Wednesday, June 19, 2013

दिल्‍ली पुलिस की मिली भगत से अपराधियों के हौसले बुलंद

प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय


     दिल्‍ली पुलिस सदैव आपके साथ का नारा देने वाली की जमीनी हकीकत कुछ और है। हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के और होते हैं। ज्ञात रहे कि उत्‍तम नगर निवासी शिल्‍पी जायसवाल और उसके परिवार को बलात्‍कार की साजिश में शामिल होने के फर्जी आरोप में जेल भेजने  और तिहाड़ जेल में बंद आरोपियों की पैरवी करने पर जान से मारने की धमकी देने पर आरोपी व अपराधी मानसिकता वाले उत्‍तम नगर के संजय इंक्‍लेव के निवासी किशन चन्‍द्र शर्मा के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने एवं प्रार्थिनी के परिवार की जान-माल की रक्षा हेतु थाना  बिंदापुर के एस. एच. ओ., द.प. जिला के ए.सी.पी., डी.सी.पी. और दिल्‍ली के पुलिस आयुक्‍त को 25/03/2013 को ज्ञापन दिया गया था, मगर ज्ञापन पर दो महीना से ज्‍यादा बीत जाने के बाद भी अपराधी किशन चंद्र शर्मा पर कोई कार्यवाही नही की गयी।

     इतना ही नही शिल्‍पी जायसवाल ने एक बार फिर 29/05/2013 को द. प. जिला के डी.सी.पी. व दिल्‍ली के पुलिस आयुक्‍त को श्रीराम आधार फाऊण्‍डेशन एन.जी.ओ. के माध्‍यम से ज्ञापन दिया। मगर दिल्‍ली पुलिस के भ्रष्‍ट अधिकारी इन सारे ज्ञापनों को कूड़े के ढेर में फेंक दिया और आज भी वो अपराधी प्रापर्टी डीलर दिल्‍ली पुलिस के वरदहस्‍त से खतरनाक सांड की तरह छुट्टा घूम रहा है।
   
      ज्ञात रहे कि  प्रार्थिनी की परिचित श्रीमती पान कुमारी के बेटे आलोक के विरूद्ध  थाना बिन्‍दापुर में दिनांक 19.03.2013 को बलात्‍कार का एक मामला (एफ.आई.आर. 132 धारा 376/120 बी/506) दर्ज हुई। इस मामले में आरोपी आलोक, आलोक की मां पान कुमारी और आरोपी का भाई सोनू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को 20.03.2013 को द्वारका न्‍यायालय की कोर्ट संख्‍या 513 में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को तिहाड़ भेज दिया।
    प्रार्थिनी को पीडि़ता लड़की के पिता किशन लाल शर्मा ने 20.03.2013  को प्रार्थिनी के पति के साथ विशेष बातचीत करने के लिये अपने घर सी-39, राजापुरी रोड, संजय इंक्‍लेव, उत्‍तम नगर, दिल्‍ली पर बुलाया।
     प्रार्थिनी अपने पति राजीव कुमार के साथ किशन लाल शर्मा के घर पहुंची। किशन लाल शर्मा ने राजीव कुमार से कहा कि तू बहुत बड़ा पत्रकार बनता है अक्‍सर लोगों की मदद के लिये शासन-प्रशासन को पत्र भेजता है। अगर तूने आलोक और उसकी मां के मामले में पैरवी करने का प्रयास किया तो मैं अपनी बेटी पर दबाव डालकर पुलिस में बलात्‍कार की साजिश में शामिल होने का तेरा नाम भी लिखवा दूंगा और तू भी अपने परिचित की तरह तिहाड़ जेल की हवा खायेगा।

    किशन लाल शर्मा ने कहा कि एस. एच. ओ.  और आई. ओ. निर्मला शर्मा थाना बिंदापुर से हमारा अच्‍छा परिचय है और उनसे कहकर  मैं किसी भी समय तूझे किसी भी झूठे मामले में जेल भिजवा दूंगा।

     प्रार्थिनी शिल्‍पी जायसवाल अपने पति के खिलाफ अनुचित बातें सुनकर भयभीत हो गई और बौखला गयी। उसने किशन लाल शर्मा से तिहाड़ जेल में बंद आरोपियों से कोई वास्‍ता न रखने की बात कही। यह कहकर प्रार्थिनी अपने पति के साथ अपने घर वापस चली आई।

