाहिए"
 "अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2164 
"और अगर अपनी पत्नी से उसकी मासिक के समय सम्भोग करे तो ,सदके के तौर पर एक दीनार दे देना चाहिए "
.अबू दाऊद -किताब 1 हदीस 264 और 302 
"यदि स्त्री की योनी से मासिक स्राव अधिक बह रहा हो तो ,पहिले योनी से स्राव को साफ कर लें ,फिर तेल लगा कर सम्भोग करें .यही तरिका रसूल ने बताया है.
 "सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 647 .
"आयशा ने कहा कि,जब भी मैं मासिक में होती थी रसूल मेरी योनी से स्राव साफ करके सम्भोग किया करते थे "
मुस्लिम -किताब 3 हदीस 658 
6 -सम्भोग के बाद गुस्ल जरूरी नहीं 
"आयशा ने कहा कि रसूल सम्भोग के बाद बिना गुस्ल किये ही मेरे साथ उसी हालत में सो जाते थे" .अबू दाऊद-किताब 1 हदीस 42 
"आयशा ने बताया कि ,जब रसूल और मैं सम्भोग के बाद गंदे हो जाते थे ,तो रासुल्बिना पानी छुए ही मेरे पास सो जाते थे ..और उठकर नमाज के लिए चले जाते थे ".अबू दाऊद -किताब 1 हदीस 42 
"आयशा ने कहा कि ,जब सम्भोग के बाद एअसुल गंदे हो जाते थे ,तो उसी हालत में सो जाते थे ,फिर बाद में उठ जाने पर बाजार या नमाज के लिए चले जाते थे .उनके पापड़ों पर वीर्य के दाग साफ दिखाई देते थे ,"अबू दाऊद -किताब 1 हदीस 228 
"आयशा ने कहा कि ,जब सम्भोग के बाद रसूल के कपड़ों पर वीर्य सुख जाता था .और दाग पड़ जाता था तो मैं अपने नाखूनों से वीर्य के दागों को खुरच देती थी .रसूल वही कपडे पहिन कर नमाज के लिए चले जाते थे "अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2161 
7 -वीर्य का स्वाद और रंग 
"अनस बिन मलिक कहा कि रसूल ने उम्म सलेम को बताया कि पुषों के वीर्य का रंग सफ़ेद होता है और गाढ़ा होता है .और बेस्वाद होता है .लेकिन स्त्री का वीर्य पतला ,पीला और तल्ख़ होता है "अबू दाऊद -किताब 3 हदीस 608 
"उम्म सलेम ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि स्त्रियों कि योनी से हमेशा एक स्राव निकलता रहता है .जिसका रंग पीला होता है .रसूल ने फिर कहा कि मुझे यह बात कहने कोई शर्म नहीं है कि , योनी के स्राव का स्वाद तल्ख़ और तीखा होता है "अबू दाऊद -किताब 3 हदीस 610 .
8 -माँ बेटी से एक साथ सम्भोग 
"याह्या बिन मलिक की रवायत है कि उबैदुल्ला इब्न उतवा इब्न मसूद ने कहा कि उमर बिन खत्ताब ने जिहाद में एक माँ और बेटी को पकड़ लिया .और रसूल से पूछा क्या हम इन से एक एक करके सम्भोग करें या अलग अलग ,रसूल ने कहा की तुम दौनों से एक ही समय सम्भोग कर सकते हो .इसकी अनुमति है .लेकिन मैं इसे नापसंद करता हूँ "मलिक मुवत्ता-किताब 28 हदीस 1433 
9 -वेश्या गमन 
"रसूल ने कहा कि जिहाद के समय मुसलमान एक रात केलिए भी शादी कर सकते हैं "मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3253 
10 -कुतिया आसन(Doggy style ) 
"जाबिर बिन अब्दुल्लाह ने रसूल से कहा कि एक यहूदी अपनी पत्नी की योनी में पीछे से लिंग प्रवेश करता है .क्या बुरी बात है .रसूल ने कहा की इसमे कोई हर्ज नहीं है ."मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3364 
"अबू जुहरी ने कहा की रसूल ने कहा कि,तुम चाहे औरतों से आगे से सम्भोग करो चाहे पीछे से ,परन्तु लिंग योनी के अन्दर ही प्रवेश होना चाहिए .नहीं तो संतान भेंगी होती है "मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3365 
11 -जंघा मैथुन (Thighing ) 
"आयशा ने कहा कि ,जिस समय मैं माहवारी में होती थी तबी रसूल आ गए और मुझ से अपनी जांघें खोलने को कहा ,फिर नबी ने अपने गाल मेरी जांघों पर रखे .मैंने उनके सर को जांघों में कास लिया .इस से रसूल को गर्मी मिली और वह उसी हालत में सोते रहे .शायद रसूल को सर्दी लग गयी थी "अबू दाऊद-किताब 1 हदीस 270 
12 -औरतें केवल भोग की वस्तु हैं 
"औरतें केवल भोगने और मौजमस्ती और आमोद प्रमोद के लिए ही बनी हैं "अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2078 
"यदि औरत की सम्भोग की इच्छा भी नहीं हो तब भी पति उस से जबरदस्ती सभोग करने का हकदार है .रसूल ने कहा कि अल्लाह ने औरतों पर मर्दों को फजीलत दे रखी है "अबू दाऊद - किताब 11 हदीस 2044 . 
"यदि स्त्री सम्भोग से इंकार करे तो पति उसे पीट कर जबरन सम्भोग कर सकता है "मिश्कात -किताब 6 हदीस 671 
"अगर पत्नी गर्भवती भी हो ,तो पति उस से उस हालत में सम्भोग कर सकता है ,चाहे उसकी पत्नी सम्भोग करवाने के लिए कितना भी विरोध करे .पति उस से सम्भोग जरुर करे "अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2153 और 2166 .


