Saturday, December 22, 2012

क्या आप जानते हैं कि ...... सेक्यूलर नामक जीव कैसे तैयार किया जाता है....????







दरअसल.... हम हिन्दुओं का इतिहास काफी गौरवशाली है..... और

ये ईसाई... तथा .... इस्लाम-फिस्लाम ..... हमारे गौरवशाली हिन्दू 

धर्म के सामने..... "धूल बराबर भी नहीं" हैं...!

इसीलिए .... हरामी सेक्युलरों और देश के गद्दारों द्वारा..... ये 

महसूस किया गया कि...... जब तक हिन्दू अपने गौरवशाली 

इतिहास से अवगत रहेंगे ..... तक तक हिन्दुओं को सेक्यूलर

 नामक नपुंसक बनाना नितांत असंभव है..!

इसीलिए...... ऐसे गद्दारों ने ..... हमारे स्कूलों के पाठयक्रम को अपना
सबसे मजबूत हथियार बनाया.... ताकि.... हम हिन्दुओं के मन में बचपन से ही हीन भावना भरी जा सके.... और, धीरे धीरे ..... सेक्यूलर नामक नपुंसक हिन्दू में परिवर्तित कर दिया जाए...!

इस तरह... करते-करते .... आज स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है 

कि....... हिन्दू संस्कारों , और ... धर्म की बात करने पर..

... विधवा प्रलाप करने वाले.... तथा, बात-बात पर छाती कूटने वाले 

..... सेक्यूलर लोग एवं मीडिया ..... इस बात पर कभी भी छाती 

कूटते नजर नहीं आते हैं ..... जब हमारे माननीय प्रधानमंत्री विदेश 

के कांफ्रेंस में जाकर मंच पर यह बयान देते हैं कि...... ""हम 

भारतीय तो पहले जंगली थे.... और, हम अंग्रेजों के बहुत आभारी 

हैं.., जिन्होंने हमें गुलाम बनाकर.... हमें सभ्यता सिखलाई...!""

आप खुद ही देखें कि..... हरामी सेक्युलरों और देश के गद्दारों 

द्वारा..... हमारे स्कूलों में .... कैसी शिक्षा दी जा रही है .... और

, कैसे धीरे-धीरे उन्हें हिंदुत्व से दूर करते हुए.....उनमे हीन भावना 

भर कर..... उन्हें सेकुलर नामक नपुंसक जीव बनाया जा रहा है...!

क्या कोई सेक्यूलर या बुद्धिजीवी ... मुझे इन बातों का तर्कसंगत जबाब दे दे सकता है कि..... ऐसा क्यों है.....??????

1. जो जीता वही चंद्रगुप्त ना होकर... जो जीता वही सिकन्दर 

"""कैसे"""" हो गया... ???

(जबकि ये बात सभी जानते हैं कि.... सिकंदर को चन्द्रगुप्त मौर्य 

ने .. बहुत ही बुरी तरह परास्त किया था.... जिस कारण , सिकंदर 

ने मित्रता के तौर पर अपने सेनापति सेल्युकश कि बेटी की शादी 

चन्द्रगुप्त से की थी)

2. महाराणा प्रताप ""महान""" ना होकर......... अकबर """महान""" कैसे 

हो गया...???

(जबकि, अकबर अपने हरम में हजारों हिन्दू लड़कियों को रखैल के 

तौर पर रखता था.... जबकि.. महाराणा प्रताप ने..... अकेले दम पर 

उस अकबर के लाखों की सेना को घुटनों पर ला दिया था)

3. सवाई जय सिंह को """महान वास्तुप्रिय""" राजा ना कहकर .. 

........शाहजहाँ को यह उपाधि किस आधार मिली ...... ???


जबकि... साक्ष्य बताते हैं कि.... जयपुर के हवा महल से लेकर 

तेजोमहालिया {ताजमहल} तक .... महाराजा जय सिंह ने ही 

बनवाया था)

4. जो स्थान महान मराठा क्षत्रप वीर शिवाजी को मिलना चाहिये 

वो.......... क्रूर और आतंकी औरंगजेब को क्यों और कैसे मिल गया ..????

