Monday, May 7, 2012

किसी भी देश का इस्लामीकरण कैसे होता हैं ?




१. मुस्लिम आबादी दर हर गैर इस्लामिक देश में गैर मुसलमानों की तुलना में दुगनी रफ़्तार से बच्चे पैदा करते हैं | जिससे अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती हैं |

२. मुस्लिम आबादी पढाई लिखाई में कोई रूचि नहीं रखती | अंग्रेजी, गणित, विज्ञानं आये ना आये कुरान जरुर बच्चों को पढाई जाती है |

३. मुस्लिम जो व्यवसाय करते हैं वो भी समाज हित के नहीं होते |
 जैसे बड़े व्यवसायी जो टेनरी चलाते हैं उसकी गंदगी नदियों में बहाते हैं जिस से पानी में आर्सेनिक जैसे जहर की मात्रा बढती जाती हैं |

४. मुस्लिमो की गोस्त की दुकाने आसपास बिमारियां लाती हैं | जानवरों की हत्या अन्न-जल संकट का प्रमुख कारण हैं |

५. जहा मुस्लिम अधिक होते हैं वह संगठित तरीके से रहते हैं और आसपास किसी गैर मुस्लिम को बसने नहीं देते | १०० हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम रह सकता हैं पर १०० मुसलमानों के बीच हिंदू नहीं रह सकता |

६. मुस्लिम संगठित होने की वजह से गैर मुसलमानों से बेवजह झगडा करते हैं, अगर आस पास उनकी संपत्ति होती हैं तो उस पर कब्ज़ा कर लेते हैं जैसा की कश्मीर में हुआ |

७. परिवार में अधिक सदस्य होने से और अशिक्षित होने से छोटे संगठित अपराध करते हैं | जैसे की अनाधिकृत कब्जे, बिजली चोरी, नशीले पदार्थो का धंधा करते हैं |
८. ये छोटे अपराधी जल्द ही बड़े अपराधियों से जा मिलते हैं और ये बड़े अपराधी भी कभी ना कभी उन्ही मुस्लिम बस्तियों से निकल कर आये होते हैं | टाइगर मेनन और दाउद इब्राहीम कासकर और ना जाने कितने अपराधी ऊपर उठे |

९. बड़े अपराधी देश की अर्थ व्यवस्था को बिजली चोरी या अतिक्रमण की तरह छोटा मोटा नुक्सान नहीं पहुचाते बल्कि हजारो करोडो का नुक्सान पहुचाते हैं | जैसे स्टाम्प घोटाले व हवाला कांड का प्रमुख अब्दुल करीम तेलगी १०,००० करोड़ व हसन अली ३६,००० करोड़ इत्यादि रकम कमाते हैं और इसे इस्लामिक मुल्को से गैर इस्लामिक देशो में आतंक हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण पर प्रयोग किया जाता हैं |

१०. वे मुस्लिम जो काफ़िर देश में किये गए अपराध लूट पाट को धार्मिक कृत्य मानते हैं वे और भी तरीको से मुस्लिम लड़के गैर-इस्लामिक देश में जंग के लिए तैयार करते हैं | उनमे से एक सरलतम रास्ता जेहाद का हैं काफ़िर का क़त्ल हर मुस्लिम पर अनिवार्य हैं |

११. कुरान पढ़े बेरोजगार लड़के जेहाद के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं बल्कि अपना सौभाग्य समझते हैं और इस्लामिक देशो में मौजूद अपने रहनुमाओ की मदद से जेहादी बनते हैं |

१२. ये जेहादी देश में समय समय पर बम विस्फोट सामूहिक हत्याए वा दंगे करते हैं | दंगो को कुछ लोगो की शरारत कहा जाता हैं जबकि बम विस्फोट पर कहा जाता हैं की इसका इस्लाम और मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं जबकि दोनों ही जेहाद अर्थात धर्मं युद्ध का हिस्सा हैं |

१३. यदि गैर इस्लामी कौमे संगठित होकर धर्मं युद्ध का जवाब देती हैं तो मुस्लिम जोर जोर से हल्ला करना चालु करते हैं के हम पर जुल्म और अत्याचार हो रहा हैं, हम सुरक्षित नहीं इस मुल्क में |

१४. मुसलमानों के संगठित होने की वजह से और हमलावर होने की वजह से नास्तिक राजनैतिक दल मुसलमानों का पक्ष लेने में ही अपनी भलाई समझते हैं जैसे की भारत में कांग्रेस, समाजवादी, कमुनिस्ट दल इत्यादि |

