Friday, April 29, 2011

क्‍या ये हमारे युवाओं के आदर्श बनेंगे

                  प्रस्‍तुतिःडॉ0 संतोष राय

From the album: Mobile Uploads
By Pramod A Kolar
The following are some of the Government Schemes and Projects that have been named after the Great(?) Nehru-Gandhi family.
Central Government Schemes
1. Rajiv Gandhi Grameen Vidyutikaran Yojana, Ministry of Power – A scheme “Rajiv Gandhi Grameen Vidyutikaran Yojana” for Rural Electricity Infrastructure and Household Electrification was launched for the attainment of the National Common Minimum Programme of providing access to electricity to all Rural Household by 2009. Rural Electrification Corporation (REC) is the nodal agency for the scheme. Rajiv Gandhi Grameen Vidyutikaran Yojana to be continued during the Eleventh Plan period with a capital subsidy of Rs. 28000 Crore; allocation of Rs 5500 crore for FY09.
2. Rajiv Gandhi National Drinking Water Mission (RGNDWM), Ministry of Rural Development, Annual allocation plan 2007-08 was Rs.6,400 crore and Annual allocation plan 2008-09 is Rs.7,300 crore.
3. Rajiv Gandhi National Crèche Scheme for the Children of Working Mothers, Department of Women & Child Development, Ministry of HRD, New Delhi,
Budgetary allocation 2008-09 – 91.88 crore.
Budgetary allocation 2009-10 – 91.52 crore
4. Rajiv Gandhi Udyami Mitra Yojana for benefit of NE entrepreneurs, Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises, Government of India,
Budgetary allocation 2008-9 – Rs. 2.70 crore
Budgetary allocation 2009-10 – Rs.1.12 crore
5. Indira Awas Yojana, Ministry of Rural Areas and Environment – IAY is a CSS funded on cost-sharing basis between the Centre and the States in the ratio of 75:25. In the case of UTs, the entire funds are provided by Centre. The target groups for housing under IAY are households below poverty line living in rural areas, particularly those belonging to SC/ST and freed bonded labourers.
Budgetary allocation 2008-09 – Rs. 7919.00 crores
Budgetary allocation 2009-10 – Rs.7914.70 crores
6. Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme – objective to provide social security to workers in the unorganized sector in a phased manner. Budgetary allocation in 2008-09 is Rs. 3,443 crore
7. Jawaharlal Nehru Urban Renewal Mission, Ministry of Urban Development,
Govt. of India – 7 years time frame, 50,000 cr.
Budgetary allocation for 2008 – 9 – 10447.98 crore
Budgetary allocation for 2009-10 – 10713.84 crore
8. Jawaharlal Nehru Rojgar Yojna – Ministry of Labour and Employment – A Self- employment programme for urban poor
9. Rajiv Gandhi Shramik Kalyan Yojna, Employees’ State Insurance Corporation
10. Indira Gandhi Canal Project, Funded by World Bank
11. Rajiv Gandhi Shilpi Swasthya Bima Yojana, Union Ministry of Textiles, in association with ICICI Lombard General Insurance Company Limited
12. Indira Vikas Patra

