Monday, November 11, 2013

ऐसे थे मौलाना अबुल कलाम आजाद

11 नवंबर पर विशेष

कभी-कभी कुछ लोग स्‍वार्थ के वशीभूत होकर इतिहास को गलत तरीके से अपने स्‍वार्थ के लिये उपयोग करते हैं। मगर सच-सच होता है उसे ज्‍यादा दिन तक छिपाया नही जा सकता। 11 नवंबर के दिन मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्‍म दिवस है। इनके जीवन पर डॉ0 संतोष राय के विचार: 



मौलाना अब्दुल कलाम के  पूर्वज लूटेरे बाबर के साथ आये थे जिन्‍होंने भारत को खूब लूटा था।
आजाद देवबंदी इस्‍लामिक संप्रदाय से आते थे। और, देवबंदी इस्‍लाम उग्र इस्‍लाम को बढ़ावा देता है। जगह-जगह जेहाद कराना उसका काम है। देवबंद इस्‍लाम पूरे दुनिया को दारूल हरब से दारूल इस्‍लाम बनाने का सपना देखता है, जिसके लिये पूरी तरह प्रयासरत है।
मोलाना आजाद खुद तो हिन्‍दू- मुस्लिम  एकता की वकालत करते हैं। मगर इस देश पर उर्दू और अरबी जबरन थोपना चाहते थे।
मौलाना आजाद खिलाफत आंदोलन के माध्यम से मुस्लिम समुदाय को और कट्टर बनाया। खिलाफत आंदोलन का मुख्‍य उद्देश्‍य तुर्की के खलीफा को फिर से उसके स्‍थान पर बिठाना था जिसे ब्रिटिशों ने कब्‍जा कर लिया था। यदि सही रूप में देखा जाये तो खलीफा आंदोलन के बाद मुसलमान और उग्र हो गये और गैर मुसलमानों की हत्‍या करने लगे।
आजाद हिन्‍दू-मुस्लिम एकता के नाम पर हमेशा कट्टरपंथी मुसलमानों से ही मेल मिलाते रहे, और उनके साथ मिलकर पूरे भारत को इस्‍लामीकरण का सपना देखते रहते थे।
   सही मायने में देखा जाये तो आजाद पूरे भारत को मुगलिस्‍तान के रूप में देखना चाहते थे। वे  भारत के इस्लामीकरण की वकालत करते हुए कहा था कि  'भारत जैसे देश को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रहा चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता और प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करे' (बी.आर.नन्दा, गांधी पैन इस्लामिज्म, इम्पीरियालज्म एण्ड नेशनलिज्म, पृ. ११७)
और तो और इनके द्वारा मुस्लिम कट्टरता को देखकर  लौह पुरूष  सरदार पटेल ने इन्‍हें कभी राष्‍ट्रवादी नही माना था। क्‍योंकि ये घोर इस्‍लाम परस्‍त थे। जबकि कांग्रेस अबुल कलाम आजाद को हिन्‍दु बहुल क्षेत्र से चुनकर सांसद बनवाती थी।
इनका यदि व्‍यापक प्रभाव देखा जाये तो नगण्‍य था। इनके प्रभाव से 1945-46 के चुनाव  में केवल 5 से 6 प्रतिशत मुसलमानों ने कांग्रेस को वोट दिया।
जिन्‍ना का आबादी का अदला-बदली प्रस्‍ताव को इन्‍होंने ही गांधी व नेहरू के द्वारा ठुकरवा दिया था। जिससे भारत को फिर इस्‍लामिक चंगुल में फंसाया जा सके।
चुनाव के समय 63 लाख मुस्लिमों ने केवल कांग्रेस को वोट दिया। इनके हिस्‍से की जमीन केवल 23000 वर्गमील बनती थी। जब इन्‍हें भारत में ही रहना था तो मौलाना आजाद को सीमा निर्धारण आयोग से कहना चाहिये था कि 7 प्रतिशत मुस्लिमों के हिस्‍सों की 23000 वर्गमील जमीन पाकिस्‍तान को न दी जाये।
    मगर आजाद ने ऐसा कुछ नही किया। यदि ये ढंग से अपने कर्तवय का निर्वहन करते तो लाहौर, स्‍यालकोट, थारपारकर और उमरकोट जिले भारत में ही रहते। अंदर ही अंदर इस्‍लामपरस्‍ती होने के कारण चाहते थे कि कितनी से कितनी ज्‍यादा जमीन पाकिस्‍तान को दे दिया जाये और ज्‍यादा से ज्‍यादा मुसलमान इस देश में रह जायें। आगे फिर इस्‍लाममिक जेहाद के द्वारा भारत को फिर एक इस्‍लामिक राष्‍ट्र बनाया जा सके।
   उनके प्रयास से खंडित भारत की नीतियां मुस्लिम समर्थक बनीं। इनके प्रयासों से ही नेहरू ने मुस्लिम तुष्‍टीकरण को बढ़ावा दिया। लोकसभा ने सर्वसम्‍मति से प्रस्‍ताव पारित कर हैदराबाद में मौलाना आजाद नेशनल विश्‍वविद्यालय बनवा दी। इनका जन्‍म दिन राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