१५. क्योंकि इन दलों का धर्म से, संस्कृति से कोई लेना देना नहीं होता और मुस्लिम समर्थन मिलने पर इन्हें सत्ता का और लालच आ जाता हैं ये मुस्लिम आबादी के बढने में और सहायता करते हैं उनके हर काम में चाहे वो गलत हो या सही, साथ देते हैं |

१६. बंगलादेश से आये ४ करोड़ मुस्लिमो को कांग्रेस ने ना केवल बसाया अपितु उनको जिस कानून (आई. ऍम. टी. डी. एक्ट) की सहायता से निकाला जा सकता था उसे भी खत्म कर दिया |

१७. आतंकवाद के खिलाफ कानून (पोटा एक्ट) बनाना तो दूर रहा, जो कानून था उसको भी खत्म कर दिया |

१८. मुस्लिम नाराज ना हो इस लिए जेहादियों को उच्चतम न्यायालय से दी हुयी को सजा को भी रोके रखते हैं | जैसा की कांग्रेस ने अफजल गुरु की फ़ासी रोक रखी हैं |

१९. गैर मुस्लिमो के इस कथित सेकुलर वर्ग की इस मूर्खता से मुस्लिम खुश होते हैं और और तेजी से आबादी बढ़ाने का उपाए सोचते हैं

२०. इन उपायों में गैर मुस्लिम सम्प्रदाये की लड़कियों को प्यार के झूठे जाल में फसाना होता हैं और उनसे बच्चे पैदा करने होते हैं इन्हें लव जेहादी कहते हैं |

२१. अगर ये लव जेहादी ३-४ हिंदू या ईसाई लडकियो को जिन्हें ये वर्गला-फुसला के भगा लाए थे, खिला (वहन) नहीं कर पाते हैं, तो भोग करने के बाद किसी अधेड उम्र के मुस्लिम को बेच देते हैं अधिकतर वह मुस्लिम बदसूरत ही होते हैं इसीलिए उन्हें इस उम्र तक औरते नहीं मिल पाती |
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२२. मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ-साथ छोटे-छोटे इस्लामिक क्षेत्रो का भी निर्माण करते हैं | जैसे हिंदू इलाके में अधिक दामों पर कोई एक इमारत खरीद कर लेते हैं और फिर वहा बड़े मुस्लिम परिवार बसा दिए जाते हैं |

२३. ये मुस्लिम लोग आसपास लोगो से आये दिन झगडा करते हैं और धीरे धीरे पडोसियो को अपने घर सस्ते दामों पर किसी मुस्लिम को ही बेचने को मजबूर कर देते हैं इस प्रकार इनकी एक मकान पर खर्च की गयी अतिरिक्त रकम से कही अधिक मुनाफा निकल आता हैं |

२४. मुसलमानों की मस्जिद अक्सर शहर के बीचों-बीच होती हैं ताकि किसी तरह की व्यवस्था बिगडने पर मीनारो की आड़ से पुलिस को देख सके | और जरुरत पड़ने पर खुद पुलिस व्यवस्था पर हमला कर सके |
२५. छोटी मुस्लिम बस्तियाँ ना केवल संगठित होती हैं अपितु हमलावर लोगो से भरी होती हैं | हर घर में देसी तमंचे मिलना सामान्य बात होती हैं |

२६. भारत में नव-निर्मित मुस्लिम बस्तियाँ अक्सर या तो राजमार्गो के किनारे होती हैं या ट्रेन लाइनों के किनारे | राजमार्गो के किनारे बनी मजारो में जिनमे से अधिकतार कुत्ते बिल्लियो की या खाली ही होती हैं हथियार छुपाये रहने की संभावनाओ से इंकार नहीं किया जाता |

२७. यदि गैर-इस्लामिक देश के अगल-बगल में इस्लामिक देश हैं तो समय-समय पर इस्लामिक देश हमला करते रहेंगे जैसा की भारत का पडोसी पाकिस्तान करता रहता है |

२८. ऐसे पडोसी इस्लामिक मुल्क प्रत्यक्ष जीत ना पाने की स्थिति में छदम युद्ध प्रारंभ करते हैं | गैर इस्लामिक मुल्क में मौजूद मुस्लिमो की मदद लेते हैं इस्लामिक एकता के नाम पर |