मेरा भारत महान्

रवि                       प्रस्तुति: डॉ. संतोष राय


बहुत दिनों से भारत के नाम को ले के हमारे इतिहास की किताबों में अजीब अजीब बातें की जाती हैं और ये सब अंग्रेजों के बताये रास्ते पर ही हमें पढाया गया है | भारत के कई नाम हैं, जैसे जम्बूदीप,आर्यावर्त, भारत, हिन्दुस्तान और इंडिया | पहले दो को छोड़ के मैं बाकि तीन के बारे में अपने विचार लिख रहा हूँ उम्मीद है क़ि आपको मेरे तर्क पसंद आयेंगे |
भारत
भारत का नाम राजा दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम पर रखा गया था ऐसी बातें हम पढ़ते आ रहे हैं | ये सिर्फ एक कल्पना है और कुछ नहीं | क्यों क़ि आप विश्व के किसी भी धर्म और संस्कृति को देखेंगे तो पाएंगे क़ि वो भूमि को मातृशक्ति के रूप में ही मानते हैं और हमारे देश में इसे तो मातृभूमि ही कहा जाता है और भारत माता के नाम से हम जयकारा लगाते हैं | भरत नाम के जो राजा थे वो पुरुष थे और उनके नाम पर भारत का नाम रखा गया होगा ये सही नहीं है | भारत कोई आज का नाम नहीं है, ये तो अनंत काल से चला आ रहा है, हमारे वेदों में, पुराणों में, ब्राम्हण ग्रंथों में, रामायण में, महाभारत में, गीता में हर जगह इस भूमि को भारत ही संबोधित किया गया है |  तो ये भारत नाम आया कैसे ? भारत बना है दो शब्द मिला के भा+रत =भारत | "भा" का मतलब हुआ "ज्ञान" और "रत" का मतलब हुआ "लगा हुआ" अब दोनों को आप जोड़िएगा तो मतलब हुआ "जो ज्ञान में रत हो" यानि हर समय जो ज्ञान प्राप्ति में लगा हुआ हो वो है भारत | और इसके प्रमाण भी हैं क़ि हमने दुनिया को अकाट्य और अतुलनीय ज्ञान दिया है | और ये भारत नाम, माँ भारती से निकला है और ये माँ भारती है विद्या की देवी सरस्वती जी | और इसके अलावा भारत का जो क्षेत्र था वो बहुत विशाल था, ये आज के अफगानिस्तान से ले के इधर बर्मा (म्यांमार) तक और हिमालय के नीचे से ले के समुद्र तक | अब आज के सन्दर्भ में इसे देखे तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान, मालदीव, नेपाल, भारत, बंग्लादेश और बर्मा, ये था अखंड भारत या भारत वर्ष | भारत नाम लेते ही विशालता का अनुभव होता है |
हिन्दुस्तान 
एक और नाम है भारत का वो है हिन्दुस्तान और देखिये कैसी मूर्खतापूर्ण तर्क दी जाती है हिन्दुस्तान नाम के पक्ष में | हम लोगों को पढाया गया  क़ि जब मध्य पूर्व से आक्रमणकारी भारत में आते थे तो सिन्धु नदी के कारण इसे हिन्दुस्तान कहने लगे | ये इतिहास लिखने वाले लोग जब इतिहास लिखने बैठे होंगे तो वो भारत के पंजाब को ही भारत का बोर्डर समझते थे इसलिए उनके इस कहानी में सिन्धु नदी बीच में आ जाती है, जब क़ि उस समय का भारत अफगानिस्तान से शुरू होता था | अरे पंजाब में तो पाँच नदियाँ बहती हैं तुम्हे बार बार सिन्धु नदी ही क्यों दिखाई देती है भाई | सिन्धु नदी कभी भी हमारी पहचान नहीं थी और न होगी | बार बार सिन्धु नदी को हमारी पहचान बनाने की असफल कोशिश की गयी | और मध्य पूर्व वाले कोई ऐसे मुर्ख नहीं थे जो "स" को "ह" बोलते थे | उन्होंने यहाँ भारत में मौजूद हिन्दुओं और हिन्दू धर्म के कारण इस जगह को हिन्दुस्तान कहना शुरू किया | ये हिन्दुस्तान भी दो शब्दों को मिला के बना है | हिन्दू + स्तान=हिन्दुस्तान | "स्तान" एक पर्शियन शब्द है और इसका मतलब होता है जगह/स्थान/देश | ये संस्कृत के