5. स्वामी विवेकानंद और आचार्य चाणक्य की जगह... ..... गांधी 

को महात्मा बोलकर .... हिंदुस्तान पर क्यों थोप दिया 

गया...??????

6. तेजोमहालय- ताजमहल...........लालकोट- लाल किला...........फतेहपुर सीकरी का देव महल- बुलन्द दरवाजा........ एवं सुप्रसिद्घ गणितज्ञ वराह मिहिर की मिहिरावली (महरौली) स्थित वेधशाला- कुतुबमीनार.............. क्यों और कैसे हो गया....?????

7. यहाँ तक कि..... राष्ट्रीय गान भी..... संस्कृत के वन्दे मातरम

 की जगह................. गुलामी का प्रतीक ""जन-गण-मन हो 

गया""..... कैसे और क्यों हो गया....??????

8. और तो और.... हमारे अराध्य ... भगवान् राम.. कृष्ण........

...... तो इतिहास से कहाँ और कब गायब हो गये......... पता ही 

नहीं चला..........आखिर कैसे ????

9. यहाँ तक कि.... हमारे अराध्य भगवान राम की जन्मभूमि 

पावन अयोध्या .... भी कब और कैसे विवादित बना दी गयी... हमें 

पता तक नहीं चला....!

कहने का मतलब ये है कि..... हमारे दुश्मन सिर्फ.... बाबर

, गजनवी , लंगड़ा तैमूरलंग..... या आज के दढ़ियल मुल्ले ही नहीं 

हैं...... बल्कि आज के सफेदपोश सेक्यूलर भी हमारे उतने ही बड़े 

दुश्मन हैं.... जिन्होंने हम हिन्दुओं के अन्दर हीन भावना भर ..

... हिन्दुओं को सेक्यूलर नामक नपुंसक बनाने का बीड़ा उठा रखा है.....!


हमें पहचाना होगा ऐसे दुश्मनों को..... क्योंकि ये वही लोग हैं..

.... जो हर हिन्दू संस्कृति को भगवा आतंकवाद का नारा देते हैं...

. और, नरेन्द्र भाई मोदी जैसे हिंदूवादी और देशभक्त को..... आगे

 बढ़ने से रोकना चाहते हैं...... ताकि ... उनके नापाक मंसूबे हमेशा 

पूरे होते रहें...!

लेकिन... चाहे कुछ भी हो जाए..... हमलोग.... उनके ऐसे नापाक

 मंसूबों पर पानी फेरते हुए .......... हिन्दुस्थान को हिन्दुराष्ट्र बना 

कर ही रहेंगे....!

जय हिन्दू राष्ट्र ....!

जय महाकाल...!!!

साभार: फेसबुक डॉट कॉम

Friday, December 21, 2012

ईसाई मिशनरियो को बढ़ावा देने का काम कांग्रेस ने ही किया है ........