     23.03.2013 को प्रार्थिनी अपने पति राजीव कुमार के साथ उत्‍तम नगर बस टर्मिनल शनि बाजार में सामान खरीदने गयी थी। बाजार से वापस आते समय किशन लाल शर्मा उन्‍हें मिला और कहा कि तुम दोनों मेरी पीडि़ता बेटी के विषय में अफवाह फैला रहे हो कि वो गर्भवती थी। अगर यह अफवाह फैलाना नही छोड़ोगे तो हम तुम्‍हें जेल में बंद करवा देंगे। प्रार्थिनी ने किशन लाल शर्मा से कहा कि उनकी इस अफवाह में कोई भूमिका नहीं है और न ही  इस अफवाह के विषय में उन्‍हें कोई जानकारी है।
     किशन चंद्र शर्मा ने प्रार्थिनी और उसके पति से कहा कि पुलिस शिल्‍पी जायसवाल और उसके पति का फोन टेप कर रही है और उसके आदमी हर वक्‍त तुम्‍हारे उपर नजर गड़ाये हैं और बारीकी से तुम्‍हारी हर  गतिविधियों पर निगाह रख रहे हैं। अगर तिहाड़ जेल में बंद आरोपियों की पैरवी का जरा भी शक उन पर हुआ तो उन्‍हें व उनके बच्‍चों के साथ कोई गंभीर हादसा हो सकता है। यहां तक की उनकी जान भी जोखिम में पड़ सकती है।

     किशन चंद्र शर्मा ने अपनी धमकी में यह भी कहा कि वो प्रापर्टी डीलर है और उसका भाई जिम चलाता है और बड़े-बड़े गुण्‍डे पाल रखे हैं। जो भी आरोपियों की पैरवी में थाना या अदालत जायेगा, उसे जान से मरवा देगा। उसकी पुलिस में भी सांठ-गांठ  है और पुलिस से अपने प्रभाव से वो साफ बच जायेगा। इस धमकी से प्रार्थिनी और उसका पति बहुत डर गए और उन्‍हें अपनी व प‍रिवार की जान-माल का खतरा पैदा हो गया।

     जान-माल का खतरा होने की वजह से शिल्‍पी जायसवाल  और उनका परिवार  बेहद डर गया और दिनांक 25 मार्च 2013 को आरोपी किशन चंद्र शर्मा एवं उसके असामाजिक तत्‍वों के विरूद्ध श्रीराम आधार फाऊण्‍डेशन के माध्‍यम से वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दर्ज कराकर अपने पति और बच्‍चों के साथ दिनांक 26 मार्च 2013 को अपने गांव चली गई, ताकि मामला समाप्‍त होने के बाद दिल्‍ली वापस आकर निर्भय और शांति पूर्वक रह सकें।

     किशन चंद्र शर्मा की छोटी बेटी मनीषा  उर्फ चेट्टी की अपने एक पुरूष मित्र से बातचीत का ऑडियो कैसेट मिला है, जिसमें वो अपने पुरूष मित्र से कह रही है कि ओम के पापा यानी  राजीव कुमार के दिल्‍ली पहुंचते ही उसकी बड़ी बहन मेरे पिता का इशारा  पाकर राजीव और उनके मित्र चंदू का नाम लेगी कि ये लोग मेरे घर पर रिवाल्‍वर लेकर आये मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। फिर मेरे पिता पुलिस में अपनी जान-पहचान का फायदा उठाकर राजीव और चंदू को तिहाड़ जेल भिजवा देंगे।

     ऑडियो कैसेट में मनीषा उर्फ चेट्टी ने अपने पुरूष मित्र से यह भी कहा कि मेरे पिता किशन चंद शर्मा राजीव के गांव से लौटने के बाद खूब मारेंगे और अपने गुण्‍डों से पिटवायेंगे। उसने यह भी कहा कि पुलिस में किशन चंद्र शर्मा की अच्‍छी पहचान होने के कारण  राजीव तथा चंदू के पूरे परिवार को जेल में बंद करवा देंगे।

     उपरोक्‍त ऑडियो सी.डी. से स्‍पष्‍ट होता है कि किशन चंद्र शर्मा शिल्‍पी जायसवाल के पति‍ राजीव कुमार को झूठे केस में फंसाने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है और उनके परिवार के साथ कभी भी किसी भी हादसे  अंजाम दे सकता है। सीडी में उसकी बेटी ने साफ-साफ कहा है कि उसका बाप उसके पूरे परिवार को फंसाकर जेल की हवा खिलायेगा।