13 -मुख मैथुन (Oral Sex ) 
"आयशा ने कहा कि,रसूल जब रोजे कि हालत में होते थे ,तब भी वह अपना मुंह मेरे मुंह से लगा कर मेरी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसते थे .और मेरा सारा थूक उनके मुंह में चला जाता था "अबू दाऊद-किताब 13 हदीस 2380 
"आयशा ने कहा कि रसूल कहते थे कि ,हरेक हालत में आनंद लेना चाहिए .चाहे रोजे के दिन हों "अबू दाऊद किताब 12 हदीस 302 . 
"आयशा ने कहा कि रसूल कहते थे कि पुरुष और स्त्री के अंगों में एक प्रकार की शहद होती है ,जब तक स्त्री पुरुष का ,शहद नहीं चखती है ,वह हलाल नहीं मानी जा सकती है .और यही बात पुरुषों पर लागू होती है "सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3354 . 


यह इस्लामी कामसूत्र पढनेके बाद आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे कि मुस्लिम ब्लोगर बात बात पर हरेक मुद्दे को सेक्स की ओर क्यों मोड़ देते हैं .और अश्लील शब्दों का क्यों प्रयोग करते हैं .इसमे इनका उतना कसूर नहीं है ,जितना इस कामसूत्र के रचयिता मुहम्मद का हैं .जैसा मुसलमानों के दिमागों में भरा हुआ है ,वैसा ही यह लोग बोलते हैं . 


इसमे दी गयी कई मूल हदीसें काफी बड़ी और कहानियों की तरह थीं .जगह की कमी के कारण उन्हें सारांश के रूप में दिया गया है .पूरी हदीसें दी गई साइटों में उपलब्ध है . ذالك الكتاب الجِنس هديً لِلمُسلمين
यह "किताबुल जिन्स" रसूल के वचन हैं ,और मुसलमानों को राह दिखाते हैं .
ऐसे बेनामी क्षद्म मुस्लिम ब्लोगरों को पता होना चाहिए कि हमारे पास जवाब देने के लिए ऐसे लेखों की कोई कमी नहीं है .अभी तो मुहम्मद को बेनकाब किया है .अगली बार उसके समूचे परिवार और रिश्तेदारों की असलियत सब के सामने प्रस्तुत कर दी जायेगी .इंतजार करिए .

http://www.islamreview.com/articles/sexinislam.shtml
 
 

13 comments:

charanjeet said...

SABSE PAHLE M DR. B.N. SARMA KO THANKS KAHNA CHAHUGA KI UNHONE ASLILE BHASA KA PRYOG KARENE WALE MUSLMANO KA MUH TOR JWAB DIYA H.