लॉर्ड मैकाले ने 1830 में अपनी शिक्षा प्रणाली को भारत में लागू करके अपनी मां के लिए एक पत्र में लिखा था कि अगले 30 वर्ष में भारत में कोई मूर्ति पूजक नहीं रहेगा। लार्ड मैकाले का आशय स्पष्ट था कि आने वाले तीस वर्षों में भारत को काले अंग्रेजों के माध्यम से ही परास्त कर दिया जाएगा। हम अपनी शिक्षा प्रणाली के माध्यम से भारत की प्राचीन संस्कृति को नष्ट करने में सफल होंगे और सारा भारत प्रभु यीशु की शरण में आ जाएगा। इसी उद्देश्य को रेवरैण्ड कैनेडी के ये शब्द और भी स्पष्ट कर देते हैं- जब तक हिंदुस्तान कन्याकुमारी से हिमालय तक ईसाई धर्म को अपना नहीं लेता और जब तक यह हिंदू और मुस्लिम धर्मों की भत्र्सना नहीं करता, हमारे प्रयास तब तक अबाध गति से जारी रहने चाहिए। लार्ड मैकाले की उपरोक्त भविष्यवाणी झूठ सिद्घ हुई। भारत का ईसाईकरण तो नहीं हुआ परंतु मैकाले की समयावधि (30 वर्ष) से पूर्व ही भारत में 1857 की क्रांति की ज्वाला फूट पड़ी। पूरे देश ने सामूहिक प्रयास के माध्यम से अंग्रेजों को पहली बार चुनौती दी। इसलिए स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने 1857 की क्रांति को भारत का पहला स्वाधीनता संग्राम कहकर महिमा मंडित किया। अंग्रेजों को और मैकाले के मानस से तैयार काले अंग्रेजों को भारी धक्का लगा। 1857 की क्रांति की सफलता का परिणाम हमारे सामने आया कि भारत के ईसाईकरण की प्रक्रिया खण्ड खण्ड हो गयी। मैकाले के उक्त पत्र के पश्चात जब 1881 में भारत में पहली जनगणना हुई तो ईसाईयों की जनसंख्या मात्र सवा सत्रह लाख थी। भारत की अंतश्चेतना में छिपे भारतीय धर्म और संस्कृति के प्रति असीम अनुराग ने लार्ड मैकाले और उसके प्रयासों को गहराई में दफन कर दिया। इतना ही नहीं 1857 की क्रांति ने भारतीय जनमानस को इस प्रकार ही भीतर मथ डाला था कि इसके पश्चात के 90 वर्षों में 1947 तक अंग्रेजों को भारत के लोगों ने और विशेषत: क्रांतिकारी स्वराज्यवादियों ने कभी चैन से नहीं बैठने दिया। इसलिए ईसाईकरण की प्रक्रिया पर गहरा आघात लग गया।


1857 की क्रांति की मसाल को अगले दस वर्षों में महर्षि दयानंद के सत्यार्थ प्रकाश ने स्वराज्य की घुट्टी पिला दी, जिससे वह और भी ऊर्जान्वित होकर भारतीय युवा शक्ति का मार्गदर्शन करने लगी। जस्टिस महादेव गोविंद रानाडे, श्याम जी कृष्ण वर्मा, बाल गंगाधर तिलक, देशबंधु चितरंजनदास, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल से लेकर सुभाष चंद्र बोस तक यह लंबी कड़ी बनती चली गयी। क्रांति की ज्वाला को बनाये रखने के लिए महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना 1875 में की। यदि महर्षि इस संगठन को देशभक्तों का संगठन न बनाना चाहते तो आने वाले समय में यह संगठन हजारों देशभक्तों का निर्माण कभी नही कर पाता। यह मात्र संयोग नहीं था कि 1875 में आर्यसमाज की स्थापना होती है तो उसका उद्देश्य क्रांति को सही दिशा देना था और भारतीयों को राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाना था और इसके सात वर्ष पश्चात ही देश की संस्कृति को बचाने के लिए हिंदूसभा का जन्म (1882) हो जाता है। यह संगठन प्रारंभ में यद्यपि एक सामाजिक और धार्मिक संगठन ही था लेकिन था मैकाले की योजना का विरोधी ही। लेकिन हमने इतिहास में पढ़ा है कि कांग्रेस जब 1885 में जन्मी तो उसके जनक एओ ह्यूम थे, जो कि सेवानिवृत्त एक अंग्रेज अधिकारी थे। उन्होंने कांग्रेस की स्थापना इसलिए की थी कि इसके माध्यम से भारतीयों में आक्रोश को हल्का किया जा सकता था। इसका उद्देश्य देश की आजादी प्राप्त करना नहीं था जबकि आर्यसमाज और बाद में हिंदू महासभा भी देश की आजादी के लिए मैदान में आयी थी। वे क्रांति लाना चाहते थे और अंग्रेज क्रांति की मसाल को बुझाना चाहते थे। इतना मौलिक अंतर था, आर्य समाज और कांग्रेस नाम के दोनों संगठनों में। इसलिए क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े सभी संगठन तथा नेता कांग्रेस के जातीय शत्रु थे। उसका संस्कार था अपने क्रांतिकारी विरोधियों का तीव्र विरोध करना, इसलिए 1885 के पश्चात कांग्रेस ने ईसा प्रेम के कारण देश के विभाजन तक ईसाईयों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्घि हुई। 1881 के सवा सत्रह लाख ईसाई 1942 में बढ़कर 83 लाख हो गये। पहले पचास साल में सवा सत्रह लाख थे अगले साठ वर्ष में साढे चार गुणा बढ़ गये। 1971 तक आते आते इनकी संख्या एक करोड़ 42 लाख को पार कर गयी। आज ये लगभग सवा दो करोड़ हैं। ऐसा क्यों हुआ? पहले पचास वर्ष भारत में कांग्रेस नही थी तो परिणाम दूसरे थे और जब कांग्रेस आयी तो परिणाम पलट गये। कांग्रेस ने सत्ता संभाली तो परिणाम तेजी से दौडऩे लगे। क्या समझे? बात साफ हो गयी ना मैकाले के काम को ह्यूम ने कांग्रेस के माध्यम से कराना आरंभ किया और कांग्रेस ने कहा कि आप निश्चिंत रहें मेरे आका! आप जो चाहेंगे हम उससे भी आगे बढ़कर करने को तैयार हैं। परिणाम स्वरूप 1949 में देश में ईसाई मिशनरियों को अपना काम करने का खुला न्यौता दिया गया।