     किशन चंद्र शर्मा शिल्‍पी जायसवाल के परिवार से इतना चिढ़ा है कि वह उन्‍हें व उनके  परिवार के लोगों को फंसाने के लिये किसी भी सीमा तक जा सकता है। शर्मा पुलिस के साथ मिलकर श्रीमती जायसवाल के घर पर कोई नशीला पदार्थ रखवाकर उन्‍हें फंसवा सकता है, अपने ही बच्‍चों को गायब कर उन्‍हें अपहरण की साजिश में फंसवा सकता है। वह अपने ही घर में गोली चलवाकर, बम विस्‍फोट करवाकर उनके  पति पत्रकार राजीव कुमार व पूरे परिवार को फंसवा सकता है।

     ज्ञात रहे कि किशन चंद्र शर्मा जब विष्‍णु प्रकाश दूबे के निवास आर-जेड-34, मानसकुंज, उत्‍तम नगर, दिल्‍ली में किराये पर रहता था तब उसके उपर किसी ने जान लेवा हमला किया था। इस व्‍यक्ति की हमेंशा किसी न किसी से दुश्‍मनी रहती है इसलिये भविष्‍य में पुन: इस व्‍यक्ति के उपर कोई हमला होता है तो इसके लिये शिल्‍पी जायसवाल का परिवार किसी भी हाल में जिम्‍मेदार नही होगा ऐसा उन्‍होने अपने ज्ञापन में कहा है।

     अपराधी किशन चंद शर्मा की ताकत उसका जिम वाला भाई है, जब जरूरत होती है तो उसके भाई के जिम के गुण्‍डे उसका साथ देने के लिये आ जाते हैं। इसके साथ किशन चंद्र शर्मा के कई ऐसे दोस्‍त हैं जो खूंखार अपराधी प्रवृत्ति के हैं जो किशन चंद्र शर्मा की मदद करते हैं। किशन चंद्र शर्मा ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के मित्रों के बल पर शिल्‍पी जायसवाल के परिवार को  धमकाता रहता है।

    किशन चंद्र शर्मा अपनी बेटी के बलात्‍कार के आरोप को अपने विरोधी के खिलाफ उसका भरपूर लाभ उठाना चाहता है। यानी जो भी किशन चंद्र शर्मा का विरोध करेगा उसकी बेटी बलात्‍कार पीडि़ता होने के नाते उसे बलात्‍कार के आरोपी के मददगार के रूप में, जान से मारने की धमकी देने के इल्‍जाम में गिरफ्तार करवा देगी, जिसका खुलासा किशन चंद्र शर्मा की बेटी मनीषा उर्फ  चेटीके द्वारा अपने पुरूष मित्र से बातचीत की ऑडियो सीडी से हो गया है।

     ज्ञापन में शिल्‍पी जायसवाल ने यह भी कहा है कि किशन चंद्र शर्मा अपनी बड़ी बेटी, दूसरी छोटी बेटी मनीषा उर्फ चेटी और अपनी पत्‍नी सीता शर्मा को आगे कर उनके पति राजीव कुमार पर कोई भी गंदे, घिनौने आरोप लगवा सकती है, यदि भविष्‍य में इस तरह के आरोप लगता है तो वो पूरी तरह से गलत व बेबुनियाद होगा।

    भविष्‍य में उनके पति राजीव कुमार व हमारे परिवार के उपर कोई हमला होता है तो इसके लिये किशन चंद्र शर्मा व उसका परिवार और उसके गुण्‍डे मित्र व उसका समर्थन करने वाले कुछ प्रापर्टी डीलर जिम्‍मेदार होंगे।    पत्रकार राजीव कुमार 27.05.2013 को दिल्‍ली आये हैं और उसके बाद से उन्‍हें धमकियां मिलनी शुरू हो गयी।

     दिनांक 25 मार्च 2013 व इसके बाद 29 मई 2013 को आरोपी किशन चंद्र शर्मा एवं उसके सामाजिक तत्‍वों के विरूद्ध श्रीराम आधार फाउण्‍डेशन के माध्‍यम से वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दर्ज करवाई गई थी, मगर आरोपी किशन चंद्र शर्मा के विरूद्ध पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही नही की।
          शिल्‍पी जायसवाल ने आगे मांग की है कि प्रार्थिनी और उसके पति को बलात्‍कार की साजिश में अपनी बेटी के माध्‍यम से फंसाने, तिहाड़ जेल में बंद आरोपियों की पैरवी करने से जबरन रोकने, प्रार्थिनी और उसके पति व परिवार की हत्‍या करवाने की धमकी देने के आरोप में धमकी देने वाले किशन चंद्र शर्मा के विरूद्ध समुचित धाराओं में एफ.आई.आर. दर्ज कर उसे गिरफ्तार करवायें।
    यदि प्रार्थिनी पति व बच्‍चों के साथ घर या घर के बाहर कोई हादसा होता है तो उसके लिये जिम्‍मेदार किशन चंद्र शर्मा और उसके गुण्‍डे होंगे। प्रार्थिनी व उसके परिवार की हिफाजत की जाये।