शब्द स्थान से पर्शियन में लिया गया है | हिन्दुस्तान का मतलब था हिन्दुओं का स्थान/हिन्दुओं का जगह/हिन्दुओं का देश | जैसे पाकिस्तान (पाक+स्तान=पाकिस्तान, हिंदी में इसका मतलब हुआ पवित्र स्थान/पवित्र जगह/पवित्र देश) | अब आप समझ गए होंगे इस "स्तान" का मतलब | ऐसे ही "स्तान" वाले कुछ देश हैं जैसे अफगानिस्तान (अफगानों का देश), किर्गिजस्तान (किर्गीजों का देश), कजाकिस्तान (कजाकों का देश), तुर्कमेनिस्तान (तुर्क्मानों का देश), आदि आदि | ये जो देशों के नाम अभी मैंने बताये ये उनके नस्ल या जाति के नाम पर आधारित हैं |  तो ये दिमाग से निकाल दीजिये क़ि सिन्धु के नाम पर हमारे देश का नाम हिन्दुस्तान पड़ा था | यहाँ रहने वाले हिन्धुओं और हिन्दू धर्म की वजह से उन्होंने हमारे देश को हिन्दुस्तान नाम दिया था | हमारे लिए भारत और उनके लिए हिन्दुस्तान |
इंडिया  
अंग्रेज जब भारत आये तो उन्होंने बहुत बारीकी से अध्ययन किया भारत का और उन्होंने एक सूचि बनाई क़ि उन्हें भारत में क्या करना होगा क़ि भारत को गुलाम बनाया जा सके | पहला तो इसके शिक्षा तंत्र को ध्वस्त करना होगा, दूसरा इसके इसके तकनीकी संरचना (Techonological Infrastructure) को तोडना होगा, तीसरा कृषि क्षेत्र को बर्बाद करना होगा | और उन्होंने उसी हिसाब से काम भी किया और वो पूरी तरह सफल रहे अपने इस काम में |  आप जानते हैं क़ि जब भारत स्वतंत्र हो रहा था तो अंग्रेजों ने संधि में ये प्रावधान डाला था क़ि भारत के जो रजवाड़े जिस तरफ जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं | मतलब कोई राजा भारत के साथ मिलना चाहता है वो भारत में मिल सकता है और जो पाकिस्तान में जाना चाहता है वो पाकिस्तान में मिल सकता है | इसके अलावा सब को ये छुट था क़ि अगर आप अपना स्वतंत्र अस्तित्व रखना चाहते हैं तो स्वतंत्र भी रह सकते हैं | उस समय भारत में 565 रजवाड़े हुआ करते थे और अंग्रेज तो चाहते ही थे क़ि भारत के 565 टुकड़े हो जाएँ नहीं तो वे ऐसा कानून क्यों बनाते | इसी कानून का नतीजा था क़ि कई राज्य ऐसे भी हुए जिन्होंने ये फैसला किया था क़ि वे ना तो भारत में जायेंगे और ना पाकिस्तान में | ऐसे जो राज्य थे, वो थे कोयम्बटूर, त्रावनकोर, हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू और कश्मीर | ये भारत क़ि आजादी का नहीं भारत की बर्बादी का कानून था | सरदार वल्लभ भाई पटेल को लगा क़ि अगर ये कानून लागू हुआ और कानून लागू होने के बाद बहुत से राजा ये बात बोलना शुरू कर देंगे क़ि इस कानून के आधार पर तो हमें स्वतंत्र राज्य रखने का अधिकार है, स्वतंत्र राष्ट्र बनाने का अधिकार है तब तो बहुत बड़ा संकट पैदा हो जायेगा | तो सरदार पटेल ने पहले से ही एक अभियान चलाया था क़ि ज्यादा से ज्यादा राजाओं और महाराजाओं को भारतीय राष्ट्र में जोड़ा जा सके और इसी के लिए वो समझौते कर रहे थे और करवा रहे थे | और उनकी योजना ये थी क़ि अंग्रेजों की सरकार जिस दिन तक ये कानून लागू करे उस दिन तक ज्यादा से ज्यादा राज्य और रियासतें भारत में शामिल हो जाएँ और उनके समझौते भारत सरकार के साथ हो जाएँ और ये काम उन्होंने बखूबी  किया भी और अकेले दम पर किया | बहुत कम लोग इस तरह का काम कर सकते हैं जो सरदार पटेल ने किया था | इस तरह की साजिस की थी अंग्रेजों ने भारत को टुकड़ों में बाटने की | 