UPAR LIKHE COMMENT KARNE WALI PARNTA JI KO KAHNA CHAHUGA KI AGER KOI HINDU BHAHIYO KO GALI DE TO APKO KOI PRPBLEM NHI H. LEKIN SARMA JI MUSLMANO KO KOI GALI NHI DE RHE H BAS UNHE APNA ASLI CHEHRA DIKHYA H.

Muhammad Imran said...
This comment has been removed by the author.
Muhammad Imran said...

kitna jhooth failaoge kitana contents ko badloge.May god guide you.

Anonymous said...

YE POORI TARAH BAKWAS AYR JHHOTA, TOR MAROR KAR MUSALMANO KE AGAINST NAFRAT FAILANE KE LYE PROPAGANDA HE. B.N SHARMA PEHLE TU KHUD VED PADH YA SHANKRACHARYE JI SE JAKAKAR ISLAM KI TALEEM LE.AUR SANSKAAR SEEKH TU KHUD HINDUO PAR KALANK HE JO NAFRAT KA BEEJ BO RAHA HE. ARBI AUR HADISO KO SAMAJHNE ME SAR KE BAAL CHALE JATE HE TUNE CHAAR DINO ME HADISO KO TRASLATE KARNA SEEKH LYA.

मोहम्मद कमरुद्दीन सिद्दीकी said...

dr sahb akhir kar aapne apna charitra dikha hi diya ki rss kitna jhoot bolkar bhole bhale hindu bhaiyon ko bhekata hai aur islam ko tod marod kar pesh karta hai aapne is jhoot ko likhne me jitne mehnat ki hai utni hi mehnat se aap apne agar achhai bayan karte to kitne dur tak failti ..... chalo koi baat nahi lekin men hindu bhaiyon se kahunga ki woh pehle aise cheap site ko padhne se kisi achchhi site ya achchi book se apna gyan mazboot kar le aur aise sir firo ke bato me naaaye yeh to biased hai asal me inki galti nahi hai yeh RSS hai hi aisi bala usko jodne me nahi todne me maza aata hai

Anonymous said...

lakin mai sabhi muslims se poochna chahta hoon ki aakhir kyo tumhare hi mazhab me itni marpit ,katleaam kyo ki jaati hai kisi urmazhab me to aisa nahi hai,aap khud dekho bharat me jitne bhi crime hote hai agar % ke hisab se dekhe to muslims hi jyada dikhte hai kyo jab ki islam me crime to haraam hai fir kyo aisa ho raha hai,

Javed Khan said...

हदीस की सही मालूमात के लिए इस साईट पर देखे http://qurango.com/hadees.html ऊपर लिखी हदीसो को अपने हिसाब से लिखा हे लिखने वालो ने

Javed Khan said...

Volume 7, Book 62, Number 16:

Narrated Jabir bin Abdullah:

While we were returning from a Ghazwa (Holy Battle) with the Prophet, I started driving my camel fast, as it was a lazy camel A rider came behind me and pricked my camel with a spear he had with him, and then my camel started running as fast as the best camel you may see. Behold! The rider was the Prophet himself. He said, 'What makes you in such a hurry?" I replied, I am newly married " He said, "Did you marry a virgin or a matron? I replied, "A matron." He said, "Why didn't you marry a young girl so that you may play with her and she with you?" When we were about to enter (Medina), the Prophet said, "Wait so that you may enter (Medina) at night so that the lady of unkempt hair may comb her hair and the one whose husband has been absent may shave her pubic region.

Yash Vardhan said...

|| चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
बलिहारी जाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके ||

|| सदा बहार सजीला है रसूल मेरा
हो लाखपीर रसीला है रसूल मेरा ||

|| जहे जमाल छबीला है रसूल मेरा
रहीने इश्क रंगीला है रसूल मेरा ||

|| चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
बलिहारी जाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके ||

|| किसी की बिगड़ी बनाना है ब्याह कर लेंगे
बुझा चिराग जलाना है ब्याह कर लेंगे ||

|| किसी का रूप सुहाना है ब्याह कर लेंगे
किसी के पास खजाना है ब्याह कर लेंगे ||

JAMES BOND said...