इसके साथ  इस्लामी शासन कालों में समस्त 16 संस्कारों पर TAX
लगाया जाता था,  प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद 
के दबाव से अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहासकारों ने 
भारतीय शिक्षा पद्धति की इतिहास की पुस्तकों में जगह नहीं दी l

कलाम आजाद ने की थी बहुत बड़ी ऐतिहासिक भूल, जिसकी सजा आज की पीढि़यां भुगत रही हैं


कांग्रेस के अध्यक्ष रहे मौलाना अबुल कलाम आजाद ने  माना था कि पटेल पर नेहरू को चुनने का गांधी का फैसला गलत था। उन्होंने अपनी आत्मकथा में इस बारे में लिखा था। अबुल कलाम  के निधन के बाद 1959 में प्रकाशित उनकी आत्मकथा में उन्होंने लिखा, 'यह मेरी गलती थी कि मैंने सरदार पटेल का समर्थन नहीं किया। हम कई मुद्दों पर अलग राय रखते थे। लेकिन मुझे लगता है कि अगर मेरे बाद पटेल कांग्रेस के अध्यक्ष बनते तो शायद कैबिनेट मिशन प्लान कामयाबी से लागू किया जाता। वे नेहरू की तरह जिन्ना को पूरे प्लान को बर्बाद करने का मौका देने जैसी गलती नहीं करते। मैं अपने को कभी माफ नहीं कर सकता। जब मैं सोचता हूं मैंने ये गलतियां नहीं की होतीं तो शायद बीते दस साल का इतिहास कुछ और होता।'




Saturday, November 9, 2013

सिर्फ हिन्दू संत ही निशाने पर क्यों??...

सुरेश चिपलुनकर 

प्राचीनकाल में राजघराने हुआ करते थे, ज़ाहिर है उन राजघरानों के कई काले कारनामे भी हुआ करते थे. उन राजघरानों की परम्परा के अनुसार एक परिवार ही जनता पर अनंतकाल तक शासन किया करता था. जब कभी इन राजघरानों अथवा उनके अत्याचारों के खिलाफ किसी ने आवाज़ उठाई या तो उसे दीवार में चुनवा दिया जाता था, अथवा हाथी के पैरों तले रौंद दिया जाता था.... आज चाहे ज़माना थोड़ा बदल क्यों न गया हो, लेकिन राजघरानों” की मानसिकता अभी भी वही है, आधुनिक कालखंड में बदलाव सिर्फ इतना आया है कि अब विरोधियों को जान से मारने की आवश्यकता कम ही पड़ती हैउन से निपटने और निपटाने के नए-नए तरीके ईजाद हो गए हैं.

सारी दुनिया में यह बात मशहूर है कि चर्च संस्था (या जिसे हम मिशनरी कहें, एक ही बात है), अपने विरोधियों को खत्म करने के लिए षडयंत्र और चालबाजियाँ करने में माहिर है. चर्च के गुर्गे” (जो पूरी दुनिया में फैले हुए हैं) अपने लक्ष्य के रास्ते में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को येन-केन-प्रकारेण समाप्त करने में विश्वास रखते हैं. वेटिकन को अपना धर्मांतरण मिशन” जारी रखने के लिए निर्बाध रास्ता चाहिए होता है, साथ ही चर्चदुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है” वाले सिद्धांत पर काम करते हुए उस प्रत्येक संस्था से गाहे-बगाहे हाथ मिलाता, सहयोग करता चलता है जो उसके उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक होते हैं, फिर चाहे वे नक्सली हों या बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ...

जैसा कि सभी जानते हैं, शंकराचार्य को हिन्दू धर्म में एक उच्च स्थान प्राप्त होता है. शंकराचार्य की पदवी कोई साधारण पदवी नहीं होती, और हिंदुओं के मन में उनके प्रति आदर-सम्मान से अधिक श्रद्धाभाव होता है. लेकिन जब शंकराचार्य जैसे ज्ञानी और संत व्यक्ति को कोई सरकार सिर्फ आरोपों के आधार पर बिना किसी जाँच के, आधी रात को आश्रम से उठाकर जेल में ठूँस दे तो आम हिन्दू को कैसा महसूस होगा? तमिलनाडु में कांची कामकोटि के शंकराचार्य के साथ यही किया गया था. बगैर कोई मौका या सफाई दिए ही शंकराचार्य जैसी हस्ती को एक मामूली जेबकतरे की तरह उठाकर जेल में बंद कर दिया जाता है...