अब सवाल उठता है क़ि ये भारत का नाम इंडिया क्यों रखा अंग्रेजों ने ? हमें बचपन से पढाया गया क़ि अंग्रेज भारत आये तो इन्डस नदी और सिन्धु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization)  के नाम पर इन्होने भारत को इंडिया कहना शुरू किया | पहले तो मैं बता दूँ क़ि अंग्रेजों ने कभी भी इन्डस नदी के रास्ते भारत में प्रवेश नहीं किया था, वो भारत जब भी आये तो समुद्र के रास्ते से आये | और ये सिन्धु या इन्डस नदी भारत की कोई ऐसी महत्वपूर्ण नदी नहीं थी गंगा जी की तरह, जो हमारे भारत की पहचान इस सिन्धु नदी से बनती या बनी होगी |

दूसरी बात ये क़ि सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज अंग्रेजों के भारत में रहते हुए हुई थी न क़ि अंग्रेजों के आने के पहले, इस की पहली जानकारी 1842 में मिली थी और बाद में 1920 में इस पर ज्यादा काम हुआ | और उसके पहले मैकाले का बयान 1835 में आया था जो उसने ब्रिटिश पार्लियामेंट में दिया था तब उसने भारत को इंडिया ही कह के संबोधित किया था और उसके पहले के भी जितने दस्तावेज हैं उन सब में भारत को इंडिया ही बताया गया है | तो ये कुतर्क बार बार देना क़ि भारत का नाम Indus River और Indus Valley Civilization के नाम पर था वो बिलकुल गलत और भ्रामक है |
अंग्रेजों ने ये इंडिया नाम उधार लिया था ग्रीक से, भारत को ग्रीक भाषा में इंडिया कहते और लिखते हैं | आप जब भारत को ग्रीक लिपि में लिखेंगे तो वो होगा ινδια | (आप इस लाल से लिखे हिस्से  को कॉपी करके पेस्ट कीजिये http://translate.google.com वेबसाइट के बाई तरफ के हिस्से में और Language ग्रीक चुनिए और दाहिनी तरफ हिंदी चुनिए और जब आप Translate पर क्लिक करेंगे तो वहां भारत लिखा जायेगा) | अंग्रेजों ने ये इंडिया नाम ग्रीक लोगों की भाषा से लिया था, ग्रीक लोग इंडिया कहते थे उसका मतलब भारत ही होता था लेकिन अंग्रेजों के रास्ते होते हुए अब हम भारत के लोग भी भारत को इंडिया ही कहने लगे हैं, जो क़ि कहीं से भी भारत नहीं है |
अब सवाल उठता है क़ि भारत को अंग्रेजों ने आजादी के बाद भी इंडिया नाम से संबोधित करने को क्यों कहा ? (सत्ता के हस्तांतरण समझौते में कहा गया है क़ि "भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया ही प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है |") और अंग्रेजों के इशारे पर उस समय हमारे देश के कर्णधारों ने संविधान के प्रस्तावना में लिखा क़ि "India that is Bharat " जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | इसकी वजह है क़ि अंग्रेज नहीं चाहते थे क़ि भारत फिर से पुराना भारत बने और फिर उसी उचाईं को प्राप्त करे जो वो अंग्रेजों के आने के समय था | उन्हें डर था क़ि भारत फिर से ज्ञान में रत रहने वाला न बन जाये | और भारत नाम से जो विशालता का बोध होता है वो बोध इन्हें न हो जाये | जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है अंग्रेजों ने भारत को खंड खंड में तोड़ने का पूरा तो पूरा प्रयास किया ही था लेकिन भला हो सरदार पटेल का जिन्होंने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया था |
भारत और इंडिया में अंतर
भारत और इंडिया में कई अंतर है | जैसे

इंडिया competition पर चलता है और भारत cooperation पर |

इंडिया की theory है Survival of the fittest और भारत की theory है Survival of all including the weakest |
इंडिया में ज्ञान डिग्री से मिलता है और भारत में ज्ञान सेवा से मिलता है |
इंडिया में Nuclear Family चलती है और भारत में Joint Family |

इंडिया में सिद्धांत है स्व हिताय स्व सुखाय और भारत में सिद्धांत है बहुजन हिताय बहुजन सुखाय |

इंडिया में "I " "मैं" चलता है और भारत में "हम" चलता है |

Tuesday, April 19, 2011

मुहम्मद के आदर्श दुर्गुण !