देश को समझाने के लिए मिशनरियों को एक प्रतिज्ञा पत्र भरने के लिए दिया जाने लगा जिसकी भाषा इस प्रकार थी-मैं कानूनी रूप से गठित भारत सरकार का सम्मान करने तथा उसकी आज्ञा का पालन करने का विश्वास दिलाता हूं और यह भी कि मैं राजनीतिक मामलों में योगदान से सतर्कता पूर्वक अलग रहूंगा। मेरी इच्छा है और यह उद्देश्य है कि ऐसे मामलों में मेरा प्रयास शांति पूर्ण ढंग से सरकार के साथ निष्ठापूर्ण सहयोग करना होगा। यह प्रतिज्ञा देश की आंखों में धूल झोंकने का छदम प्रयास ही था। क्योंकि इस न्यौते की आड़ में विश्वगुरू भारत को करूणा मैत्री और प्रेम का पाठ पढ़ाने के लिए ईसाई मिशनरीज की संख्या में अप्रत्याशित वृद्घि हुई। भारत कभी अपने मानवतावादी धर्म के लिए विख्यात था और इसके उपनिषदों के गूढ़ ज्ञान को देखकर शॉपन हॉवर जैसा दार्शनिक इतना भाव विभोर हो गया था कि उन्हें सिर पर रखकर नाचने लगा था। लेकिन 1977 के आते आते यहां अमेरिका की 632 ब्रिटेन की 675, इटली की 391 आयरिश 269 स्पेनिश 253, फ्रांसीसी 233 बेल्जियम 213 कनेडियन 207 ऑस्टे्रलियन 135 अन्य 834 कुल 3732 मिशनरीज कार्य कर रही हैं। भारत को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाने वाला पश्चिमी जगत भारत में ईसाई मिशनरीज के माध्यम से सीधे सीधे सांप्रदायिकता का खेल खेल रहा है। एक अनुमान के अनुसार अब ईसाई मिशनरीज की संख्या 1977 की अपेक्षा दुगुनी हो गयी है। कांग्रेस को उसका आका मैकाले कब्र से संकेत कर रहा है कि जो कुछ हो रहा है उसे होने देना चुप रहना बोलना नही।