कट टू सीन २ – उड़ीसा के घने जंगलों में मिशनरी की संदिग्ध और धर्मांतरण की गतिविधियों के खिलाफ जोरदार अभियान चलाने वाले तथा आदिवासियों को चर्च के चंगुल में जाने से बचाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या हो जाती है. हालाँकि हत्या होने से पहले स्वामी जी लगातार कई बार उनको मिली हुई धमकियों के बारे में प्रशासन को बताते हैं, लेकिन सरकार कोई ध्यान नहीं देती... कुछ नकाबपोश आधी रात को आते हैं और एक ८२ वर्षीय वयोवृद्ध संन्यासी को गोली मारकर चलते बनते हैं...

कट टू सीन ३ – कर्नाटक में सनातन धर्म की अलख जगाए रखने तथा चर्च/मिशनरी के बढ़ते क़दमों को थामने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ओजस्वी युवा संत नित्यानंद सरस्वती को एक अभिनेत्री के साथ अंतरंग दृश्यों का वीडियो लीक किया जाता है. तत्काल भारत का सेकुलर मीडिया उछल-उछलकर नित्यानंद सरस्वती के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाने लगता है. TRP का भूखा, और सत्ता प्रतिष्ठानों द्वारा फेंकी हुई हड्डी चबाने में माहिर यह मीडिया अपना काम(???) बखूबी अंजाम देता है. नित्यानंद सरस्वती को जमकर बदनाम किया जाता है...


कट टू सीन ४ – दिल्ली का रामलीला मैदान, सैकड़ों स्त्री-पुरुष-वृद्ध-बच्चे आधी रात को थक-हारकर सोए हुए हैं. अचानक दिल्ली पुलिस उन पर लाठियाँ और आँसू गैस के साथ टूट पड़ती है. बाबा रामदेव को गिरफ्तार कर लिया जाता है. उनके विश्वस्त सहयोगी बालकृष्ण के खिलाफ ढेर सारे मामले दर्ज कर लिए जाते हैं. यहाँ भी मीडिया अपनीदल्लात्मक भूमिका बखूबी निभाता है. यह मीडिया खुद ही केस चलाता है, और स्वयं ही  ही फैसला भी सुना देता है. बालकृष्ण और बाबा रामदेव के खिलाफ एक भी ठोस मामला सामने नहीं आने, किसी भी थाने में मजबूत केस तक न होने और न्यायालय में कहीं भी न टिकने के बावजूद बाबा रामदेव को ठगचोरमिलावटीभगोड़ाइत्यादि से विभूषित किया जाता है.

आसाराम का मामला हो चाहे साध्वी प्रज्ञा का मामला हो...ऐसे और भी कई मामले हैं, लेकिन एक पैटर्न दिखाने के लिए सिर्फ उपरोक्त चारों मामले ही पर्याप्त हैं... आईये देखते हैं कि आखिर यह पैटर्न क्या है???

जैसा कि मैंने पहले बताया, सनातन धर्म में दक्षिण स्थित कांची कामकोटि का पीठ सबसे महत्त्वपूर्ण केन्द्र रहा है. कांची के शंकराचार्य हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार एवं अध्ययन-पठन हेतु कई केन्द्र चलाते हैं. तमिलनाडु में ब्राह्मण विरोधी या कहें कि द्रविड़ राजनीति की जड़ें बहुत गहरी हैं. इसी प्रकार दक्षिण में चर्च की गतिविधियाँ भी बेहद तेजी से बढ़ी हैं और लगातार अपने पैर पसार रही हैं. चाहे करूणानिधि द्वारा भगवान राम के अस्तित्त्व को नकारना हो अथवा अन्य तमिल पार्टियों द्वारा रामसेतु को तोड़ने में भारी दिलचस्पी दिखाना हो, सभी हिन्दू विरोधी मामलों में द्रविड़ पार्टियाँ खासी सक्रिय रहती हैं. ऐसे में कांची पीठ के सबसे सम्मानित शंकराचार्य को हत्या के मामले में फँसाना, (और न सिर्फ फँसाना, बल्कि ऐसी व्यवस्था करना कि उन्हें कम से कम एक रात तो जेल में काटनी ही पड़े) चर्च के लिए बहुत लाभकारी, लेकिन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए बड़ा झटका ही था. उपरोक्त सभी घटनाओं का मकसद यह था कि किसी भी तरह से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हों, उनका अपमान हो, उनमें न्यूनता का अहसास करवाया जाए, ताकि धर्मांतरण के आड़े आने वाले (या भविष्य में आ सकने वाले) लोगों को सबक मिले.