बी.एन. शर्मा                               प्रस्तुति: डॉ. संतोष राय


कुरान में मुहम्मद के द्वारा किये गए हरेक काम को मुसलमानों के लिए आदर्श उदाहरण (Good Example )बताया गया है .और इसी को सुन्नत कहा गया है .इसका अर्थ है कि मुसलमानों को वही काम करना चाहिए ,जो मुहम्मद करता था ,या जो भी काम उसने किये थे उसका अनुकरण करना जरूरी है .कुरआन में यही लिखा है -
"निश्चय ही तुम्हारे लिए रसूल का उत्तम आदर्श मौजूद है .जो भी अंतिम दिन आशा रखता है ,रसूल का अनुसरण करे .सूरा -मुम्तहिना 60 :6
"निश्चय ही तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल का आदर्श पर्याप्त है ".सूरा -अहजाब 33 :21
मुसलमान मुहम्मद को एक पूर्ण मानव या "कामिल इन्सान "बताते हैं और उसके हरेक काम को सद्गुण कहते हैं .
मुसलमान मुहम्मद के चरित्र को "उस्व ए हसना " या اسوهِ حسنه उतम चरित्र कहते हैं .
अब आपको मुहम्मद के कुछ उत्तम चरित्र या सद्गुणों के बारे में प्रमाणिक हदीसों और इस्लाम की तवारीख से हवाले दिए जा रहे हैं .कुछ हदीसे लम्बी होने के कारण उसका सारांश ही लिया जा रहा है .पूरी हदीस साथ में दी गयी साईट में देख सकते हैं .यद् रखिये कि मुहम्मद का एक एक कार्य सुन्नत बन जाता था .और कानून का दर्जा प्राप्त कर लेता था .इसी को शरीयत भी कहा जाता है .और जो इसका इंकार करता है ,वह काफ़िर घोषित कर दिया जाता है .
अब संक्षिप्त में मुहम्मद के आदर्श कार्यों या सद्गुणों (दुर्गुणों )के नमूने देखिये -
1 -यहूदी द्वेषी )Antismetic )
"अबू हुरेरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि जब तक हम ईसाइयों और यहूदियों का जमीन से सफाया नहीं करेंगे ,फैसले का अंतिम दिन नहीं आयेगा .इस लिए यहूदियों और ईसाइयों को क़त्ल करो .अगर वह किसी पत्थर या पेड़ के अन्दर भी छुप जायेंगे तो पेड़ बोल लार उनका पता दे देगा .लेकिन "गरकाद"का पेड़ चुप रहेगा .क्योंकि वह खुद यहूदी है .मुस्लिम-किताब 41 हदीस 6985 ,बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 791
2 -जादू ग्रस्त (Bewictched )
"आयशा ने कहा कि ,बनू जुरैक के कबीले के एक यहूदी लाबिद बिन अल असाम ने रसूल रसूल पर जादू कर दिया था .जिस से वह दीवाने हो गए थे .उनके मुंह से गलत आयते निकलती थीं .ऎसी हालत कई महीनों तक रही .जब हमने टोटका किया तो वे ठीक हुए .".
मुस्लिम -किताब 26 हदीस 5428
3 -रिश्वतबाज (Briber )
"कुरेश के लोगों ने रसूल से शिकायत की ,कि आप लूट के मॉल से "नज्द "के सरदार को रिश्वत देते है ,लेकिन हमें कुछ नहीं देते .रसूल ने कहा कि मैं ऐसा इस लिए करता हूँ ,ताकि वह लोगों को इस्लाम के प्रति आकर्षित करे.बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 558
4 -बाल उत्पीड़क (Child Abuser )
"अस सुब्र ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,जैसे ही तुम्हारे बच्चे 6 साल के हो जाएँ ,तो उनसे नमाज पढाओ ,और रसूल पर दरूद पढ़ने को कहो.अगर वह ऐसा न करें तो उनकी बेंतों से धुनाई करो .अबू दाऊद-किताब 2 हदीस 294 और 295
5 -बाल हत्यारा (Child Killer )
"अल अतिया अल कारजी ने कहा कि ,जब रसूल ने बनू कुरेजा के कबीले पर हमला किया था ,तो हरेक बच्चे के कपडे उतार कर जाँच की ,जिन बच्चों के नीचे के बाल (Pubic hair ) निकल रहे थे ,उन सब बच्चों को क़त्ल करा दिया गया .उस वक्त मेरे बाल नहीं उगे थे ,इसलए मैं बच गया था .मुस्लिम -किताब 38 हदीस 4390
"अस सबा बिन जसमा ने कहा कि ,रसूल ने "अल अबबा"की जगह पर काफिरों के साथ उनके बच्चों को भी क़त्ल कर दिया था .और औरतों को कैद करके लोगों में बाँट दिया था .बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 256
6 -स्त्री वेशधारी (Cross Dresser )
"अब्दुला बिन अब्दुल वहाब ने कहा कि ,एक बार मैं रसूल के घर गया ,मैं उनको तोहफा देने गया था .रसूल ने उमे सलमा सेकहा कि ,मुझे परेशां नहीं करो इस वक्त मैं आयशा के कपडे पहिने हुए हूँ ,जैसा हमेशा करता हूँ .मुस्लिम -किताब 2 हदीस 3941
7 -तिरस्कृत (Dispraised )
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,कुरैश के लोग मुहम्मद को रसूल नहीं बल्कि पाखंडी मानते थे .और उसे धिक्कारते थे .वे मुहम्मद को "मुहम्मम "कह कर मजाक उड़ाते थे .बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 733
8 -अहंकारी (Egoist )
"अबू सईद बिन मुल्ला नेकहा कि ,एक बार मैं नमाज पढ़ रहा था .तभी रसूल ने मुझे पुकारा .मैनेनाहीं सुना ,जब रसूल ने चार पांच बार पुकारा तो मैं उनके पास गया .रसूल ने कहा कि नमाज से जादा रसूल की बात सुनना जरूरी है ,उसी समय रसूल ने यह आयत बना दी थी .जिसमे कहा गया है "अपने रसूल की बात पाहिले सुनो .कुरआन -सूरा अल अन आम 8 :24 "बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 226
बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 1 .और बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 170
9 -द्वेष प्रचारक (Hate Preacher )
"अबू जर ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,अल्लाह ने मुझे दुनिया में नफ़रत फैलाने का काम सौंपा कर लिए भेजा है.और अल्लाह के नाम पर लोगों के बीच नफ़रत फैलाना उत्तम काम है.इसा से ईमान पुख्ता होता है .नफ़रत ईमान का हिस्सा है.अबू दाऊद-किताब 40 हदीस 4582 -4583 .
10 - खुशामद पसंद(Magalomaniac )
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि,जब तक तुम अपने बाप और बच्चों से अधिक मुझे अपना अजीज नहीं मानते ,मुसलमान नहीं बन सकते.तुम सारी दुनिया और अपने बाप और बच्चों से मुझे अपना हितैषी मानो.बुखारी -जिल्द 1 किताब 2 हदीस 12 और 13
11 -मोटा और स्थूल (ओबेसे )
"अबू बाजरा ने कहा कि एक बार रसूल को मोटापे के कारण एक पड़ी पर चढ़ने में तकलीफ हो रही थी ,ताल्हा बिन अबू उबैदुल्ला ने मुस्लिम नामके एक आदमी से कुछ लोगों बुलवाया ,और कहा देखो यह रसूल तुम्हारा बोझा हैं ,जो काफी भारी है .इसे ध्यान से ऊपर उठाना .फिर उन लोगों ने रसूल को ऊपर चढ़ाया.अबू दाऊद-कताब 40 हदीस 4731
12 -लुटेरा (Plundarer )
"जबीर बिन अब्दुल्ला ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,अल्लाह ने मेरे लिए लूट का माल हलाल कर दिया है.बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 351
(नोट -इसके बारे में पूरा विवरण "लुटेरा रसूल "शीर्षक से अलग से दिया जाएगा )
13 -चरित्रहीन(Characterless )
"आयशा ने कहा कि रसूल के कई औरतों से गलत सम्बन्ध थे.फिर भी वह दूसरी औरतों को बुला लेते थे.और अपनी औरतों के लिए समय और दिन तय कर देते थे.पूछने पर कहते थे ,तुम चिंता नहीं करो ,तुम्हारी बारी तुम्हीं को मिलेगी .अगर मैं अल्लाह इच्छा पूरी करता हूँ ,तो तुम्हें जलन नहीं होना चाहिए .बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 311
(नोट -इसी बात पर कुरान की सुरा -अहजाब 33 :51 naajil