 कांग्रेस कह रही है जो हुकुम दिया जाएगा-मेरे आका वही बजाया जाएगा। इसलिए न्यू इंग्लैंड के रूप में नागालैंड बसाया गया तो आज पूरा नागालैंड ईसाईयों का हो गया है। अब वहां नारे लगते हैं-नागालैंड ईसा के लिए। राम से श्रद्घा हटकर रोम के प्रति जुड़ गयी। इसलिए नया देश बनाने की धमकी पूरे पूर्वोत्तर की दी जा रही है। इसी को सावरकर ने धर्मान्तरण से मर्मान्तरण और मर्मान्तरण से राष्ट्रान्तरण की संज्ञा दी थी। इस सच को कांग्रेस आज तक भी नही समझ सकी है। पूर्वाेत्तर के प्रांतों को ईसाई बहुल बनाकर अब बिहार और बंगाल सहित छत्तीसगढ़ व झारखंड में भी ईसाई मिशनरीज सक्रिय हो रही हैं। वह निरंतर सफलता की ओर बढ़ती जा रही हैं और हम सो रहे हैं क्योंकि भारत की सुपर पीएम इस समय एक इटली की बेटी है। देशी घोड़े पर विदेशी लगाम पड़ी है और सारा देश देख रहा है कि देश में सरेआम चोरी हो रही है पर सब चुप हैं। इसी चुप्पी के कारण सोनिया की कृपा से मदर टेरेसा जैसी महिला को भारत रत्न दे दिया गया, जिसके कारण देश ईसाईकरण की प्रक्रिया बलवती हुई थी और पूर्वोत्तर भारत ईसा की शरण में बैठा दिया गया। मानो देश के बिखंडन की नींव रखने के लिए मदर टेरेसा को भारत रत्न दिया गया। इससे बड़ा देश का दुर्भाग्य और क्या होगा? इस दुर्भाग्य के परिपे्रक्ष्य में देशवासी तनिक विचारें कि कांग्रेस देश के अभिशाप रही है या वरदान……………….?

साभार -राकेश कुमार आर्य.

Wednesday, December 19, 2012

अमीर खुसरो की असलियत




सुरेश चिपलुनकर


जलालुद्दीन खिलजी के शासनकाल में अमीर खुसरो लिखते हैं, "...जब भी कोई जीवित विद्रोही हिन्दू किसी विजेता इस्लामी बादशाह के हाथ लगता था, तब उसे हाथी के पैरों तले कुचल दिया जाता था, यह एक आनंददायी क्षण होता था..." (सन्दर्भ - KS Lal; Legacy of Muslim Rule in India, p-120]

"...हमारे पाक लड़ाकों ने समूचे देश को तलवारों के बल पर वैसे ही साफ़ कर दिया था, जैसे जंगल से काँटों को साफ़ कर दिया जाता है. हमारी तलवारों की गर्मी से हिन्दू भाप बन कर उड़ गए. हिंदुओं के मजबूत मर्दों को घुटनों के नीचे से काट दिया गया, इस्लाम विजयी हुआ... बुतपरस्त गायब हो गए..." (संदर्भ - Tarikh-i-Alai: (Eliot & Dowson. Vol. III)

अमीर खुसरो को सूफी संत(?) माना जाता है, परन्तु वास्तव में ये तथाकथित संत इस्लामी शासकों के साथ-साथ ही भारत आए थे. सूफी परम्परा कुछ और नहीं, बल्कि एक तरह की "इस्लामी मिशनरी" है, अर्थात "ट्रोजन-हार्स वायरस". हिंदुओं को जितना नुक्सान कट्टर और धर्मान्ध मुल्लों ने नहीं पहुंचाया, उससे कहीं अधिक अपने बादशाहों और आकाओं के इशारे पर काम करने वाले "सूफी-संतों"(??) ने पहुँचाया है...

उदाहरण के लिए - "अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है. मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था... (सन्दर्भ - उर्दू अखबार "पाक एक्सप्रेस, न्यूयार्क १४ मई २०१२).


इसे कहते हैं, "इमेज बिल्डिंग"... यदि कोई लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहे, तो शिक्षा पद्धति और पाठ्यपुस्तकों पर उसका स्वाभाविक कब्ज़ा हो जाता है, और इसी के जरिये "ब्रेन-वाश" करके एक तरफ सत्य छिपाया जाता है, और दूसरी तरफ "इमेज पालिशिंग" भी की जाती है...