दूसरी घटना के बारे में भी तथ्य यह हैं कि - नक्सली कमाण्डर पांडा ने एक उड़िया टीवी चैनल को दी गई भेंटवार्ता में दावा किया कि स्वामी लक्ष्मणानन्द को उन्होंने ही मारा है। पांडा का कहना था कि चूंकि लक्ष्मणानन्द सामाजिक अशांति(???) फ़ैला रहे थेइसलिये उन्हें खत्म करना आवश्यक था। जिस प्रकार त्रिपुरा में NFLT नाम का उग्रवादी संगठन बैप्टिस्ट चर्च से खुलेआम पैसा और हथियार पाता हैउसी प्रकार अब यह साफ़ हो गया है कि उड़ीसा और देश के दूरदराज में स्थित अन्य आदिवासी इलाकों में नक्सलियों और चर्च के बीच एक मजबूत गठबंधन बन गया हैवरना क्या कारण है कि इन इलाकों में काम करने वाली मिशनरी संस्थाओं को तो नक्सली कोई नुकसान नहीं पहुँचातेलेकिन गरीब और मजबूर आदिवासियों को नक्सली अपना निशाना बनाते रहते हैं?  थोड़ा कुरेदने पर पांडा ने स्वीकार किया कि नक्सलियों के उड़ीसा स्थित कैडर में ईसाई युवकों की संख्या ज्यादा हैउन्होंने माना कि उनके संगठन में ईसाई लोग बहुमत में हैंउड़ीसा के रायगड़ागजपतिऔर कंधमाल में काम कर रहे लगभग सभी नक्सली ईसाई हैं।

अब स्वामी नित्यानंद वाले मामले पर आते हैं – दक्षिण के एक चैनल ने सबसे पहले इसस्टोरी(??) को दिखाया था. नित्यानंद को जमकर बदनाम किया गया, तरह-तरह के आरोप लगाए गए, अभिनेत्री रंजीता को भी इसमें लपेटा गया. मीडिया ट्रायल” कर-करके इस मामले में हिन्दू धर्म, भगवा वस्त्रों इत्यादि को भी जमकर कोसा गया. जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा पता चला कि पुलिस और चैनलों को नित्यानंद की सीडी देकर आरोप लगाने वाला व्यक्ति कुरुप्पन लेनिन एक धर्म-परिवर्तित ईसाई है और यह व्यक्ति पहले एक फ़िल्म स्टूडियो में काम कर चुका है तथा "वीडियो मॉर्फ़िंग" में एक्सपर्ट है जब अमेरिकी लैबोरेट्री में उस वीडियो की जाँच हुई तो यह सिद्ध हुआ कि वह वीडियो नकली था, गढा गया था. प्रणव जेम्स” रॉय के चैनल NDTV ने सबसे पहले नित्यानन्द स्वामी के साथ नरेन्द्र मोदी की तस्वीरें दिखाईं और चिल्ला-चिल्लाकर नरेन्द्र मोदी को इस मामले में लपेटने की कोशिश की (गुजरात के दो-दो चुनावों में बुरी तरह से जूते खाने के बाद NDTV और उसके चमचों के पास अब यही एक रास्ता रह गया है मोदी को पछाड़ने के लिये)। लेकिन जैसे ही अगले दिन से ट्विटर” पर स्वामी नित्यानन्द की तस्वीरें गाँधी परिवार के चहेते एसएम कृष्णा और एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी दिखाई दींतुरन्तNDTV का मोदी विरोधी सुर धीमा पड़ गया. यहाँ तक कि नित्यानन्द के स्टिंग ऑपरेशन मामले को सही ठहराने के लिये NDTV ने नारायणदत्त तिवारी वाले मामले का सहारा भी लिया तथा दोनों को एक ही पलड़े पर रखने की कोशिश की। जबकि वस्तुतः एनडी तिवारी एक संवैधानिक पद पर थेउन्होंने राजभवन और अपने पद का दुरुपयोग किया और तो और होली के दिन भी वह लड़कियों से घिरे नृत्य कर रहे थे। जबकि नित्यानन्द तथाकथित रूप से जो भी कर रहे थे अपने आश्रम के बेडरूम में कर रहे थेबगैर किसी प्रलोभन या दबाव केइसलिये इन दोनों मामलों की तुलना तो हो ही नहीं सकती। परन्तु जब दो-दो “C” अर्थात चर्च और चैनल आपस में मिले हुए हों तो किसी को बदनाम करना इनके बाँए हाथ का खेल है.


5-M (अर्थात मार्क्समुल्लामिशनरीमैकाले और मार्केट) के हाथों बिके हुए भारतीय मीडिया ने स्वामी नित्यानन्द की सीडी सामने आते ही तड़ से उन्हें अपराधी घोषित कर दिया हैठीक उसी तरह जिस तरह कभी संजय जोशी और संघ को किया था (हालांकि बाद में उनकी सीडी भी फ़र्जी पाई गई)या जिस तरह से  कांची के वयोवृद्ध शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को तमिलनाडु की सरकार ने गिरफ़्तार करके सरेआम बेइज्जत किया था। अर्थात जब भी कोई हिन्दू आईकॉन” किसी भी सच्चे-झूठे मामले में फ़ँसे तो मीडिया उन्हें अपराधी” घोषित करने में देर नहीं करता और इस समय किसी मानवाधिकारवादी के आगे-पीछे कहीं से भी कानून अपना काम करेगा…” वाला सुर नहीं निकलता। यही हाल मीडिया का भी है, जब हिन्दू संतों को बदनाम करना होगा, खुद की टीआरपी बढानी होगी उस समय तो चीख-चीखकर उनके एंकर टीवी का पर्दा फाड़ देंगे, लेकिन जब वही संत अदालतों द्वारा बेदाग़ बरी कर दिए जाते हैं उस समय यही अखबार और चैनल अपने मुँह में दही जमाकर बैठ जाते हैं. माफीनामा भी पेश करते हैं तो चुपके-चुपके अथवा अखबार के आख़िरी पन्ने पर किसी कोने में.... नित्यानंद की सेक्स सीडी फर्जी पाए जाने पर कोर्ट ने मीडिया को जमकर लताड़ लगाई थी, उनसे माफीनामा भी दिलवाया गया, परन्तु ये भेडिये इतनी आसानी से सुधरने वाले नहीं हैं, क्योंकि इनके सिर पर चर्च और सरकार (शायद एक ही बात है) का हाथ है.

अब आते हैं बाबा रामदेव के मामले पर – जिस दिन तक बाबा रामदेव सिर्फ योग सिखाते थे, उस दिन तक तो बाबा रामदेव एकदम पवित्र थे, बाबा के आश्रम में सभी पार्टियों के नेता आते रहे, रामदेव बाबा से योग सीखने-सिखाने का दौर चलता रहा. दो साल पहले जैसे ही बाबा रामदेव ने इस देश के सबसे पवित्र परिवार (अर्थात गाँधी परिवार) और काँग्रेस पर उँगली उठाना शुरू किया उसी दिन से सत्ता के गलियारे में बैठे हुए अजगर अचानक जागृत हो गए. काले धन को वापस लाने की माँग इन अजगरों को इतनी नागवार गुज़री कि इन्होंने बाबा रामदेव के पीछे देश की सभी एजेंसियाँ लगा डालीं. बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ तो बाबा रामदेव से पहले ही खार खाए बैठी थीं, क्योंकि बाबा रामदेव की वजह से कोक-पेप्सी सहित अन्य कई नकली पदार्थों की बिक्री भी प्रभावित हुई तथा उनकी गढी हुई छवि भी खराब हुई. सत्ता के अजगर और निहित स्वार्थों से भरी खून चूसक कंपनियों ने बाबा रामदेव के खिलाफ शिकंजा कसना आरम्भ कर दिया जो आज दिनांक तक जारी है.

धर्मांतरण करवाने वाले चर्च” और मीडिया की सांठगांठ इतनी मजबूत है कि - जैसे ही मीडिया में आया कि मालेगाँव धमाके में पाई गई मोटरसाईकिल भगवाधारी हिन्दू साध्वी प्रज्ञा की थी (जो काफ़ी पहले उन्होंने बेच दी थी)कि तड़ से हिन्दू आतंकवाद” नामक शब्द गढ़कर हिन्दुओं पर हमले शुरु। भले ही जेल में टुंडा, मदनी और रियाज़ भटकल ऐश कर रहे होंलेकिन साध्वी प्रज्ञा को अण्डे खिलाने की कोशिश या गन्दी-गन्दी गालियाँ देना हो… महिला आयोगसारे के सारे फर्जी नारीवादी संगठन सब कहीं दुबक कर बैठ जाते हैं, क्योंकि मीडिया ने तो पहले ही उन्हें अपराधी घोषित कर दिया है। इस नापाक गठबंधन की पोल इस बात से भी खुल जाती है कि आज तक भारत के कितने अखबारों और चैनलों ने वेटिकन और अन्य पश्चिमी देशों में चर्च की आड़ में चल रहे देह शोषण के मामलों को उजागर किया हैचलिये वेटिकन को छोड़ियेजैसा कि ऊपर आँकड़े दिए गए हैं, केरल में ही हत्या-बलात्कार-अपहरण के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं यह कितने लोगों को पता है… और पश्चिम में चर्च तो इतनी तरक्की कर चुका हैकि उधर सिर्फ़ महिलाओं के ही साथ यौन शोषण नहीं होता बल्कि पुरुषों के साथ भी गे-सेक्स” के मामले सामने आ रहे हैं… इस लिंक पर द गार्जियन की खबर पढ़िये 