आरती मिश्र को भी धमकियां मिलती हैं

     धम‍की देने का सिलसिला यहीं नही थमता। शिल्‍पी जायसवाल की परिचित आरती मिश्र को भी किशन चंद्र शर्मा बुरी तरह धमकाता था कि यदि तुम पैरवी में आगे आयी तो तुम्‍हारे पूरे परिवार जेल में सड़ेंगे। इन्‍ही धमकियों से आजिज आरती मिश्र ने शिल्‍पी जायसवाल के साथ अपनी शिकायत थाने से लेकर पुलिस आयुक्‍त तक करायी थी। मगर प्रापर्टी डीलर  के पैसे का कमाल देखिये कि बिंदापुर थाना, दिल्‍ली की आई. ओ. व सब इंस्‍पेक्‍टर निर्मल शर्मा नं0 डी 1414 पीआईएस नं0 24860002  ने उस अपराधी आरोपी का पक्ष लेते हुये दिनांक 30 मार्च 2013 को अपने मोबाइल फोन नं0 9911922946 से आरती मिश्रा के फोन नं0 9716949468 पर फोन करके कहा कि अपनी शिकायत तुरंत वापस ले लो अगर शिकायत वापिस नहीं ली तो तुम्‍हारा नाम भी बलात्‍कार और बलात्‍कार की साजिश में शामिल आरोपियों के नामों की सूची में चार्ज-सीट में डाल दूंगी और तुम्‍हें और तुम्‍हारे पति को अंदर करवा दूंगी। वह अपराधी निर्मल शर्मा की मदद से साजिश पर साजिश रचता जा रहा है निर्मल शर्मा उसे नये-नये गुर सिखाते जा रही हैं। ऐसे पुलिस अधिकारियों के चलते दिल्‍ली में अपराधियों के हौसलें बुलंद है।

साभार: क्रांति4पीपुल डॉट कॉम

    

Sunday, March 17, 2013

मुलायम पुत्र के राज में हिन्‍दुओं पर कहर जारी है



डॉ0 संतोष  राय

अखिलेश राज में हिन्‍दुओं के बेटियों की इज्‍जत तार-तार हो रही है

 कासगंज, 0 प्र0। उत्‍तर प्रदेश में जबसे अखिलेश राज आया है तबसे मानो हिन्‍दुओं पर जुल्‍मों-सितम की एक बाढ़ सी आ गयी है। अखिलेश राज हिन्‍दुओं को मुगलकाल की याद ताजा कर रही है। 12 मार्च 2013 को शाम करीब 4 बजे एक हिन्‍दू बच्‍ची का निर्ममता पूर्वक बलात्‍कार किया गया। लड़की लहूलुहान होकर बेहोश हो गयी। उसे अस्‍पताल ले जाया गया जहां डॉक्‍टरों ने बलात्‍कार की पुष्टि कर दी। जिस युवक ने बलात्‍कार किया वो विशेष संप्रदाय का था। पीडि़त बच्‍ची एक मजदूर की बेटी थी, उसका बाप तम्‍बाकू के कारखाने में मजदूरी करके किसी तरह जीवन-यापन करता था। 

बलात्‍कार की यह घटना थाना पटियाली जिला कासगंज उत्‍तर प्रदेश का है।
पुलिस ने किसी तरह से एफ0 आई0 आर दर्ज करके मोहम्‍मद मुवीन सैफी नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, आरोपी की गिरफ्तारी पर मुसलमानों ने जमकर हंगामा बरपाया। मगर मौलवियों व मुल्ला अखिलेश यादव की पुलिस ने मीडिया को फटकने तक नही दिया। बलात्‍कार के आरोपी मुवीन सैफी की उम्र 25 साल है। अदालत में सैकड़ों मुसलमान आरोपी बलात्‍कारी को बचाने आ गये थे। मुवीन सैफी की नजर पीडि़ता के दूसरे एक और बहन जिसकी उम्र 10 वर्ष की थी उस पर थी मगर वो घटना के दिन कही अन्‍यत्र गयी हुयी थी। इसलिये मुवीन सैफी ने उस 5 साल की मासूम हिन्‍दू बच्‍ची की इज्‍जत को तार-तार कर दिया।