Friday, December 14, 2012

भारत को मुगलिस्‍तान बनाने की साजिश-भाग:2



क्‍या भारत सही मायने में धर्म-निरपेक्ष हैं




डॉ0 संतोष राय की कलम से


क्या भारत सही मायने में धर्मनिरपेक्ष है? क्या भारत संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों  को मानता है? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगों  और उनके नेताओं  के बीच भेद-भाव नही किया जाता? यदि हाँ, तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूंखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है?



इजरायल के चेतावनी की अनदेखी



                        ओवैसी हिजबुल्‍ला आतंकवादी के साथ

सूत्रों से ज्ञात हुआ की इजराइली ख़ुफ़िया एजेन्सी मोसाद ने भारत सरकार को कई बार पत्र लिखकर कहा है कि आपका सांसद जो आपकी यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है वो इजरायल में  आतंकवाद फैला रहा है और साथ ही भारत के गरीब मुस्लिम युवकों  का ब्रेनवाश करके उन्हें हमास और हिजबुल्लाह के लिए भर्ती करता है, लेकिन चूँकि भारत की यूपीए सरकार को सिर्फ हिंदू ही आतंकवादी नजर आते है इसलिए भारत सरकार ओबैसी को खुलेआम छुट दे दिया है। ज्ञात रहे कि हिजबुल्लाह आज विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ते वाला आतंकवादी संगठन है जो छोटे-छोटे बच्चों  को अपने आत्मघाती दस्ते मे भर्ती करता है।




                        ओवैसी हिजबुल्‍ला आतंकवादी के साथ


मुस्लिमों ने कैसे धर्म निरपेक्ष देशों को मुस्लिम राष्‍ट्र बनाया



                 ओवैसी लेबनान में


पूर्व में लेबनान पहले धर्मनिरपेक्ष देश था और वहाँ ४% हिंदू और १०% यहूदी भी रहते थे। लेबनान जहां पहले ८०% ईसाई तथा अन्य धर्म और २०% मुस्लिम रहते थे और लेबनान विश्व का बहुत तेजी से तरक्की करता हुआ मुल्क था, इसकी राजधानी बेरुत को विश्व का गोल्ड केपिटल कहा जाता था क्योकि बेरुत विश्व की सबसे बड़ी सोने की मण्डी थी। इतना ही नहीं  खूबसूरत लेबनान में  कई हॉलीवुड और बॉलीवुड  के फिल्मों  की शूटिंग होती थी।



                 ओवैसी लेबनान में 

लेकिन लेबनान की तरक्की और खुशहाली पर लेबनान के मुस्लिम नेताओं ने ग्रहण लगा दिया, मस्जिदों में और अपने सम्मेलनों के मुसलमानों को खूब बच्चे पैदा करके लेबनान पर कब्‍जा  करने की बाते करते थे| फिर धीरे-धीरे लेबनान का जनसंख्या का संतुलन बिगड़ गया और फिर लेबनान 25 सालों से गृहयुद्ध की चपेट मे आ गया | आज लेबनान के दो हिस्से है उत्तरी लेबनान जिसमें  ईसाई और अन्य धर्मों  के लोग रहते है और दक्षिण लेबनान जहां मुस्लिम रहते है उसी तरह राजधानी बेरुत का भी दो अघोषित हिस्सा है जहां एक तरह ईसाई और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते हैं|


सांसदों को विदेश यात्रा से पूर्व अनुमति का नियम



जब भी कोई सांसद विदेश यात्रा करता है तो उसे लोकसभा सचिव को लिखित सूचना देकर अनुमति लेनी पड़ती है भले ही वो उसकी निजी यात्रा ही क्यों न हो| एक आरटीआई के जबाब मे मीरा कुमार ने पहले बताया कि उनके पास ऐसी कोई फ़ाइल नही आई जिसमे ओबैसी ने लेबनान और सीरिया के यात्रा की अनुमति मांगी हो | इसका मतलब यही है कि ओवैसी ने बिना अनुमति के विदेश यात्रा की। सवाल ये उठता है कि आखिर इतना घोर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाला ओबैसी को यूपीए साम्प्रदायिक क्यों नही मानती है ?