सरकारी आँकड़ों के मुताबिक भारत में मिशनरी संस्थाओं का सबसे अधिक ज़मीन पर कब्जा है, लेकिन आसाराम की जमीन को लेकर कोहर्रम मचाने वाले मीडिया ने कभी हल्ला मचायामाओवादियों और नक्सलवादियों के कैम्पों में महिला कैडर के साथ यौन शोषण और कण्डोम मिलने की खबरें कितने चैनल दिखाते हैंलेकिन चूंकि हिन्दू धर्मगुरु के आश्रम में हादसा हुआ है तो मीडिया ऐसे सवालों को सुविधानुसार भुला देता हैऔर कोशिश की जाती है कि येन-केन-प्रकारेण नरेन्द्र मोदी या संघ या भाजपा का नाम इसमें जोड़ दिया जायेअथवा कहीं कुछ नहीं मिले तो हिन्दू संस्कृति-परम्पराओं को ही गरिया दिया जाये।


सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार केरल में 63 पादरियों पर मर्डर,बलात्कारअवैध वसूली और हथियार रखने के मामले विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज हैं। केरल पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले सात वर्षों में दो पादरियों को हत्या के जुर्म में सजा मिल चुकी हैजबकि दस अन्य को हत्या के प्रयास” की धाराओं में चार्जशीट किया गया है। कम्युनिस्टों का नक्सली कैडर और चर्च दोनों मिलकर एक घातक कॉम्बिनेशन” बनाते हैं। हालाँकि इसके लिये काफ़ी हद तक हमारे आस्तीन में पल रहे नकली सेकुलर” भी जिम्मेदार हैं।  इस देश में जो भी व्यक्ति चर्चचर्च के गुर्गोंअथवा पवित्र परिवार के खिलाफ कोई भी अभियान अथवा आंदोलन चलाएगा उसका यही हश्र होगा. स्वाभाविक है कि देश की दुर्दशा को देखते हुए हिन्दू संत अब धीरे-धीरे मुखर होने लगे हैं, इसलिए इन पर गाज गिरने लगी है. हिन्दू संतों के खिलाफ लगातार जारी इस दुष्प्रचार और दोगलेपन को समय-समय पर प्रकाशित और प्रचारित किया ही जाना चाहियेहमें जनता को बताना होगा कि ये लोग किस तरह से पक्षपाती हैंपक्के हिन्दू-विरोधी हैं। आए दिन सिर्फ और सिर्फ हिन्दू संतों के खिलाफ किये जाने वाले षडयंत्र और विभिन्न मामलों में उन्हें बदनाम करके फँसाने व उनसे बदले की कार्रवाईयाँ एक बड़े खेल” की ओर इशारा करती हैं...  

Saturday, November 2, 2013

रसूली उन्माद या पागलपन

डॉ0 संतोष राय की कलम से

जब किसी पुस्तक को धर्मग्रन्थ कहा जाता है ,तो लोगों को ऐसा लगता है कि जरुर इस पुस्तक में ,जनकल्याण . आत्मोन्नति ,सदाचार और समाजसुधार की शिक्षा दी गयी होगी .कुरान भी एक ऐसी किताब है ,मुसलमान जिसे अल्लाह की किताब होने का दावा करते हैं .लेकिन जिस दिन से ही कुरान संकलित की गयी थी ,उसी समय से ही आजतक उसकी बेतुकी ,अटपटी ,अर्थहीन और परस्पर विरोधी बातों पढ़कर लोग कहते हैं कि कुरान अल्लाह की किताब नहीं बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति की रचना है ,जिसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं होगा ,या वह व्यक्ति अति कल्पनाशील व्यक्ति होगा .या उसे मतिभ्रम हो गया होगा .उस समय जो लोग मुहम्मद साहब के बारे में ठीक से जानते थे वह मुहम्मद साहब के बारे में जो कहते थे वह कुरान में इस प्रकार कहा गया है ,