ज्ञात रहे कि 15 मार्च 2012 को मुल्‍ला मुलायम के सुपुत्र अखिलेश यादव ने यूपी की बागडोर संभाली थी और शपथ ली थी कि वो उत्‍तर प्रदेश की तस्‍वीर बदल देंगे। उन्‍होंने कहा था कि प्रदेश अपराध मुक्‍त होगा। मगर उनकी इस शपथ के सिर्फ 100 दिन बाद यानी कि 26 जून 2012 तक के आंकड़ों पर ध्‍यान दें तो यूपी में बलात्‍कार की 1164, हत्‍या की 370 , लूट के 920 और अपहरण के 356 मामले सामने आये।

अब चुकि उनकी सरकार 365 दिन पूरा कर लिया है तो सारे आंकड़ों को तीन गुना कर देना चाहिए। अखिलेश राज में हिन्‍दुओं पर अत्‍याचार की एक आंधी आ गयी है। मुसलमानों का दुस्‍साहस काफी बढ़ गया है। हिन्‍दुओं को ऐसा लग रहा है मानों मुगलकाल के औरंगजेबी शासन में जी रहे हैं।
पीड़िता की हालत अब भी नाजुक है और में लगातार वहां के डाक्टर के संपर्क में हूँ और पल-पल की जानकारी मिल रही है !

Wednesday, March 6, 2013

हराम और हलाल इस्लाम का कमाल !


डॉ0 संतोष राय

सभी लोग अच्छी तरहसे जानते हैं कि भारत के मुसलमान हमेशा "वन्देमातरम " का विरोध करते हैं . और कहते हैं कि ऐसा बोलना हराम है .यानि पाप है .इस्लाम में जायज -नाजायज ,वैध -अवैध अर्थात हलाल और हराम की बड़ी विचित्र और तर्कहीन अवधारणा है ,जो कुरान ,हदीसों ,और मुफ्तियों द्वारा समय समय पर दिए फतवों के आधार पर तय की जाती है . जिसे मानना हर मुसलमान के लिए अनिवार्य होता है . वर्ना उसे काफ़िर समझा जाता है .इसलिए मुसलमान हमेशा हर विषय हराम और हलाल के आधार पर ही तय करते हैं , चाहे वह देश के संविधान या कानून के विरुद्ध ही क्यों न हो .वह विना समझे अंधे होकर उसका पालन करते हैं .
इस संक्षिप्त से लेख में कुरान ,हदीसों ,फतवों ,और समाचारों में प्रकाशित खबरों से चुन कर एक दर्जन ऐसे मुद्दे दिए जा रहे हैं , जिनको पढ़ कर प्रबुद्ध पाठक ठीक से समझ जय्र्गे कि इस्लाम के अनुसार हराम क्या है ,और हलाल क्या है .
1 -अल्लाह का नाम लिए बिना जानवर को मारना हराम है .
लेकिन जिहाद के नाम से हजारों इंसानों का क़त्ल करना हलाल है .

2-यहूदियों ,ईसाइयों से दोस्ती करना हराम है .
लेकिन यहूदियों ,ईसाईयों का क़त्ल करना हलाल है .
3-टी वी और सिनेमा देखना हराम है .
लेकिन सार्वजनिक रूप से औरतों को पत्थर मार हत्या करते हुए देखना हलाल है .
4-किसी औरत को बेपर्दा देखना हराम है .
लेकिन किसी गुलाम औरत को बेचते समय नंगा करके देखना हलाल है .
5-शराब का धंदा करना हराम है .
लेकिन औरतों ,बच्चों को गुलाम बना कर बेचने का धंदा हलाल है .
6-संगीत सुनना हराम है .
लेकिन जिहाद के कारण मारे गए निर्दोष लोगों के घर वालों की चीख पुकार सुनना हलाल है .
7घोड़ों की दौड़ पर दाव लगाना हराम है .
लेकिन काफिरों के घोड़े चुरा कर बेचना हलाल है
8-औरतों को एक से अधिक पति रखना हराम है .
लेकिन मर्दों लिए एक से अधिक पत्नियाँ रखना हलाल है .
9-चार से अधिक औरतें रखना हराम है .
लेकिन अपने हरम में सैकड़ों रखेंलें रखना हलाल है .
10किसी मुस्लिम का दिल दुखाना हराम है .
लेकिन किसी गैर मुस्लिम सर कटना हलाल है .
11-औरतों के साथ व्यभिचार करना हराम है .
लेकिन जिहाद में पकड़ी गयी औरतों के साथ सामूहिक बलात्कार करना हलाल है .
12-जब किसी औरत की पत्थर मार कर हत्या की जारही हो ,तो उसे बचाना हराम है .
जब उसी अपराध के लिए औरत को जिन्दा जलाया जा रहा हो ,तमाशा देखना हलाल है .
इन थोड़े से मुद्दों को ध्यान से पढ़ने से उन लोगों की आँखें खुल जाना चाहिए तो इस्लाम को शांति का धर्म समझ बैठे हैं .इसलिए "भंडाफोडू " ब्लॉग पिछले चार सालों से अपने प्रमाण सहित लेखों के माध्यम से देश प्रेमी लोगों को इस्लाम से सचेत करता आया है . ताकि भूले से भी कोई व्यक्ति जकारिया नायक जैसे धूर्त के जाल में नहीं फसे .जिनको भी इस लेख के सम्बन्ध में इस्लामी किताबों के प्रमाण चाहिए वह "भंडाफोडू " के सभी लेख पढ़ने का कष्ट करें .
ऐसे कमाल के तर्कहीन इस्लाम से जितनी दूरी बनाये रखोगे उतने ही निरापद रहोगे !!

http://www.faithfreedom.org/Articles/AyeshaAhmed20729.htm

आप इस आर्टिकल को  यहां भी पढ़ सकते हैं: भंडाफोडू


Friday, February 22, 2013

हिन्दू महासभा के नाम पर अवैध संगठन चलाने पर दिल्ली उच्च न्यायलय ने अवमानना का संज्ञान लिया !




विदित हो की दिल्ली उच्च न्यायलय की खंडपीठ ने एल. पी. ए. नं0 522/2011 पर हिन्दू महासभा की केंद्रीय उच्चाधिकार समिति की याचिका पर अपना निर्णय दिया था की स्वामी चक्रपाणी व अन्य अपने आपको राष्ट्रीय पदाधिकारी नहीं कह सकते ! इस निर्णय के पश्चात भी स्वामी चक्रपाणी व चन्द्र प्रकाश कौशिक अपने आपको राष्‍ट्रीय  अध्यक्ष एवं इनके सहयोगी अपने आपको स्वयंभू राष्‍ट्रीय  पदाधिकारी घोषित कर प्रशासन एवं राष्ट्र को कई वर्षों से दिग्भ्रमित कर रहे थे ! इसके खिलाफ केंद्रीय उच्चधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ संतोष राय ने दिल्ली उच्च न्यायलय में अपने अधिवक्ता श्री अवधेश कुमार सिंह के माध्यम से अपराधिक मनोवृत्ति व भू‍माफिया, जो अखिल भारत हिन्दू महासभा के स्वंभू व अवैध राष्ट्रीय पदाधिकारी समाचार पत्रों के माध्‍यम से घोषित कर रखा था,  के खिलाफ न्यायलय की अवमानना का वाद डाला

 कल वाद संख्या 104/2013 डॉ संतोष राय बनाम चन्द्र प्रकाश कौशिक व अन्य पर माननीय न्यायमूर्ति जे. एस. सिस्‍तानी  ने न्यायलय की अवमानना की नोटिस पांच लोगों के खिलाफ स्वीकार कर जारी किया, जिसमे चन्द्र प्रकाश कौशिक, मुन्ना कुमार शर्मा, विरेश त्यागी, स्वामी चक्रपाणी तथा डॉ इंदिरा तिवारी हैं ! अधिवक्ता श्री अवधेश कुमार सिंह के तर्कों से प्रभावित कर तथा कागजाती साक्ष्यों के आधार पर 17 अप्रैल 2013 को माननीय न्यायमूर्ति ने नोटिस जारी करते हुए जबाब देने का तिथि निश्चित किया !

Tuesday, January 15, 2013

मुसलमानों के अधिकार का औचित्य !


डॉ0 संतोष राय

विश्व के हरेक व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार मिलना चाहिए . सभी इस बात पर सहमत होंगे . परन्तु इस बात से भी सभी लोग सहमत होंगे अधिकारों का जन्म कर्तव्य से होता है .सिर्फ जनसख्या कम होने के आधार पर ही अधिकारों की मांग करना तर्कसंगत नहीं है . सब जानते कि मुसलमानों ने सैकड़ों साल तक इस देश को लूट लूट कर कंगाल कर दिया . लोगों की भलाई की जगह मकबरे , कबरिस्तान , मजार और मस्जिदें ही बनायी है . और जब हिदू देश की आजादी के लिए शहीद हो रहे थे ,तो इन्हीं मुसलमानों ने देश के टुकडे करवा दिए . फिर भी अल्पसंख्यक होने का बहाना लेकर अधिकारों की मांग कर रहे हैं . आप एक भी ऐसा मुस्लिम देश बता दीजिये जहाँ अल्पसंख्यक होने के आधार पर गैर मुस्लिमों को वह अधिकार मिलते हों ,जो मुसलमान यहाँ मांग रहे हैं . मुसलमान हमेशा दूसरों के अधिकार छीनते आये हैं और आपसी मित्रता ,सद्भाव , भाईचारे की आड़ में पीठ में छुरा भोंकते आये हैं यह इस्लाम के इतिहास से प्रमाणित होता है , मुसलमान अपनी कपट नीति नहीं छोड़ सकते , कैसे कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं हो सकती ,