२९. आबादी में ३० प्रतिशत तक पहुचने पर समय आ जाता मुस्लिमो के लिए के वो काफ़िर देश पर कब्ज़ा कर ले क्यों की संगठित ३०% मत किसी भी लोकतान्त्रिक देश में काफी है सरकार बनाने के लिए या ग्रह युद्ध के माध्यम से कब्ज़ा करने के लिए |
३०. इस सम्भावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता के 
मुस्लिम पडोसी देश के साथ मिल जाये और बाहर से हमले के समय अंदर से भी हमला कर दे | युद्ध के समय रेल लाइन उखाड दे, तेल पाइपलाइन तोड़ दे राज मार्ग जाम कर दें इत्यादि ताकि सेना को समय पर रसद ना मिले और वो हार जाये |

३१. सेना के हारते ही विदेशी मुस्लिम गैर-इस्लामिक देश में आ जायेंगे और योगदान के अनुसार देसी मुस्लिमो को सत्ता में हिस्सेदारी दे देंगे क्यों की उनकी जीत में उनका भी बड़ा योगदान होगा |
३२. देश को दारुल हरब से दारुल इस्लाम घोषित कर दिया जायेगा | यानि गैर इस्लामिक देश इस्लामिक देशो में से एक हो जायेगा | गैर इस्लामिक देश में क्या क्या होता हैं ये हमें लिखने की जरुरत नहीं फिर भी हम आगे के लेख में बताएँगे |

लेख समीक्षा : आप उपरोक्त लेख पढ़ कर समझ ही चुके होंगे की भारत इस्लामिक देश बनने की कगार पर हैं | सबसे मूल करण मुस्लिम आबादी का हिन्दुओ ईसाइयों और अन्य सभी से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ना हैं | इसका दूसरा प्रमुख कारण है भारत का फर्जी सेकुलरवाद जो भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं |
आप ये कहे सकते हैं के घोटाले अपराध भ्रष्टाचार में तो हिंदू भी आंगे हैं तो मुस्लिमो को दोष क्यों देना | हमारा उत्तर हैं के हिंदू भ्रष्टाचार कर के हथियार नहीं खरीदते, ना ही उन हथियारों से वो पाकिस्तान में बम विस्फोट करते हैं ना ही राष्ट्र का ख्याल ना कर के आबादी बढ़ाते हैं | मुस्लिम हर कदम अपनी कौम को ध्यान में रख के उठाते हैं और उनका अंतिम लक्ष्य होता हैं देश का इस्लामीकरण जबकि भ्रष्ट हिंदू को हिंदू राष्ट्र से कोई लेना देना नहीं होता |

आप ये भी सोच रहे होंगे के मुस्लिमो ने देश में बड़ा योगदान किया हैं | जब हम उन गिने चुने लोगो को जानते हैं तो पता चलता हैं वो मुस्लिम हैं ही नहीं | जैसे की अब्दुल कलाम अग्नोस्टिक हैं, अज़ीम प्रेमजी का भी यही हाल हैं, अशफाक उल्ला खान आर्य समाजी थे व हिंदू राष्ट्र का समर्थन करते थे |
मुस्लिमो ने जितना योगदान नहीं किया था, उस से ज्यादा बटवारे के तौर पर ले लिया |

बांकी आप अपने आस-पास मुस्लिम गतिविधियाँ देख कर लेख की सत्यता परख सकते हैं |
source-सनातन सिंहनाद : via Facebook

Saturday, May 5, 2012

हिन्‍दू महासभा पाकिस्‍तानी हिंदुओं को भारत की नागरिकता दिलायेगी

हिन्‍दू महासभा ने जीती बड़ी लड़ाई

हिन्दू महासभा की याचिका पर पाकिस्तान से आये हुए हिन्दुओं को भारी राहत मिली है। अब उन्हें भारत की नागरिकता मिलने की पूर्ण संभावना है। यह समाचार पाकिस्तान से आये हिंदुओं के लिये बहुत ही सुखद है व उनके लिये बहुत दिनों से संघर्ष करने वाले हिंदू महासभा के संविधान की ऐतिहासिक जीत है, राष्ट्र विभाजन के समय कांग्रेस नें पाकिस्तानी हिंदुओं के संदर्भ में जो आश्वाशन दिया था उसे अंगीकृत किया। 
अखिल भारत हिन्दू महासभा के केन्द्रीय उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ0 संतोष राय ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायमूर्ति श्री ऐ.के. सिकरी एवं न्यायमूर्ति श्री राजीव सहाय एंडला की खंडपीठ ने अखिल भारत हिन्दू महासभा की याचिका पर दिनांक 25 -04-2012 को पाकिस्तानी हिन्दुओं को भारत सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री ऐ. एस. चंडोक के जबाब देने के पश्चात इस याचिका का निपटारा कर दिया।
डॉ0 राय ने कहा कि दिनांक 29-02-2012 को भारत... सरकार ने कुछ समय पूर्व जबाब नही दिया था। पूर्व में गृह मंत्रालय इन्हें हर हाल में पाकिस्तान भेजना चाहती थी, परंतु हिन्दू महासभा के विषयवस्तु व इस मुद्दे मानवीय संवेदनशीलता को देखते हुये भारत सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने माननीय खंडपीठ को बताया की पकिस्तान से आये हुए 156  हिन्दुओं को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी व यदि ये लोग अपनी नागरिकता का आवेदन उचित संस्थान में करते हैं तो उस पर गंभीरता से वह विभाग विचार करे।
 भारत सरकार से ऐसे सुखद आश्वासन मिलने के बाद माननीय खंडपीठ के न्यायमूर्तियों  ने कहा की अब आगे किसी भी आदेश की आवश्यकता नहीं रह जाती व इस याचिका को यहीं पर विराम लगाया जाता है।
यह भी तथ्य है कि पाकिस्तानी नागरिकों व भारतवंशियों  के सम्बन्ध में भारत की पहली याचिका है। अब हिन्दू महासभा पाकिस्तान से आये हुए 156 हिन्दुओं की नागरिकता के लिए आवेदन करेगी व इनके रोजगार का भी प्रबंध करवायेगी। अखिल भारत हिन्दू महासभा के नेता डॉ0 संतोष राय, अंर्तराष्ट्रीय संयोजक व याचिकाकर्ता डॉ0 राकेश रंजन, वरिष्ठ नेता सरदार रवि रंजन सिंह, पं0 बाबा नंद किशोर मिश्रा ने माननीय न्यायपालिका के इस निर्णय के लिये ढेर सारी बधाईयां दी।
अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ नेता बाबा पं0 नंद किशोर मिश्र महामहिम प्रतिभा सिंह देवी पाटिल और भारत सरकार के गृहमंत्रालय एवं कानून मंत्रालय को अति संवेदनशील मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिये कोटि-कोटि धन्यवाद दिया। बाबा नंद किशोर जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिन्दू महासभा ने अन्य हिन्दू संगठनों से एकता व सहयोग की अपेक्षा रखती है। न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय से विश्व भर के हिन्दू समुदाय में हर्ष और आशा की लहर फैल गयी है। बाबा जी ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो0 भीम सिंह, वलवंत सिंह बिलोरिया, विजय प्रताप एवं गौरव बंसल व पूरी अधिवक्ता मंडल को नम्न आंखों से निष्काम सेवा के लिये कोटि-कोटि धन्यवाद दिया, कहा कि इस सुकृत्य के लिये अखिल भारत हिन्दू महासभा सदैव आप सबकी आभारी रहेगी।
विश्व भर से हिन्दू महासभा को बधाई संदेशों का तांता लगा हुआ है।

 

Friday, May 4, 2012

इस्लाम व कुरान पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिए गए क्रांतिकारी विचार


सरदार वल्लभ भाई पटेल (संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार). "ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।

" स्वामी विवेकानन्द (कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३). "मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था ।

" गुरु नानक देव जी (नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८०). "इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं ।

इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

" महर्षि दयानन्द सरस्वती (सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१). "हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है

" महर्षि अरविन्द (ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६). "मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं ।

हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो" सरदार वल्लभ भाई पटेल (संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार). हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया ।

कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ( प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१). पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता, उनकी हत्या लूट दंगे, आगजनी, बलात्कार, आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें ।

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी (बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७). ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं ।

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ( रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७) मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है ।

मोहनदास करम चन्द्र गांधी (गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग). मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान, मध्य एशिया अरब, मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें ।

लाला लाजपत राय (पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५) छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया.

समर्थ गुरू राम दास जी (डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८ ) मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए उनका वध किया लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।

राजा राममोहन राय (वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७). मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा ।

श्रीमति ऐनी बेसेन्ट (कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५). अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है ।

Tuesday, May 1, 2012

सिंघवी के सेक्‍स सीडी का सच


डॉ0 संतोष राय की कलम से



श्रीमती अनुसूया सलवान दिल्‍ली हाईकोर्ट की वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता थी,  जिसकी तीन बेटियां थी, बड़ी बेटी की शादी  हो गयी है बाकि दो बेटियां शादी के लायक हो गयी हैं, इनके कई ट्रस्‍ट भी चलते हैं।  अनुसूया कितने सालों से जज बनने की चाह रख रही थी, यहां तक कि लॉ मीनिस्‍ट्री की ओर से हाईकोर्ट में न्‍यायमूर्ति बनने के लिये इनका नाम भी जा चुका था। लेकिन अब उनके सेक्‍स सीडी के विवाद के चल्‍ते सलवान का न्‍यायधीश बनना उच्‍चतम न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायधीश पर निर्भर है कि वे उन्‍हें उस पद पर विराजित करते हैं या नहीं।


वहीं दूसरी ओर यह बात उठती है कि आखिर क्‍यों अभिषेक मनु सिंघवी का ड्राइवर उनकी सेक्‍स सीडी बनाया, उसने अपने ही मालिक को दुनिया के सामने क्‍यों  बेपर्दा  कर दिया। विश्‍वस्‍त्र सूत्रों के द्वारा यह ज्ञात हुआ है कि कांग्रेस के पूर्व प्रवक्‍ता  व हाईकोर्ट के वरिष्‍ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी अपने ड्राइवर को सारे मानवता को ताक पर रखकर उससे जबरजस्‍त काम लेते थे। रात के 12,1, 2 बजे तक वो कहीं किसी होटल में किसी महिला के साथ घुसकर अपने सारे कपड़े उतारकर सेक्‍स करते थे। 


कांग्रेसी नेता की इस घिनौनी हरकत से ड्राइवर के साथ-साथ उनकी पत्‍नी काफी परेशान हो गयी थीं, क्‍योंकि अभिषेक द्वारा रात के अंधेरे में किये जाने वाले कुकर्मों को ड्राइवर बहुत पहले ही उनकी पत्‍नी को बता चुका था, जिसके चल्‍ते भूतपूर्व कांग्रेसी प्रवक्‍ता के घर में भारी कलह-कोहराम मचा हुआ था। सिंघवी साहब कई बार इस सेक्‍स मामले पर हंगामें को लेकर अपनी पत्‍नी को काफी प्रताडि़त भी किया। अंत में उनकी पत्‍नी ने अभिषेक से बदला लेने को ठानी और कहा कि मैं क्‍या हूं यह तुम्‍हें बताउंगी। 

अभिषेक मनु सिंघवी की पत्‍नी ने ड्राइवर को भरोसे में लेकर उनके चैंबर में एक खुफिया कैमरा लगवा दिया। अंत में सिंघवी साहब और उनकी तथाकथिति न्‍यायमूर्ति बनने की आस करने वाली अनुसूया के साथ किया गया  सेक्‍स उस सीडी में कैद हो गया।

अभिषेक का ड्राइवर उन दोनों की सेक्‍स सीडी बनाकर उनकी पत्‍नी को दे दिया और उनकी पत्‍नी ने इसे पूरी तरह संशोधित करवाया क्‍योंकि इस सीडी में न्‍यायमूर्ति बनने की आस रखने वाली अनुसूया पूरी तरह नंगी हो गयी थी, जिसे अभिषेक की पत्‍नी ने हटवा दिया, फिर उस सेक्‍स सीडी को उनकी पत्‍नी ने ड्राइवर को दे दिया। 


ध्‍यान रहे कि जब यह विवादित सीडी मीडिया तक पहुंची तो कांग्रेस के तत्‍कालीन प्रवक्‍ता व कद्दावर नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्‍ली हाई कोर्ट की माननीय न्‍यायधीश श्रीमती रेवा खेत्रपाल के आदेश द्वारा इसे मीडिया में दिखाने पर रोक लगवाई, यही माननीय न्‍यायमूर्ति भी कभी दिल्‍ली की सम्‍मानित वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता थीं। 



दिल्‍ली के न्‍यायालयों में इस बात की खूब चर्चा है कि आज-कल के समय में  जज बनना कितना मुश्किल और कितना आसान है। अब तो यह भविष्‍य ही बतायेगा कि श्रीमती अनुसूया सलवान भविष्‍य में न्‍यायमूर्ति बनती हैं कि नही।

Monday, April 30, 2012

राजनीतिक चेतना के लिये भी आ‍ध्‍यात्मिक उद्भव आवश्‍यक है


अखिल भारत  हिन्‍दू महासभा

49वां अधिवेशन पा‍टलिपुत्र-भाग:20

 
(दिनांक 24 अप्रैल,1965)


अध्‍यक्ष बैरिस्‍टर श्री नित्‍यनारायण बनर्जी का अध्‍यक्षीय भाषण 

प्रस्‍तुति: बाबा पं0 नंद किशोर मिश्र


अतीत का इतिहास इस तथ्‍य  की साक्षी प्रस्‍तुत करता  है कि भारत की राजनीतिक समृद्धि की उप‍लब्धि, आध्‍यात्मिक नेताओं के आर्विभाव के साथ ही साथ होती आई है। श्री शंकराचार्य के अद्वैतवाद की पृष्‍ठभूमि पर ही शुंग, आंध्र, गुप्‍त, केशरी तथा अन्‍य अनेक शक्तिशाली हिंदू साम्राज्‍यों की स्‍थापना हुई थी। दक्षिण के पल्‍लवों, पौण्‍ड्रों, चौल तथा चालुक्‍यों को रामानुज तिरूमंगल अथवा सायण, अपर स्‍वामी एवं अन्‍य संतों का ही आशीर्वाद प्राप्‍त था। अशोक ने भी अपने महान साम्राज्‍य का विस्‍तार भगवान बुद्ध की पावन पताका को हाथों में थामकर ही किया था। छत्रपति शिवाजी एवं गुरू गोविंद सिंह भी अपने आध्‍यात्मिक गुरूओं- समर्थ स्‍वामी रामदास तथा गुरू  नानक देव से ही प्रेरणा पाते थे। 


मित्रों, यदि हमें राष्‍ट्र निर्माण करना है तो इसके लिये हमें आध्‍यात्‍मवाद का भी पुनरूद्धार करना होगा। केवल हिंदू धर्म के माध्‍यम से ही भारत में प्रेम और ऐक्‍य की भावना से परस्‍पर संवद्ध और चरित्र बल के धनी नर नारियों का उद्भव होगा।
धर्म ही इस हिंदू राष्‍ट्र को बद्रीनाथ से कन्‍या कुमारी तक और नेफा से हिंगलाज तक एकता के सूत्र में आबद्ध करने वाला आधार है। 


आज राष्‍ट्रों में विद्यमान पारस्‍परिक कलह तथा खुली घृणा के प्रदर्शन और प्रकृति के रहस्‍यों पर पाई गई विजय के फलस्‍वरूप विश्‍व के समक्ष जो भयावह और दिग्‍भ्रांत स्थिति निर्मित हो गई है हिंदू धर्म के सिद्धांत ही उसका निराकरण कर विश्‍व को सच्‍ची शांति का सुअवसर प्रदान कर सकते है।
वीर और बलवान बनो
हमें यह स्‍मरण रखना है कि यद्यपि अहिंसा हमारे धर्म का सर्वोच्‍च आदर्श है किन्‍तु वह सत्‍व गुण का ही सर्वश्रेष्‍ठ स्‍वरूप है। जब तक हम उस स्थिति को प्राप्‍त न कर लें हमें ''रजोगुण'' का व्‍यवहार करना होगा अर्थात हमें जीवन में सक्रिय होना होगा। स्‍वरक्षा और राष्‍ट्र रक्षार्थ हिंसा को भी सार्वभौमिक दृष्टि से मान्‍यता प्राप्‍त है। 


हमारे वेद, पुराण तथा अन्‍य सभी धर्म ग्रंथ हमें यह सिखाते हैं कि हम अग्रगामी बनें सक्रिय हों तथा यदि आवश्‍यकता आ पड़े तो आसुरी शक्तियों के विरूद्ध संग्राम करने हेतु हिंसा के भी मार्गका अवलंबन करें। हमारे अधिकांश देवताओं के हाथों में शांति के प्रतीक कमल तथा अन्‍य चिह्नों के अतिरिक्‍त शस्‍त्रास्‍त्र भी हैं। आओ हम उनके सच्‍चे अनुगामी बनें। कायरता का परित्‍याग कर वीरत्‍व को ग्रहण करें और शौर्यवान हों। चरित्र ही सब शक्तियों की आधार शिला है। हमारे उपनिषद भी ''चरैवेति चरैवेति'' अर्थात अग्रगामी होने का ही आदेश दे रहे हैं। सक्रियता ही जीवन है और निष्क्रियता ही मृत्‍यु। 


आदर्श के लिये ही जियो


हमें दूसरे राष्‍ट्रों का अंधानुकरण करने वाले समूह के रूप में नहीं अपितु कतिपय आदर्शों के लिये निर्मित हुये एक राष्‍ट्र के रूप में जीवित रहना होगा हमें एक ऐसे शासन की स्‍थापना करनी होगी जो जनता की अर्थात हिंदू राष्‍ट्र की आकांक्षाओं की पूर्ति करे। हिंदुत्‍व पर आधारित समाजवाद ही इस शासन की आर्थिक नीति का निर्देशक होगा। हमें अपने देश के उन भू-खण्‍डों को पुन: प्राप्‍त करने का उद्योग करना होगा जो हमारे पूर्वजों की कायरता अथवा विश्‍वासघात के कारण शत्रुओं द्वारा हड़प लिया गया है। 


इसके साथ ही साथ हमें विश्‍व के हिंदू राज्‍यों का एक सुदृढ़ संघ बनाने की दिशा में प्रवृत्‍त होना होगा जिसके द्वारा विश्‍व को प्रेम और आध्‍यात्मिकता का संदेश प्राप्‍त हो सकेगा। यह भारत को प्राप्‍त हुआ पावन दायित्‍व है और हम जो इस भारत माता के पुत्र हैं उन्‍हें इस कार्य के लिये सक्रिय होना पड़ेगा। हम किसी राजनैतिक साम्राज्‍य की स्‍थापना के आकांक्षी नहीं हैं किंतु उस दिन की हम निश्चित रूप से ही बाट जोह रहे हैं जब जापान, कंबोडिया, थाई देश, वियतनाम(हिंदू-चीन), हिंदू एशिया(इण्‍डो-नेशिया), मलय, ब्रह्मदेश, श्रीलंका, फिजी, मॉरिशस, तिब्‍बत, सिक्किम, भूटान आदि सभी राज्‍यों का एक भ्रातृभावना पर आधारित संघ गठित होगा। जो उनमें से किसी भी  एक पर इस्‍लाम, ईसाईयत अथवा नास्तिकवाद किसी के द्वारा भी राजनैतिक अथवा धार्मिक या आर्थिक प्रहार होने पर संगठित होकर उस आक्रमण का मुंह तोड़ उत्‍तर दे सकेगा।


 हमारा यह सुदृढ़ हिंदू संघ स्‍थापित होगा तो इन देशों के वे हिंदूजन तथा अन्‍य पड़ोसी देश भी अपने पूर्वजों के पुनीत हिंदू धर्म को पुन: अंगीकार कर लेंगे जिन्‍होंने इस पावन धर्म का परित्‍याग कर दिया है। वे सभी इस एक हिन्‍दू राष्‍ट्र मण्‍डल में सम्मिलित हो जाएंगे ऐसी हमारी मान्‍यता है। हम भी उनके द्वारा हिंदुत्‍व की पुनीत गंगा में अवगाहन करने के सुकृत्‍य का हार्दिक अभिनंदन करेंगे। 


विश्‍व हिंदू धर्म सम्‍मेलन 


इसी महान आदर्श को दृष्टिगत रखकर हिंदू महासभा ने विश्‍व हिंदू धर्म सम्‍मेलन का आयोजन किया है, जो इसी वर्ष नई दिल्‍ली में संपन्‍न हो रहा है। सम्‍मेलन कोई दलीय प्रश्‍न नही है। किसी भी राजनैतिक मतवाद के अनुगामी वे हिंदूजन इस सम्‍मेलन में भाग ले सकेंगे जिनकी उपरोक्‍त आदर्श में आस्‍था है। मुझे आपको यह सूचित करते हुये प्रसन्‍नता हो रही है कि उपरोक्‍त  सभी देशों  तथा अफ्रीका, त्रिनिदाद, जंजीबार, फिजी, अमरीका, फिलिपिंस, पाकिस्‍तान और ब्रिटिश गियानाके हिंदुओं ने हमारे आह्वान पर इस सम्‍मेलन में भाग लेना स्‍वीकार किया है। सम्‍मेलन की स्‍वागत समिति‍ द्वारा इसकी निश्चित  तिथियों की घोषणा निकट भविष्‍य में  ही कर दी जायेगी।

हिन्‍दू धर्म


अखिल भारत  हिन्‍दू महासभा

49वां अधिवेशन पा‍टलिपुत्र-भाग:19 

(दिनांक 24 अप्रैल,1965)

अध्‍यक्ष बैरिस्‍टर श्री नित्‍यनारायण बनर्जी  का अध्‍यक्षीय भाषण 

प्रस्‍तुति: बाबा पं0 नंद किशोर मिश्र


कई लोग यह प्रश्‍न करते हैं कि हिंदुओं के विभिन्‍न  संप्रदायों में एकता का समान आधार क्‍या है और शाक्‍त, शैव, गाणपत्‍य, लिंगायत, बुद्ध मत, जैन मत तथा सिख मत इनमें से कौन सा मत हिंदुस्‍थान का राज्‍य धर्म बनेगा? भारत में जितने भी धर्मों का उद्भव हुआ है उन सभी में मृत्‍यु  के अनंतर जीवन, पुर्नजन्‍म एवं कर्मवाद तथा गौ माता  और वेदों का आदर ये सामान आधार हैं। शुचिता, धैर्य एवं  अक्रोध और इन सब से भी उपर प्रेम ये चार ही भारत में उद्भूत हुये सभी धर्मों  के समान और आवश्‍यक सिद्धांत हैं। परम पिता परमात्‍मा को सर्वव्‍यापक मानना तथा जगत की रचना को उसी की कलाकृति समझना एवं अपनी आत्‍मा में भी परमात्‍मा की अनुभूति कर, दुखों और सभी बंधनों से मुक्त्‍िा  प्राप्‍त करना ही हिंदू धर्म का लक्ष्‍य रहा है। सभी को परमपिता परमात्‍मा का अंश मानकर उनसे प्रेम करना ही हिंदू धर्म सिखाता है। 


हिंदू धर्म के अंर्तगत आने वाला प्रत्‍येक मत ही अपनी भावनाओं पर नियंत्रण तथा भौतिक सुखों से विरक्ति का ही पाठ पढ़ाता है। हिंदू धर्म में द्वैत से लेकर अद्वैत तक को स्‍थान प्राप्‍त हुआ है तथा उपरोक्‍त लक्ष्‍य की प्राप्ति हेतु किसी भी मार्ग का अवलंबन करने की स्‍वतंत्रता प्रदान की गई है। हिन्‍दू धर्म विभिन्‍न पूजा-पद्धतियों का एक सुंदर पुष्‍पकुंज है। वस्‍तुत: हिंदू नाम का तो कोई धर्म ही नहीं है। अपितु वे सभी धार्मिक विश्‍वास और पद्धतियां तथा प्रणालियां हिंदुत्‍व के अंर्तगत आ जाती हैं जिन्होंने अपने आपको इस देश के राष्‍ट्र जीवन के साथ आत्‍मसात कर देने के पथ का अनुगमन किया है। 


वे सभी व्‍यक्ति जो एक परमात्‍मा अथवा उसके अनेक रूपोंमें विश्‍वास ही नहीं करते अपितु जो उसके अस्तित्‍व को भी नही मानते किंतु यदि वे इस देश के प्राचीन हिंदू गौरव से अपने आपको पृथक नही करते तो इस हिंदू नाम के अंर्तगत आ जाते हैं। उन्‍हीं के द्वारा हिंदू राष्‍ट्र निर्मित होता है। हिंदू धर्म संसार का सबसे महान लोकतांत्रिक धर्म है। यह प्रत्‍येक व्‍यक्ति को अपनी पूजा-पद्धति का चयन करने की अनुमति देता है। इतना ही नहीं यह दूसरों के मत का  दमन ही नहीं विरोध करने से भी रोकता है।


 हमारा किसी विदेशी धर्म के साथ कोई वैर अथवा विरोध-भावना नहीं है जब तक कि वह हमारे धार्मिक विश्‍वास पर चोट नहीं करते फिर चाहे वह इस्‍लाम हो अथवा ईसाई मत। जिस भांति विज्ञान भौतिक जगत के सत्‍यों से संबद्ध है, उसी भांति हिंदू धर्म का आध्‍यात्मिक जगत के सत्‍यों से संबद्ध है, उसी भांति हिंदू धर्म का आध्‍यात्मिक जगत से संबंध है। गीता के दर्शन को सामान्‍यत: सभी हिंदू जन स्‍वीकार करते हैं। अत: वही राज्‍य धर्म का आधार हो सकता है।