४.अपनी बेटी से बलात्कार करने वाला, जगत रचयिता :
ब्रह्मा 'ब्रह्मा'शब्द के विविध अर्थ देते हुए श्री आप्र्टे के संस्कृत-अंग्रेज ¬ी कोष में यह लिखा है- पुराणानुसार ब्रह्मा की उत्पति विष्णु की नाभि से निकले कमल से हुई बताई गई है उन्होंने अपनी ही पुत्री सरस्वती के साथअनुचित सम्भोग कर इस जगत की रचना की पहले
ब्रह्मा के पांच सर थे,किन्तु शिव ने उनमें से एक को अपनी अनामिका से काट डालाव अपनी तीसरी आँख से निकली हुई ज्वाला सेजला दिया. श्रीमद भगवत, तृतीय स्कंध, अध्याय १२ में लिखा है---
वाचं........... ¬......प्रत्याबो ¬ध्नायं ||२९||
अर्थात :
मैत्रेय कहते है की हे क्षता(विदुर)!हम ¬ लोगों ने सुना है की ब्रह्मा ने अपनी कामरहित मनोहर कन्या सरस्वती की कामना कामोन्मत होकर की ||२८||
पिता की अधर्म बुद्धि को देखकर मरिच्यादी मुनियों ने उन्हें नियमपूर्वक समझाया ||२९||
क्या यह पतन की सीमा नहीं है.? इससे भी ज्यादा लज्जाजनक क्या कुछ और हो सकता है.?
५.गर्भवती ममता से भोग करने वाला गुरु:
ब्रहस्पति गुरु का अर्थ है (गृ * कु, धे ) अर्थात जो धरम का उपदेश देता है वह गुरु है. ब्रहस्पति इन्द्र आणि देवताओं का गुरु माना जाता है इन्ही की रची हुई एक स्मृति भी है जो ब्रहस्पति स्मृति के
नाम से प्रसिद्द है ये अपने बड़े भाई उत्थाय की गरभवती स्त्री ममता के लाख मना करने भी पर कामोंम्त्त होकर उस पर चढ़ बैठा . श्री मद भगवत,
स्कंध-१ अध्याय २०, में एस सम्बन्ध में एस प्रकार लिखा है-
तस्यैव .............वि ¬त्थेंयाये.(३५ से
३९)
अर्थात : स्व्वंश ने एस प्रकार नष्ट हो जाने परराजा भारत ने मरुत्सोम नामक यग्यका अनुष्ठान किया उस यग्य में मरुत देवों ने राजा को भारद्वाजनामक
पुत्र दिया ||३५||
एक समय ब्रहस्पति कामातुर होकर
अपने भाई की गर्भवती स्त्री के साथ मना किये जाने पर भी, मैथुन करने में प्रवृत्त हुए और गर्भ को शाप देकर
अपना वीर्य छोड़ दिया ||३६||
आगे जानने के लिए अगला पोस्ट अवश्य पढ़ें अपनी राय देना ना भूले..?
हिन्दू भाईयो से निवेदन है कि अपना आपा ना खोयें शान्ति से अपना मत रखें और हाँ गाली गलोच अगर हिन्दू धर्म सिखाता है। अवश्य द

JAMES BOND said...

भगवान नायक या खलनायक?
"हिन्दूइजम धर्म या कलंक"
१.अहिल्या से संगम करने वाला - इन्द्र
गोस्वामी तुलसीदास ने इन्द्र के बारे में लिखा है की- 'काक सामान पाप रिपु रितिऔ छली मलीन कतहूँ न प्रतितो'
अर्थात इन्द्र का तौर तरीका काले कौए का सा है, वह छली है | उसका ह्रदय मलीन है तथाकिसी पर वह विश्वास नहीं करता | वह अश्वमेघ के घोड़ो को चुराया करता था | इन्द्र ने गौतम की धर्म
पत्नी अहिल्या का सतीत्व अपहरण किया था |कहानी इस प्रकार है--- सच्पति इन्द्र ने आश्रम से मुनि की अनुपस्तिथि जानकार और मुनि का वेश धारण कर अहिल्या से कहा |१७|
हे अति सुंदरी ! कामिजन भोग-विलास के लिए रीतिकाल की प्रतीक्षा नहीं करते, अर्थातइस बात का इंतजार नहीं करते की जब स्त्रीमासिक धर्म से निवृत हो जाए तभी उनके सातसमागम करना चाहिए | अत:हे सुन्दर कमर वाली ! मैं तुम्हारे साथ प्रसंग करना चाहता हूँ. |१८||
विस्वमित्र कहते है की हे रामचंदर वह ! वह मुर्ख मुनिवेश्धारी इन्द्र को पहचान कर भी इस विचार से की देखूं देवराज के साथ रति करने से कैसा दिव्य आनंद प्राप्त होता है, इस पाप कर्म के करने
में सहमत हो गई ||१९ ||
तदनन्तर वह कृतार्थ ह्रदय से देवताओं में श्रेष्ठ इन्द्र से बोली की हे सुरोत्तम !
मैं कृतार्थ ह्रदय अर्थात देवी-रति का आनंदोपभोग करने से मुझे अपनी तपस्या का फल मिल गया. अब, हे प्रेमी ! आप यहाँ से शीघ्र चले जाइए ||२० ||
हे देवराज, आप गौतम से अपनी और मेरी रक्षा सब प्रकार से करें | इन्द्र ने हंसकर अहिल्या से वाच कहा ||21 ||
हे सुन्दर नितम्बों वाली ! मैं पूर्ण संतुष्ट हूँ | अब जहाँ से आया हूँ, वहां चला जाऊंगा| इस प्रकार अहिल्या के साथ संगम कर वह कुटिया से निकल गया ||२२|
2.वृंदा का सतीत्व लूटने वाला-विष्ण
विष्णु ने अपनी करतूतों का सर्वश्रेठ नमूना उस समय दिखलाया जब वे असुरेंदर जालंधर की स्त्री वृंदा का सतीत्व अपहरणकरने में तनिक भी नहीं हिचके | उसको वरदान था की जब तक
उसकी स्त्री का सतीत्व कायम रहेगा, तब तकउसे कोई भी मार नहीं सकेगा पर वह इतना अत्याचारी निकला की उसके वध के लिए विष्णु को परस्त्रीगमन जैसे घृणित उपाय का आश्रय लेना पड़ा.रूद्र-संहि ¬ता युद्धखंड,अध्याय २४ में लिखा है----
विष्णु......... ¬..........पुत्भ ¬ेद्नाम |
अर्थात :विष्णु ने जालंधर दैत्य की राजधानी जाकर उसकी स्त्री वृंदा का सतिवृत्य (पतिवृतय) नष्ट करने का विचार किया |इधर शिव जालंधर के साथ युद्ध कर रहा था और उधर विष्णु महाराज ने जालंधर का वेश धारण
कर उसकी स्त्री वृंदा का सतीत्व नष्ट कर दिया, जिससे वह दैत्य मारा गया. जब वृंदा को विष्णु का यह छल मालूम
हुआ तो उसने विष्णु से कहा---
धिक्........... ¬....तापस: |
अर्थात हे विष्णु ! परे स्त्री के साथ व्यभिचार करने वाले,तुम्हारे ऐसे आचरण पर धिक्कार है | अब तुम को मैं भलीभांति जान गई | तुम देखने में तो महासाधु जान पड़ते हो, पर हो तुम मायावी, अर्थात महा छली |
3.मोहिनी के पीछे दौड़ाने वाला कामी-शिव शंकर भगवन
(?) शंकर ने दौड़ कर क्रीडा करती हुई
मोहिनी को जबरदस्ती पकड़ लिया और अपने ह्रदय से लगा लिया | इसके बाद क्या हुआ ? महादेव शिव शंकर की तत्कालीन दयनीय अवस्था का चित्र
देखना हो तो श्रीमद्भागवत, स्कन्द ८, अध्याय १२, देखने का कष्ट करें जिसमें लिखा है---
आत्मानम........ ¬...देव्विनिम्म् ¬र्ता ||३०||
तस्यासौ........ ¬ निनिर्जित:||३१| ¬|
तस्यानुधावती... ¬.......धावत: ||३२|| अर्थात :हे
महाराजा ! तदन्तर देवों में श्रेठ शंकर के दोनों बाहुओं के बीच से अपने को छुड़ाकर वह नारायणनिर्मिता विपुक्ष नितम्बिनी माया (मोहिनी) भाग चली ||३१||
पीछा करते-करे ऋतुमती हथिनी के अनुगामी हाथी की तरह अमोधविर्य महादेव का वीर्य स्खलित होने लगा ||31||

JAMES BOND said...

४.अपनी बेटी से बलात्कार करने वाला, जगत रचयिता :
ब्रह्मा 'ब्रह्मा'शब्द के विविध अर्थ देते हुए श्री आप्र्टे के संस्कृत-अंग्रेज ¬ी कोष में यह लिखा है- पुराणानुसार ब्रह्मा की उत्पति विष्णु की नाभि से निकले कमल से हुई बताई गई है उन्होंने अपनी ही पुत्री सरस्वती के साथअनुचित सम्भोग कर इस जगत की रचना की पहले
ब्रह्मा के पांच सर थे,किन्तु शिव ने उनमें से एक को अपनी अनामिका से काट डालाव अपनी तीसरी आँख से निकली हुई ज्वाला सेजला दिया. श्रीमद भगवत, तृतीय स्कंध, अध्याय १२ में लिखा है---
वाचं........... ¬......प्रत्याबो ¬ध्नायं ||२९||
अर्थात :
मैत्रेय कहते है की हे क्षता(विदुर)!हम ¬ लोगों ने सुना है की ब्रह्मा ने अपनी कामरहित मनोहर कन्या सरस्वती की कामना कामोन्मत होकर की ||२८||
पिता की अधर्म बुद्धि को देखकर मरिच्यादी मुनियों ने उन्हें नियमपूर्वक समझाया ||२९||
क्या यह पतन की सीमा नहीं है.? इससे भी ज्यादा लज्जाजनक क्या कुछ और हो सकता है.?
५.गर्भवती ममता से भोग करने वाला गुरु:
ब्रहस्पति गुरु का अर्थ है (गृ * कु, धे ) अर्थात जो धरम का उपदेश देता है वह गुरु है. ब्रहस्पति इन्द्र आणि देवताओं का गुरु माना जाता है इन्ही की रची हुई एक स्मृति भी है जो ब्रहस्पति स्मृति के
नाम से प्रसिद्द है ये अपने बड़े भाई उत्थाय की गरभवती स्त्री ममता के लाख मना करने भी पर कामोंम्त्त होकर उस पर चढ़ बैठा . श्री मद भगवत,
स्कंध-१ अध्याय २०, में एस सम्बन्ध में एस प्रकार लिखा है-
तस्यैव .............वि ¬त्थेंयाये.(३५ से
३९)
अर्थात : स्व्वंश ने एस प्रकार नष्ट हो जाने परराजा भारत ने मरुत्सोम नामक यग्यका अनुष्ठान किया उस यग्य में मरुत देवों ने राजा को भारद्वाजनामक
पुत्र दिया ||३५||
एक समय ब्रहस्पति कामातुर होकर
अपने भाई की गर्भवती स्त्री के साथ मना किये जाने पर भी, मैथुन करने में प्रवृत्त हुए और गर्भ को शाप देकर
अपना वीर्य छोड़ दिया ||३६||
आगे जानने के लिए अगला पोस्ट अवश्य पढ़ें अपनी राय देना ना भूले..?
हिन्दू भाईयो से निवेदन है कि अपना आपा ना खोयें शान्ति से अपना मत रखें और हाँ गाली गलोच अगर हिन्दू धर्म सिखाता है। अवश्य द

smmalusare said...