1-मुसलमानों की कपट नीति
अरब के लोग पैदायशी लुटेरे , और सतालोभी होते हैं .मुहम्मद की मौत के बाद ही उसके रिश्तेदार खलीफा बन कर तलवार के जोर पर इस्लाम फैलाने लगे . और जिहाद के बहाने लूटमार करने लगे , यह सातवीं शताब्दी की बात है , उस समय मुसलमानों का दूसरा खलीफा "उमर इब्ने खत्ताब " दमिश्क पर हमला करके उस पर कब्ज़ा कर चुका था . उम्र का जन्म सन 586और 590 ईस्वी के बीच हुआ था और मौत 7नवम्बर 644 ईस्वी में हुई थी . चूंकि यरूशलेम दमिश्क के पास था ,और वहां बहुसंख्यक ईसाई थे . यरूशलेम स्थानीय शासन "पेट्रीआर्क सोफ़्रोनिअसSophronius  " (Σωφρόνιος ) के हाथों में था . ईसाई उसे संत (Saint ) भी मानते थे .यरूशलेम यहूदियों ,ईसाइयों और मुसलमानों के लिए पवित्र शहर था . और उमर बिना खूनखराबा के यरूशलेम को हथियाना चाहता था . इसलिए उसने एक चाल चली . और यरूशलेम के पेट्रआर्क सन्देश भेजा कि इस्लाम तो शांति का धर्म है . यदि आप के लोग समर्पण कर देगे तो हम भरोसा देते है कि आपकी और आपके लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे .और इसके साथ ही उमर एक संधिपरत्र का मसौदा ( Draft ) यरूशलेम भिजवा दिया . जिस पर यरूशलेम के पेर्ट्रीआर्क ने सही कर दिए . और उमर पर भरोसा करके यरूशलेम उमर के हवाले कर दिया .

2-उमर का सन्धिपत्र
इस्लामी इतिहास में इस संधिपत्र को " उमर का संधिपत्र ( Pact of Umar ) या " अहद अल उमरिया  العهدة العمرية " कहा जाता है .इसका काल लगभग सन 637 बताया जाता है . उमर ने यह संधिपत्र "अबूबक्र मुहम्मद इब्न अल वलीद तरतूशأبو بكر محمد بن الوليد الطرطوش"  " से बनवाया था .जिसने इस संधिपत्र का उल्लेख अपनी प्रसिद्ध किताब " सिराज अल मुल्क  سراج الملوك" के पेज संख्या 229 और 230 पर दिया है .इस संधिपत्र का पूरा प्रारूप " एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी University of Edinburgh  " ने सन 1979 में पकाशित किया है .इस संधिपत्र की शर्तों को पढ़ने के बाद पता चलेगा कि मित्रता के बहाने मुसलमान कैसा धोखा देते हैं . और अल्पसंख्यकों को अधिकार देने के बहाने उनके अधिकार छीन लेते है . यद्यपि उमर ने इस्लाम को शांति का धर्म बता कर लोगों गुमराह करने के लिए इस संधिपत्र बड़ा ही लुभावना शीर्षक दिया था

3-इस्लामी शासन में गैर मुस्लिमों का अधिकार !
यद्यपि उमर का संधिपत्र सातवीं सदी में लिखा गया था लेकिन सभी मुस्लिम देश इसे अपना आदर्श मानते है . और हरेक मुस्लिम देश के कानून में उमर के संधिपत्र की कुछ न कुछ धाराएँ जरुर मौजूद है ,उमर के संधिपत्र का हिंदी अनुवाद यहाँ दिया जा रहा है ,
1-हम अपने शहर में और उसके आसपास कोई नया चर्च ,मठ , उपासना स्थल , या सन्यासियों के रहने के लिए कमरे नहीं बनवायेंगे . और उनकी मरम्मत भी नहीं करवाएंगे . चाहे दिन हो या रात
2-हम अपने घर मुस्लिम यात्रियों के लिए हमेशा खुले रखेंगे , और उनके लिए खाने पीने का इंतजाम करेंगे
3-यदि कोई हमारा व्यक्ति मुसलमानों से बचने के लिए चर्च में शरण मांगेगा ,तो हम उसे शरण नहीं देंगे
4-हम अपने बच्चों को बाईबिल नहीं पढ़ाएंगे
5-हम सार्वजनिक रूप से अपने धर्म का प्रचार नहीं करेंगे , और न किसी का धर्म परिवर्तन करेंगे .
6-हम हरेक मुसलमान के प्रति आदर प्रकट करेंगे , और उसे देखते ही आसन से उठ कर खड़े हो जायेंगे . और जब तक वह अनुमति नहीं देता आसन पर नहीं बैठेंगे .
7-हम मुसलमानों से मिलते जुलते कपडे ,पगड़ी और जूते नहीं पहिनेंगे
8-हम किसी मुसलमान के बोलने ,और लहजे की नक़ल नहीं करेंगे और न मुसलमानों जैसे उपनाम (Surname ) रखेंगे
9-हम घोड़ों पर जीन लगाकर नहीं बैठेंगे , किसी प्रकार का हथियार नहीं रखेंगे , और न तलवार पर धार लगायेंगे
10-हम अपनी मुहरों और सीलों ( Stamp ) पर अरबी के आलावा की भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे
11-हम अपने घरों में सिरका (vinegar ) नहीं बनायेंगे
12-हम अपने सिरों के आगे के बाल कटवाते रहेंगे
13-हम अपने रिवाज के मुताबिक कपडे पहिनेंगे ,लेकिन कमर पर "जुन्नार" ( एक प्रकार का मोटा धागा ) नहीं बांधेंगे
14-हम मुस्लिम मुहल्लों से होकर अपने जुलूस नहीं निकालेंगे , और न अपनी किताबें , और क्रूस प्रदर्शित करेंगे , और अपनी प्रार्थनाएं भी धीमी आवाज में पढेंगे
15-यदि कोई हमारा सम्बन्धी मर जाये तो हम जोर जोर से नहीं रोयेंगे , और उसके जनाजे को ऐसी गलियों से नहीं निकालेंगे जहाँ मुसलमान रहते हों . और न मुस्लिम मुहल्लों के पास अपने मुर्दे दफनायेंगे
16 -यदि कोई मुसलमान हमारे किसी पुरुष या स्त्री को गुलाम बनाना चाहे ,तो हम उसका विरोध नहीं करेंगे
17-हम अपने घर मुसलमानों से बड़े और ऊँचे नहीं बनायेंगे

" जुबैरिया बिन कदमा अत तमीमी ने कहा जब यह मसौदा तैयार हो गया तो उमर से पूछा गया , हे ईमान वालों के सरदार , क्या इस मसौदे से आप को संतोष हुआ , तो उमर बोले इसमें यह बातें भी जोड़ दो ,हम मुसलमानों द्वारा पकडे गए कैदियों की बनायीं गयी चीजें नहीं बेचेंगे . और हमारे ऊपर रसूल के द्वारा बनाया गया जजिया का नियम लागू होगा " बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 38

4-पाकिस्तान में हिन्दुओं के अधिकार

पाकिस्तान की मांग उन्हीं मुसलमानों ने की थी जो अविभाजित भारत के उसी भाग में रहते थे जो अज का वर्त्तमान भारत है .पाकिस्तान बनाते ही जिन्ना ने कहा था आज से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों द्वार सील हो गया है "the fate of minorities in this country was sealed forever "
पाकिस्तान में इसी लिए अकसर आये दिन हिन्दू लड़कियों पर बलात्कार होता है , मंदिर तोड़े जाते हैं , बल पूर्वक धर्म परिवर्तन कराया जाता है .और हमारी हिजड़ा सेकुलर सरकार हिना रब्बानी के साथ मुहब्बत के तराने गाती रहती है . दिखने के लिए पाकिस्तान के संविधान की धारा 20 में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का दावा किया गया है . लेकिन मुसलमान संविधान की जगह उमर की संधि पर अमल करते हैं .
हम लोगों से पूछते हैं , सरकार मुसलमानों को अधिकार किस खजाने से देगी ? क्या सोनिया इटली से खजाना लाएगी ?सीधी सी बात है कि मुसलमानों को अधिकार हिन्दुओं से छीन कर दिया जायेगा .
और अब समय आ गया है कि हिन्दू अपना अधिकार इन लुटेरों को देने की बजाये इन छीन लें . तभी देश की गरीबी दूर हो जाएगी औए आतंकवाद भी समाप्त हो जायेगा . क्योंकि हमारे ही पैसों से हमारा ही नाश हो रहा है .
हिन्दुओ अपनी अस्मिता बचाओ , अपने अधिकार छीन लो , अभी उठो !

http://www.bible.ca/islam/islam-kills-pact-of-umar.htm

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