Wednesday, October 12, 2011

इस्लाम शांति का नहीं आतंक का धर्म है


बी एन शर्मा

प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय 


अक्सर मुसलमान यह दावा करते रहते हैं कि इस्लाम का उदेश्य विश्व में शांति फैलाना है .क्योंकि अरबी भाषा में इस्लाम का अर्थ शांन्ति ही है .मुसलमान यह भी दावा करते हैं कि उनका अल्लाह बड़ा दयालु और मेहरबान है ,और उसने कुरान में शांति के उपदेश दिए है . 
मुसलमानों के ऐसी ही लुभावनी और झूठी बारों में आकर इस्लाम को जाने बिना ही सीधे साधे लोग इसे सच समझ लेते हैं .क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि जो इस्लाम के बारे में मुसलमान कहते हैं सब उनकी कपट नीति है .जिसका उद्देश्य अपने दुष्ट ,क्रूर ,आतंकी ,और अमानवीय कुकर्मों पर परदा डालना है.
इसके लिए मुसलमान अक्सर यह चालाकी करते हैं कि ,जब भी उनकी किताबों में कोई बुराई बताई जाती है ,तो वह उसे छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने अपनाते हैं ,जैसे यह हदीस गलत है ,इसका अनुवाद सही नहीं है ,या हम इसे नहीं मानते .ऐसा ही 7 अक्टूबर 2011 को 11 .47 पर 'शफीक " नामके व्यक्ति ने अपनी टिपण्णी इस प्रकार से कहा था "आप कुरान से हवाले दीजिये ,हदीसें तो बाद में बनी थी ,और विश्वास के योग्य नहीं है " शफीक की ऐसी दलील को तर्कशाश्त्र में "लंगड़ी दलील ( Lame Excuse ) कहा जाता ,इस से शफीक और मुसलमान इस्लाम के आतंकी रूप को नहीं छुपा सकते . विश्व का कोई भी समुदाय युद्ध नहीं चाहता .अगर किसी कारण से युद्ध भी होजाता है ,तो शांति बनाने का प्रयास करता है . और यही कमाना करता है कि भविष्य फिर कोई युद्ध नहीं हो .लेकिन मुसलमानों का अल्लाह अपनी किताब कुरान में मुसलमानों को सदा लड़ते रहने की शिक्षा देता है .और उस शिक्षा पर अमल करके मुसलमान सदैव निष्कारण लड़ते रहते हैं ,और निर्दोष लोगों की हत्या को अपना धार्मिक फर्ज मानते है .अज जितने भी आतंकवादी हमले हो रहे हैं ,वह अल्लाह के उस आदेश के कारण है ,जो उसने कुरान में दिए हैं .
चलो हम कुरान के हवाले से ही इस्लाम को बेनकाब करते है ,इसके थोड़े नमूने देखिये -
1 -लोगों को लड़ाई के लिए उभारो 
"हे रसूल तुम इमान वालों को हमेशा लड़ाई के लिए उकसाते रहो "सूरा -अल अनफ़ाल 8 :65 
2-आसपास में अशांति फैलाओ 
"हे ईमान वालो तुम अपने आसपास के गैर मुस्लिमों से युद्ध करते रहो "सूरा तौबा 9 :123 
3-बिना कारण लड़ते रहो 
"तुम पर हमेशा युद्ध करते रहना फर्ज है ,चाहे ऐसा करना तुम्हें अप्रिय क्यों न लगे " सूरा -बकरा 2 :216 
4-अल्लाह से बड़ा मुसलमान का डर 
"लोगों के सीनों में अल्लाह से बढ़कर तुम्हारा भय होना चाहिए ,क्यों कि लोग इसके बिना नहीं मानेगे "सूरा -अल हश्र 59 :13 
5-लोगों के घर उजाड़ दो 
"अल्लाह ने उन लोगों के दिलों में इतनी दहशत बार दी कि वह डर के मारे खुद मुसलमानों के हाथों अपने घर उजड़वाने लगे ,ताकि बाकी लोग उनसे शिक्षा ग्रहण कर सकें "सूरा -अल हश्र 59 :2 
6-लड़ाई इमान की निशानी है 
"जो भी लोग ईमान लाते हैं ,वह हमेशा अल्लाह की राह में लड़ते रहते हैं " सूरा -निसा 4 :76 
7-जबरदस्ती अपनी शर्त मनवाओ 
"जो लोग तुमसे संधि नहीं करना चाहें ,तो उनको जहाँ पाओ ,पकड़ो और उनका वध कर दो .यह ऐसे लोग हैं ,जिन पर तुम्हें पूरा अधिकार दिया गया है " 
सूरा -निसा 4 :91 
8-अल्लाह डराता रहे तुम मारते रहो 
"मैं काफिरों के दिलों में भय पैदा करता हूँ ,और तुम उनकी गर्दनों पर वार करते रहना ,और उनकी हड्डियों के हरेक जोड़ पर चोट करते रहना "
सूरा -अल अनफ़ाल 8 :12 
9-फिरौती लेकर भी अहसान जताओ
"जब भी तुम्हारी गैर मुस्लिमों से मुठभेड़ हो जाये तो पहले उनकी गर्दने काट देना ,यदि नहीं कर सको तो उनको बंधनों में कैद कर लेना .फिर उन से फिरौती लेकर कहना कि देखो यह तो तुम्हारे ऊपर हमारा बड़ा अहसान है " सूरा -मुहम्मद 47 :4 
10-लड़ना भी एक व्यापार है 
"जो लोग इस सांसारिक जीवन के बदले में आखिरत का सौदा करना चाहते हैं ,तो उन्हें चाहिए कि वह हमेशा अल्लाह के नाम पर युद्ध करते रहें .चाहे वह युद्ध में मारे जाएँ ,या जीत जाएँ ,उन्हें बड़ा प्रतिदान मिलेगा ."सूरा-निसा 4 :74 


यह तो थोड़े से नमूने हैं ,इन से लोगों को पता चल जायेगा कि मुसलमान आतंकवाद क्यों फैलाते रहते हैं ,और बिना कारण निर्दोष लोगों की हत्याएं क्यों करते रहते है .कुरान में ऐसी ही आयतों की भरमार है .प्रसिद्ध समाजशाश्त्री और मानव अधिकार की कार्यकर्ता "एम्बर पवालिक Amber Pawlik " ने कुरान की सभी आयतों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया है ,जिसका निष्कर्ष दिया जा रहा है -
11-कुरान की आयतों का विश्लेषण 


1 .काफिरों के विरुद्ध - 52 .9 %
2 - अल्लाह के बारे में -17 .61 %
3 .ईमान के बारे में -14 .7 %
4 .आखिरत के बारे में -11 .8 
5 .छोटे अपराधों के बारे में -3 .4 % 
6.औरतों के अधिकार -3 .0 %
http://www.amberpawlik.com/RandomStudy1.html
जैसे लोग जब चावल पकाते हैं ,तो बर्तन से कुछ चावल निकाल कर समझ लेते हैं कि वह पक गए हैं कि नहीं .इसी तरह कुरान की इन कुछ आयातों को पढ़कर लोग कुरान के बारे में सब समझ जायेंगे .इस से बड़ा और क्या झूठ हो सकता है कि मुसलमान ऐसे जालिम अल्लाह को रहमान और रहीम कहते हैं .जो लोगों को हत्याएं करने को उकसाता हो . 
इन मुसलमानों का कुतर्क देखिये जो बड़ी बेशर्मी से कहते हैं ,कि जब वह किसी जानवर को हलाल करते हैं ,तो जानवर को कोई दर्द या तकलीफ नहीं होती है .
11-हलाल में जानवर को तकलीफ नहीं होती 


सब जानते हैं कि मुसलमान ईद के समय लाखों मूक जानवरों को बेरहमी से अल्लाह के नाम पर काट देते हैं .और जानवर के गले की मुख्य धमनी थोड़ी काट कर छोड़ देते हैं ,ताकि खून बहने से जानवर तड़प तड़प कर मर जाये .इस क्रूर विधि को हलाल करना कहा जाता है .मुहम्मद ने यह विधि मुसलमानों को हिंसक ,और निर्दय बनाने के लिए बनायीं थी .
फिर भी जकारिया नायक इस विडियो में यह दावा कर रहा है कि हलाल करते समय जानवर को तकलीफ नहीं बल्कि मजा आता है .मेरा तो बस इतना ही कहना है ,कि इस बात की जाँच करने के किये जकारिया नायक या किसी मुल्ले को हलाल किया जाना चाहिए .विडियो देखिये -
Islamic Way of Slaightering Animals, is it Really Brutal
http://www.youtube.com/watch?v=YuoaqAq_EV0


सब जानते है कि प्रत्यक्ष को प्रमाण देने की कोई जरुरत नहीं है .अगर अपराधों का सर्वे किया जाये तो मुसलमानों में सिर्फ दो प्रतिशत शरीफ होंगे .वह भी कानून के भय से शरीफ बन गए होंगे .एक न एक दिन सारी दुनिया को यह सत्य स्वीकार करना होगा .चूँकि भारत इस्लामी आतंक से सबसे अधिक पीड़ित है उसमे भी जानबूझकर हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है .इसलिए हमें निस्संकोच कहा चाहिए ,


"इस्लाम शांति का नहीं आतंक का धर्म है ,अल्लाह दयालु नहीं हत्यारा है "


http://rightsideonline.blogspot.com/2007/11/islam-and-terrorism-verses-in-quran.html