1-दिवास्वप्न का रोगी

ऐसे लोग जागते हुए भी सपना देखते हैं , और उनको सपने की बात सच लगती है ,इस रोग को Day dreamigया disambiguation-कहा जाता है
 .लोग कहते हैं कि इसकी बातें दिवास्वप्न की तरह हैं ,जिसे इसने अपनी कल्पना से गढ़ लिया है "सूरा -अल अम्बिया 21:5
इसी रोग के कारण मुहम्मद साहब को दिन में भी सपने में अद्भुत नज़ारे दिखते थे . कुरान में कहा है .
शहर के परले पार बेर के पेड़ के पास ,जन्नत के बिलकुल पास , जब बेर पर कुछ छाया सी पड़ी तो मैनें अल्लाह की निशानियाँ देखीं "
सूरा -नज्म 53:14 से 18
हदीस में इस आयत का खुलासा इस प्रकार दिया गया है , देखिये यह हदीस ,
अब्दुल्लाह ने कहा कि एकबार रसूल एक पेड़ से टिक कर आराम कर रहे थे ,तो उन्होंने कहा मैंने देखा कि पूरे आसमान में क्षतिज तक हरे रंग का गलीचा बिछा हुआ है . फिर उन्होने कुरान की सूरा-नज्म की 14 से 18 तक की आयत सुना दी

حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه – ‏{‏لَقَدْ رَأَى مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَى‏}‏ قَالَ رَأَى رَفْرَفًا أَخْضَرَ سَدَّ أُفُقَ السَّمَاءِ‏.‏"

"सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 456

2- पागल कवि

लोग कहते हैं यह एक पागल कवि है "सूरा -अत तूर 52:30
लोग बोले कि इसके अन्दर पागलपन भरा है "सूरा -अल मोमिनून 23:70
( there is madness in him )
लोग खाते हैं कि यह एक उन्मादी कवि है "सूरा -साफ्फात 37:36

3-मुहम्मद चालाकी

जब लोग मुहम्मद को पागल कहने लगे तो उन्होंने लोगों भरोसा दिलाने के लिए यह आयतें सुना दी .
मुहम्मद को न कोई उन्माद हुआ और न यह भूतग्रस्त है "सूरा -आराफ 7:184
(Muhamad  not mad  and   possessed )
हे नबी तुम साथियों से कहो कि तुम्हारा यह साथी (मुहम्मद ) पागल नहीं हुआ "सुरा -तकबीर 81:22
हे नबी तुम खड़े हो जाओ और दो एक अपने लोगों को साथ ले लो जो लोगों से कहें कि हमारा साथी पागल नहीं हुआ "सूरा -सबा 34:46
" हे नबी तुम पर तुम्हारे रब की कृपा है कि तुम अभीतक पागल नहीं हुए "सूरा -कलम -68:2

4-पागल कहने से नाराज

यद्यपि मुहम्मद साहब ने पूरा प्रयास किया कि लोग उनको पागल नहीं कहें , फिर भी यदि कोई पागल कह देता था ,तो वह उसे जहन्नम का भय दिखाते थे ,
और जिन लोगों ने हमारा आदर पूर्वक अभिवादन नहीं किया ,उनके लिए तो जहन्नम ही ठिकाना है "सूरा -मुजादिला 58:8

5-काल्पनिक फ़रिश्ता

मुहम्मद साहब ने लोगों में यह बात फैला रखी थी ,कि मैं तो अनपढ़ हूँ ,मैं कुरान की आयतें कैसे लिख सकता हूँ . मुझे तो अल्लाह अपने खास फ़रिश्ते जिब्रील (Gabriel ) द्वारा कुरान की आयतें भेजता रहता है .और यह वही फ़रिश्ता है ,जिसका उल्लेख तौरेत और इंजील में किया गया है .मुहम्मद साहब यही बातें अपनी सबसे छोटी पत्नी आयशा से भी कहते थे .जो एक बच्ची और नादान थी .मुहम्मद साहब को लगा कि उनकी गप्पों पर आयशा विश्वास कर लेगी . इस लिए एक दिन उन्हों आयशा से जो कहा था वह इस हदीस में दिया है ,
"अबू सलमा ने कहा कि अचानक रसूल ने आयशा को पुकार कर कहा ,आयशा वहां देखो जिब्रील खड़ा है ,जो तुम्हें सलाम कर रहा है ,तुम उसके सलाम का जवाब दो .आयशा बोली लेकिन मुझे वहां कोई दिखाई दे रहा है .
"
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهَا ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ، هَذَا جِبْرِيلُ يَقْرَأُ عَلَيْكِ السَّلاَمَ ‏"‏‏.‏ فَقَالَتْ وَعَلَيْهِ السَّلاَمُ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ‏.‏ تَرَى مَا لاَ أَرَى‏.‏ تُرِيدُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم‏.‏

बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 440

इसीतरह जब लोगों ने जब मुहम्मद साहब से उस फ़रिश्ते के आकार प्रकार ,रंगरूप के बारे में सवाल किया तो मुहम्मद साहब ने बड़ी चालाकी से यह जवाब दे दिया , जो इस हदीस में दिया है ,
"याह्या बिन सुलेमान ने कहा कि रसूल ने बताया कि एकबार जिब्रील ने मेरे घर आने का वादा किया था ,मगर दीवार पर एक कुत्ते की तस्वीर देख कर वह डर गया .और वापिस चला गया . बुखारी -
"حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ وَعَدَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم جِبْرِيلُ فَقَالَ إِنَّا لاَ نَدْخُلُ بَيْتًا فِيهِ صُورَةٌ وَلاَ كَلْبٌ‏.‏
जिल्द 4 किताब 54 हदीस 450

6-कुरान में बेतुकी आयतें

इतना होने पर भी मुहम्मद साहब फ़रिश्ते के बहाने कुरान में बेतुकी ,निरर्थक , और बेसिर पर की आयतें बनाते रहे , जिसके कुछ नमूने देखिये
-"कसम है उनकी ,जो पंक्तिबद्ध हो जाते हैं .और फिर डाँटते हैं .और झिड़कते हैं .फिर इसका जिक्र करते हैं " सूरा-अस साफ्फात 37 :1 से 3
-"कसम है तूर की .और लिखी हुई किताब की .और खुले हुए पर्ण)(parchament) की .और अपने घर की ऊंची छत की "सूरा -अत तूर 52 :1 से 4
-"कसम है उनकी जो आखिरी सीमा तक जा लेते हैं.और इधर उधर निकल लेते हैं .और उतराते(float) हैं "सूरा -अन नाजिआत 79 :1 से 3
-"कसम है उनकी जो हिनकारते है ,फिर आग झाड़ते हैं "सूरा -आदियात 100:1-2
वह खड़खडाने वाली चीज , क्या है वह खड़खडाने वाली चीज "सूरा -अल कारिया 101:1-2
और जब लोग कुरान की ऐसी ही पागलपन की बातें सुन सुन कर ऊब गए तो मुहम्मद साहब ने लोगों को यह आयत सुना दी ,
"और तुम्हारे रब ने अबतक तुम्हें नहीं छोड़ा और न तुम से ऊब गया है "सूरा -अज जुहा 93:3

7-अल्लाह ने मुहम्मद की बुद्धि छीन ली

यह एक अटल सत्य है कि जैसे हरेक ढोंगी ,पाखंडी और झूठे लोगों का एक न एक दिन भंडा जरुर फूट जाता है . उसी तरह आखिर मुहम्मद साहब को स्वीकार करना पड़ा की उनकी बुद्धि अल्लाह ने छीन ली थी .जैसा इस प्रमाणित हदीस में दिया है ,
उबदा बिन अस्सामित ने कहा कि जब लोग रमजान महीने की रात लैलतुल कद्र की सही तारीख के बारे में बहस कर रहे तो ,रसूल बोले मैं तुम्हें सही तारीख इस लिए नहीं बता सकता , क्योंकि अल्लाह ने मेरी बुद्धि छीन ली है knowledge was taken away  ("

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَادَةُ بْنُ الصَّامِتِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ يُخْبِرُ بِلَيْلَةِ الْقَدْرِ، فَتَلاَحَى رَجُلاَنِ مِنَ الْمُسْلِمِينَ فَقَالَ ‏ "‏ إِنِّي خَرَجْتُ لأُخْبِرَكُمْ بِلَيْلَةِ الْقَدْرِ، وَإِنَّهُ تَلاَحَى فُلاَنٌ وَفُلاَنٌ فَرُفِعَتْ وَعَسَى أَنْ يَكُونَ خَيْرًا لَكُمُ الْتَمِسُوهَا فِي السَّبْعِ وَالتِّسْعِ وَالْخَمْسِ ‏"‏‏.‏

सही बुखारी -जिल्द 1 किताब 2 हदीस 47

निष्कर्ष -इस्लाम के प्रचारक कितने भी कुतर्क करें ,और कुरान को अल्लाह की किताब साबित करने का कितना प्रयास करें ,लेकिन हदीस से यह सिद्ध हो चूका है कि अल्लाह ने ही मुहम्मद साहब की बुद्धि छीन ली थी .और ऊपर से मुस्लिम विद्वान् यह भी दावा करते हैं कि मुहम्मद साहब अनपढ़ थे . और यही कारण कि कुरान में जगह ,जगह बेतुकी ,ऊंटपटांग ,निरर्थक और मानवता विरोधी बातों की भरमार है .और ऐसी बातें सिर्फ एक विक्षिप्त , व्यक्ति ही कह सकता है , जिसकी बुद्धि नष्ट हो गयी हो .

और कुरान को वही लोग मान सकते हैं जिनकी बुद्धि छिन गयी हो . हमारी बुद्धि अभी तक सुरक्षित है



http://www.islamreview.com/articles/Meaningless_Quranic_Verses.shtml


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