ओबैसी के डिप्‍लोमेटिक पासपोर्ट में गांधी परिवार की भूमिका




ओवैसी राहुल गांधी के साथ 

सबसे बड़ा चौकने वाला खुलासा ये है कि ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट राहुल गाँधी की सिफारिश पर मिला था जबकि खुद आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही ख़ुफ़िया पुलिस ने ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट न देने की रिपोर्ट भेजी थी लेकिन जब राहुल गाँधी ने इस मामले मे हस्तक्षेप किया जब जाकर विदेश मंत्रालय ने ओबैसी को बिना किसी योग्यता-अर्हता के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट जारी कर दिया |

                                                          ओवैसी सोनिया गांधी के साथ

 ध्‍यान रहे कि साधारण पासपोर्ट का कलर नीला होता है जबकि डिप्लोमेटिक पासपोर्ट का कलर मैरून होता है। और तो और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रखने वाले व्यक्ति की किसी भी हवाई अड्डे पर तलाशी नही होती और इन्हें "वीजा आन अराइवल" की भी सुविधा होती है और ये पासपोर्ट केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केबिनेट स्तर के मंत्री और राज्यों में  मुख्यमन्त्रियों  और राजदूत तथा दूतावास में सचिव स्तर के अधिकारियों को ही जारी हो सकता है |
बांग्‍लादेशी  मुसलमानों का पुर्नवास क्‍यों



ओवैसी राहुल गांधी के साथ 

अभी कुछ दिन पहले संसद में  आसाम पर चर्चा के दौरान ओबैसी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति मे कहा कि "यदि भारत सरकार आसाम मे मुसलमानों का चाहे वो प्रवासी क्यों न हो ठीक ढंग से पुनर्वास नही करती और उन्हें उचित मुवावजा नही देती तो फिर भारत का मुसलमान इस देश की ईंट से ईंट बजा देंगे" लेकिन किसी भी सांसद ने ओबैसी के इस बयान की निंदा नही की | इससे बड़ा राष्ट्र का अपमान और क्या हो सकता है की पक्ष व विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर चुप रहे और तो और मीडिया ने भी इसको ब्रेकिंग न्यूज़ नही बताया सिर्फ टाइम्स नाउ ने ही इस खबर पर चर्चा की |


यूपीए की नजर में हिन्‍दू


यूपीए  की नजर मे सिर्फ भारत के हिंदू ही साम्प्रदायिक है | अगर कोई भारत मे हिंदू हित की बात करेगा तो वो घोर साम्प्रदायिक और राजनितिक रूप से अछूत बन जायेगा | पूरी मीडिया और कई राजनितिक दल सहित कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी दूकान चलाने वाली छोटी पार्टियां सब उसको साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे | लेकिन यदि कोई सिर्फ मुस्लिम हित की ही बात करेगा तो वो धर्मनिरपेक्ष माना जायेगा |



ओवैसी की नजर में मुस्लिम ही नागरिक


ओवैसी ने आज तक संसद में सिर्फ मुस्लिम हित और मुस्लिमों  के बारे मे ही मुद्दे उठाये हैं  और वे सिर्फ मुस्लिम लोगों  की ही मदद करते है यहाँ तक कि आसाम में  भी उन्होंने जब राहत शिविर लगाया तो उसके उपर लिख दिया "Only for Muslims"
इन्होंने सानिया मिर्जा को कई बार सम्मानित किया लेकिन जब एक पत्रकार ने इनसे पूछा कि आप सानिया नेहवाल को कब सम्मानित करेंगे तो ये महाशय माइक फेंक दिये |
आईबी ने दंगों के लिये ओबैसी बंधुओं को जिम्‍मेदार माना
आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही आईबी हैदराबाद में  भड़के कई दंगों के लिए ओबैसी बंधुओ को जिम्मेदार बताती है यहाँ तक की केन्द्र की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी कई बार गृहमंत्रालय को ओबैसी के संदिग्ध गतिबिधियों के बारे मे चेतावनी दी है | लेकिन सब बेकार |

 क्रमश: