Tuesday, May 15, 2012

साईं पूजा: जेहादियों द्वारा भारत के हिन्‍दुओं का इस्‍लाम में मतांतरित करने का षडयंत्र

 
एक मुस्लिम संत जो की हजारों करोडो पढ़े लिखे और अमिर लोगो, लेकिन मुर्ख हिन्दुओ के द्वारा पूजा जाता है | लाखो पढ़े लिखे हिंदू एक ऐसे मुस्लिम संत के अंध भक्त होकर पूजते है जिसे हम शिरडी के साईं बाबा के नाम से जानते है| वो संत जो खुद एक मस्जिद में रहता था, सबके सामने कुरान पढता था और एक ही संदेश देता था की मुझे मरने के बाद दफना देना,, ना की जला देना, पर अधिकतर मुर्ख लोग उसे समझ नहीं पाए और उसे अपने भगवानो से ऊपर दर्जा देकर एक ऐसे मुर्दे को पूजते है जो स्वयं एक
मुसलमान है…

सिर्फ यही नहीं यह पाखंडी खुद को हिंदू देवी देवताओं का अंश बताता था स्वयं में नारायण, शिव, क्रिशन और राम जैसे हजारों देवी देवताओं के रूप में खुद की पूजा करवाता था पर हिंदू मुस्लिम एकता की बात जरुर करता था| ये एक पूरी तरह से एकतरफा कार्य है जिसमे सारा बलिदान केवल हिन्दुओ को ही देना पड़ता है जैसे की साईं राम, इस्लाम ग्रहण करना, मुस्लिम लड़के द्वारा हिंदू लड़की से शादी करना, और हिन्दुओ केबड़े धार्मिक स्थलों में मुसलमानों को ऊँचे पड़ देना आदि, और मुर्ख हिंदू इन बातो को मान भी लेता है बिना ये सोचे की परधर्म में जीना और उससे अपनाने पर लोक परलोक कही भी ठिकाना नहीं मिलता| साईं का केवल एक ही उद्देश्य था जो किसी समय अजमेर के मुस्लिम संत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिस्ती ने आरम्भ किया था| साईं का कार्य केवल उस परम्परा का निर्वहन करते हुए हिंदू को और मुर्ख बना कर इस्लाम के और समीप लाकर उनका मतांतरण कराना था| आज भी ९०० सालो की इस्लामी गुलामी के बाद हिंदू धर्म कुछ कमजोर अवश्य हुआ है और इसे दूर करने के लिए ऐसे पाखंडियों के पाखंड और षड्यंत्र को मिटाने की आवश्यकता है|

बाबा शब्द फारसी और इस्लामी संस्कृति का एक शब्द है जिसका हिंदी या संस्कृत में कोई उल्लेख नहीं है परन्तु इसे दुस्प्रचारित किया गया की ये शब्द संस्कृत का है| बाबा एक सूफी संत को मिलने वाली पदवी या नाम है जो मलेशिया के मुस्लिम संतो को मिलती है जब उन्हें कोई इस्लामिक सम्मान मिलता है| बाबा शब्द असल में दादा(पिता के पिता) का ही दूसरा अर्थ है, बाद में ये उस व्यक्ति के लिए प्रयोग में होने लगा जो किसी सनातन संस्कृति को खतम करके इस्लामी सत्ता का ध्वज किसी देश में फहराता है| इसलिए एक तरह से साईं बाबा देश में इस्लामी ध्वज फहराने के लिए पूरी तरह से इस्लामी कठमुल्लो द्वारा प्रचारित किये जा रहे है|

अल्लाह मालिक शब्द ही इस्लामी सत्ता फैला कर साईं के द्वारा हिन्दुओ को मुर्ख बना कर उन्हें धर्म से डिगाना ये सबसे बड़ा उदहारण है साईं के मुस्लिम होने का पर साईं के अंधभक्त अक्सर इस जीते जागते सबूत को ख़ारिज करते रहे है साईं के असली नाम और उसके जनम को लेकर बहुत सी कथाये और कहानिया है यहाँ तक साईं नाम भी शिर्डी हेमाडपंत द्वारा श्री साईं सत्चरित्र में दिया गया है पर ये व्यक्ति कौन है और उसने ये किताब क्यों लिखी इसका आज तक कोई प्रमाण नहीं है और इस किताब का भी कोई एतिहासिक प्रमाण नहीं है की ये किसी हिन्दू द्वारा रचित है

Courtsey: Saffron Hindu Rastra

2 comments:

Narendra Verma said...

हमारे देश के हिन्दू लोग--- बहुत ही बेवकूफ हैं । हिन्दू लोग---- अपने देवी-देवताओं की पूजा तो करते नहीं हैं बलिक---- मुसलमान फकीरों के पीछे दौड़ते रहते हैं । आज भी भारत देश में ढेर सारी कब्रें और सैययद बनी हुइ हैं ------- इनकी पूजा करने और इन पर चढ़ावा चढ़ाने के लिये हिन्दू लोग ही जाते हैं । हिन्दुओं की इस बेवकूफी का लाभ मुसलमान लोग उठा रहे हैं ।

यह सांइ बाबा भी एक मुसलमान था । इसने अपने जीवन में हिन्दुओं के भले के लिये कोइ भी काम नहीं किया । फिर भी करोड़ों हिन्दू लोग----- इसकी पूजा करते हैं । इसके नाम से बड़े-बडे़ मनिदर बनाये जाते हैं और उन मनिदरों में लाखों लोग----- करोड़ों रूपयों का चढ़ावा चढ़ाते हैं । क्यों ?????? आखिर क्यों ??????

अब तो कुछ कमीन हिन्दुओं ने एक नया कारनामा कर दिखाया है । उन कमीन हिन्दुओं ने ऐसी पुस्तकें छापनी शुरू की हैं जिनका नाम है---- सांइ बाबा की व्रत-कथा । इस पुस्तक में यह कहा जाता है कि------ जिस भी व्यकित ने इस पुस्तक में बताइ गइ विधि से व्रत किया है, उसको बहुत लाभ हुआ है । पुस्तक में ऐसे अनेक काल्पनिक (नकली) किस्से भी दिये जाते हैं ताकि---- आम जनता इस सांइ बाबा को एक चमत्कारी पुरूष माने । लेकिन सच तो यही है कि------ यह सांइ बाबा, शिरडी वाला ----- कोइ चमत्कारी पुरूष नहीं था । यह तो एक मुसलमान था और इसने कभी भी हिन्दुओं का कोइ भला नहीं किया ।

हिन्दू लोगों को इस मुसलमान सांइ बाबा की पूजा नहीं करनी चाहिये ।

Narendra Verma said...

हमारे देश के हिन्दू लोग--- बहुत ही बेवकूफ हैं । हिन्दू लोग---- अपने देवी-देवताओं की पूजा तो करते नहीं हैं बलिक---- मुसलमान फकीरों के पीछे दौड़ते रहते हैं । आज भी भारत देश में ढेर सारी कब्रें और सैययद बनी हुइ हैं ------- इनकी पूजा करने और इन पर चढ़ावा चढ़ाने के लिये हिन्दू लोग ही जाते हैं । हिन्दुओं की इस बेवकूफी का लाभ मुसलमान लोग उठा रहे हैं ।

यह सांइ बाबा भी एक मुसलमान था । इसने अपने जीवन में हिन्दुओं के भले के लिये कोइ भी काम नहीं किया । फिर भी करोड़ों हिन्दू लोग----- इसकी पूजा करते हैं । इसके नाम से बड़े-बडे़ मनिदर बनाये जाते हैं और उन मनिदरों में लाखों लोग----- करोड़ों रूपयों का चढ़ावा चढ़ाते हैं । क्यों ?????? आखिर क्यों ??????

अब तो कुछ कमीन हिन्दुओं ने एक नया कारनामा कर दिखाया है । उन कमीन हिन्दुओं ने ऐसी पुस्तकें छापनी शुरू की हैं जिनका नाम है---- सांइ बाबा की व्रत-कथा । इस पुस्तक में यह कहा जाता है कि------ जिस भी व्यकित ने इस पुस्तक में बताइ गइ विधि से व्रत किया है, उसको बहुत लाभ हुआ है । पुस्तक में ऐसे अनेक काल्पनिक (नकली) किस्से भी दिये जाते हैं ताकि---- आम जनता इस सांइ बाबा को एक चमत्कारी पुरूष माने । लेकिन सच तो यही है कि------ यह सांइ बाबा, शिरडी वाला ----- कोइ चमत्कारी पुरूष नहीं था । यह तो एक मुसलमान था और इसने कभी भी हिन्दुओं का कोइ भला नहीं किया ।

हिन्दू लोगों को इस मुसलमान सांइ बाबा की पूजा नहीं करनी चाहिये ।