इस्लाम में सुन्नत के खिलाफ काम करनेवाले लोग
मुहम्मद आम का फल नहीं खाता था (सर सैयद अहमद का पहला पेपर), इसलिए आम खाना सुन्नत के खिलाफ है. मुहम्मद नें कभी मर्सिडिज, बी.एम.डब्ल्यु. में सफर नहीं किया, इसलिए मर्सिडिज, बी.एम.डब्ल्यु. और अन्य गाड़ीयों में सफर करनेवाले सौदी राजपरिवार तथा अन्य मुस्लिम सुन्नत के खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें इन गाड़ीयों के बजाय घोड़ों, ऊंटों, खच्चरों पर सवारी करनी चाहिए, यही सुन्नत है. मुहम्मद नें कत्ल करने के लिए तलवारें और कुल्हाडीयाँ, खंजर, चक्कू तथा भालों का प्रयोग किया, इसलिए तालिबानी, जिहादी, इस्लामी कट्टरवादी जो ए.के.47 का प्रयोग करके गैरमुस्लिमों को मार रहे हैं, वह सुन्नत के खिलाफ है, उन्हे गैरमुस्लिमों को मारने के लिए हमेशा तलवारें, कुल्हाडीयाँ, खंजर, चक्कू और भालों का प्रयोग करना चाहिेए, ना कि ए.के.47 का. भले ही गैरमुस्लिमों के पास अाधुनिक अग्नीशस्त्र क्यों ना हों. और मुहम्मद के जमाने में मानवीय बम का कोई वजुद ही नहीं था, इसलिए जिहादी मानवीय बम का सहारा लेकर जिहाद को अंजाम देते हैं, वह सुन्नत के खिलाफ है. मुहम्मद के जमानें में आलू, टमाटर, पपिता की पैदाईश सौदी अरेबिया में नहीं होती थी, इसलिए वह मुहम्मद नें इन फलों को कभी नहीं खाया, इसलिए आलू, टमाटर, पपिता वगैराह फल खाना सुन्नत के खिलाफ है. मुहम्मद के जमानें में एअर कंडीशन नहीं हुआ करता था, इसलिए मस्जिद में एअर कंडीशन लगाना सुन्नत के खिलाफ है. मुहम्मद के जमानें में मुंह पर पावडर मलना, नेल पॉलिश लगाना, हाथों पर मेहंदी लगाना जैसे काम नहीं होते थें, इसलिए आज ऐसे काम करना सुन्नत के खिलाफ है.

सुन्नत के हक में और खिलाफ में बातेंः
गधा, लकडबघ्घा आदी का गोश्त खाना सुन्नत है, क्योंकि मुहम्मद नें इन दोनों जानवरों का गोश्त खाया था. टट्टी करने के बाद पानी से गुदा को धोना सुन्नत के खिलाफ है, क्योंकि मुहम्मद पानी का प्रयोग करने के बजाय विषम संख्या के पत्थरों का प्रयोग करता था. इसलिए मुसलमानों को आधुनिक अपार्टमेंटों में भी पत्थर का प्रयोग गुदा स्वच्छ करने के लिए करना चाहिए. टेलिफोन, मोबाईल और कम्प्युटर का प्रयोग सुन्नत के खिलाफ है, क्योंकि मुहम्मद के जमाने में टेलिफोन, मोबाईल और कम्प्युटर नहीं हुआ करता था, उसे हवा से ही जिब्रील अल्लाह का संदेसा भेजता था. इसलिए मुसलमानों को टेलिफोन, मोबाईल और कम्प्युटर का प्रयोग नहीं करना चाहिए, और हवा से संदेसा पाने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि यह काम सिर्फ उनके आखरी नबी के लिए मुमकिन था. मुसलमानों को आधुनिक काम जैसे बँक में क्लर्क, कैशियर, मैनेजर बनना, कम्प्युटर ऑपरेटर, प्रोग्रामर बनना इत्यादी काम नहीं करने चाहिए, क्योंकि मुहम्मद के जमानें में इस तरह का काम खुद मुहम्मद और कोई मुसलमान नहीं करता था, वे केवल हाईवे पर जाते हुए कारवाँ की लुटमार, दुसरें काबीलों पर हमला करके उनके जान-माल को लुटना, उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इ. कामों में लिप्त रहते थे. इसलिए आधुनिक मुसलमानों को (आधुनिक शब्द का प्रयोग करनें में संदिग्धता है) बँक में क्लर्क, कैशियर, मैनेजर बनना, कम्प्युटर ऑपरेटर, प्रोग्रामर बनना इत्यादी काम नहीं करने चाहिए, उन्हें केवल हाईवे पर जाते हुए कारवाँ की लुटमार, दुसरें काबीलों पर हमला करके उनके जान-माल को लुटना, उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इ. कामों में लिप्त रहकर अपनी रोजीरोटी कमानी चाहिए, यही असली सुन्नत है.
जय हिंद!