14 -नस्लवादी (Racist )
"अनस बिन मालिक ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,हारेग गुलाम को अपने मालिक के हरेक आदेश पा पालन करना चाहिए .और हरेक काले लोग (Negro )हबशी दास होने के योग्य हैं.क्योंकि उनका रंग काले सूखे अंगूर की तरह (Raisin )की तरह है .बुखारी - जिल्द 9 किताब 89 हदीस 256 .और बुखारी -जिल्द 1 किताब 11 हदीस 662 और 664
15 -कामरोगी(Sex Addict )
"अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल बारी बारी से लगातार अपनी पत्नियों और दसियों से सम्भोग करते थे ,फिर भी उनकी वासना बनी रहती थी .बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 142 .
"अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल बारी बारी से हरेक औरत के साथ सम्भोग कर्राते थे .लेकिन उनकी वासना शांत नहीं होती थी .और जब भी युद्ध में औरतें पकड़ी जाती थीं ,रसूल उनके साथ सम्भोग जरुर करते थे.बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हद्दीस 268
16 -गुलामों का शौकीन (Slaver (
मुहम्मद को गुलाम रखने का शौक था .वह गुलाम बनाता भी था और उनका व्यापार भी करता था .मुहमद के पास मर्द और औरत गुलाम थे .कूछ के नाम इस प्रकार हैं -
मर्द गुलाम -साकन,अबू सरह ,अफ़लाह,उबैद ,जकवान ,तहमान,मिरवान,हुनैन ,सनद ,फदला,यामनीन,अन्जशा अल हादी ,मिदआम ,करकरा ,अबू रफी ,सौवान,अब कवशा,सलीह ,रवाह ,यारा ,नुवैन ,फजीला ,वकीद ,माबुर,अबू बकीद,कासम ,जैदइब्ने हरीस ,और महरान .
स्त्री गुलाम -सलमा उम्मे रफी ,मैमूना बिन्त असीब ,मैमूना बिन्त साद ,खदरा ,रिजवा ,रजीना,उम्मे दबीरा ,रेहाना ,और अन्य जो भेंट में मिली थीं
17 -हताश (Hopeless )
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,जब मुहम्मद के उस्ताद "वर्का बिन नौफिल "मर गए तो ,कुरआन की आयतें आना बंधो गयीं थीं .और रसूल इतने हताश हो गए कि ,वे आत्महत्या के लिए एक पहाड़ी पर चढ़ गए थे.क्योंकि कई महीनों से कोई नई आयत नहीं बनी थी .बाद में रसूल ने अपना इरादा बदल लिया था .और कोई दूसरा उपाय खोज लिया था ..बुखारी -जिल्द 9 किताब 87 हदीस 111
18 -आतंकवादी (Terrorist )
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,मुझे अल्लाह ने आदेश दिया है कि मैं लोगों के दिलों में दहशत पैदा कर दूँ ,ताकि लोग भयभीत होकर अपने खजाने और सत्ता मेरे हाथों में सौंप दें .बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 220
19 -अत्याचारी (Torturer )
"अबू हुरैरा ने कहा कि,एक ग्रामीण ने रसूल को "अबे मुहम्मद "कहकर पुकारा ,रसूल ने उसकी जीभ काटने का हुक्म देदिया था .और लोगों ने उसे पकड़ कर उसकी जीभ काट दी
.इब्ने इशाक -हदीस 595
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,एक मुआज्जिन ने ईशा कि नमाज में अजान देने में देर कर दी ,रसूल ने उसको उसके घर सहित जिन्दा जलवा दिया .और वह माफ़ी मांगता रहा .
बुखारी -जिल्द 1 किताब 11 हदीस 626
20 -गन्दा (Unclean )
"अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल के सिर में जुएँ (Lice )भरी रहती थी ,वे नहीनों नही नहाते थे .और "उम्मे हरम "रसूल के सिर से जुएँ निकालती थी .उम्मे हरम "उदबा बिन अस साबित "की पत्नी थी .उसका काम रसूल के जुएँ निकालना था .बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 47
21 -अशिष्ट (Mannerless )
"आयशा ने कहा कि ,एक बार "अल अवाली "गाँव केलोग रसूल का दर्शन करने के लिए आये .वे काफी दूर से पैदल आये थे ,और थके हुए थे .और आराम करना चाहते थे .रसूल ने उनको गाली देकर भगा दिया .बुखारी -जिल्द 2 किताब 13 हदीस 25
22 -पत्नी पीडक (Wife Beater )
"मुहम्मद बिन किस ने कहा कि ,आयशा ने बताया कि एक बार रसूल रत को चुपचाप "अल बाक़ी "के कब्रिस्तान में चले गए.मैंने उनका पीछा किया .रसूल अजीब सी हरकतें कर रहे थे ,और हाथ हिला कर किसी से बातें कर रहे थे ,मैं चुपचाप जल्दी से घर आ गयी ,जब मैंने रसूल से इसके बारे में पूछा तो ,वह नाराज हो गए ,और मुझे नीचे पटक कर गिरा दिया .फिर मेरे दानों स्तनों पर घूंसे मारने लगे .जिस से मुझे कई दिनों तक दर्द होता रहा .सही मुस्लिम -किताब 4 हदीस 2127
23 -धनलोभी(Greedy )
"अल मसूद अल अंसार ने कहा कि ,हम रसूल के आदेश से बाजारों में जाते थे ,और जकात के बहाने दुकान में जोभी होताथा उठा लेते थे .यदि धन नहीं मिलाता तो अनाज या कपडे उठा लेते थे .रसूल कहते थे एक ऐसा समय था ,जब मैं गरीब था .लेकिन आज मेरे पास हजारों दीनार हैं .तो कल मेरे पास सौ हजार दीनारें होंगीं .बुखारी -जिल्द 2 किताब 24 हदीस 497
हम चाहते है

मेरा उन सभी लोगों से अनुरोध है जो,मुस्लिम ब्लोगरो के दुष्प्रचार ,झूठ से प्रभावित होकर मुहम्मद को एक आदर्श व्यक्ति मानने की भूल कर रहे हैं .यह तो थोड़े से उदाहरण हैं .मुहम्मद के आदर्श दुर्गुणों के बारे में जितना लिखा जाये उतना ही कम पडेगा .हरेक मुसलमान में मुहम्मद के यही आदर्श दुर्गुण अवश्य मौजूद होते हैं .यही मुसलमानों की पहिचान है .यही मुसलमान अपने बच्चों को सिखाते हैं और इन्ही गुणों को अपना कर जिहादी तैयार होते हैं .
मेरा अपने मित्रों से निवेदन है की ,मेरे सभी लेखों को धारावाहिक की तरह से नियमित रूप से पढ़ें और दूसरों को पढ़ायें .ताकि इस्लाम .कुरान ,और मुहम्मद संबंधी उनके भ्रमों का निर्मूलन हो जाये .और वे किसी जिहादी ब्लोगर के जाल में फंस कर अपनी संस्कृति और धर्म को न भूल जाएँ .वर्ना भारत से हमारा अस्तित्व मिट जाएगा .
http://wikiislam.net/wiki/Qur'an,_Hadith_and_Scholars:Muhammad

Monday, April 18, 2011

Hindus and other minorities 'under attack' : 2010 HRCP reports, Pakistan

 
Represent: Dr. Santosh Rai
 
 
(Photo : The Human Rights Commission of Pakistan launched its annual report, State of Human Rights in 2010 at a press conference in Islamabad on April 14, 2011)

Islamabad : Stating that about 25 percent of Sikhs in Orakzai Agency were forced to leave their homes and 27 Hindu families sought asylum in India due to security threats, the Human Rights Commission of Pakistan (HRCP) has called 2010 a particularly bad year for minorities.

The report released on Thursday said that about 25 percent of the 102 Sikh families in Orakzai Agency had to leave after Taliban asked them to pay Jaziya or leave the area. The Sikhs could return only after a major military operation.

It also said that at least 27 Hindu families had sought asylum in India due to security threats.

HRCP has said the government did not extend sympathies to the victims of faith-related killings, Dawn reported on Friday.

The report "State of Human Rights in 2010" said there were few positive developments in Pakistan with regard to freedom of thought, conscience and religion.

It stated that there had been a string of faith-based attacks in which not only were minorities targeted but 418 Muslims belonging to various sects were also killed.

"All indications suggest that there are even worse times ahead.”

"Extremist views grew more vociferous as voices for basic human rights and tolerance became more isolated in face of violence and intimidation," the report said.

Criticising the police, the report stated that it was not doing enough to protect the minorities from attacks and had also been accused of harassing or being complicit in framing false charges.

(Photo : Human Rights Commission of Pakistan Working for the ratification and implementation by Pakistan of the Universal Declaration of Human Rights)

HRCP chairman Mehdi Hassan was quoted as saying that most of the human rights violations were by government functionaries.

"Under such conditions, who will ensure that the laws are being implemented?"

The report said that as many as 64 people were charged under the blasphemy law last year and many of them were imprisoned.

A Muslim and two Christian men accused of blasphemy were killed in police custody, the media report said.

Mentioning the law and order situation, it said about 12,580 people were murdered and 581 kidnapped for ransom. At least 16,977 abduction cases were reported.

As many as 1,159 people, included 1,041 civilians, were killed in 67 suicide attacks.

For more information about Human Rights Commission of Pakistan (HRCP) visit :-
http://www.hrcp-web.org/default.asp
 

Pakistan Islamic militants killed 2,500 peoples

Holi Festival in Multan By Pakistan Hindu Post and HRF

Represent:Dr. Santosh Rai
 
 
(Photo : 2011 Holi Celebration at Multan with background bannar of PHP and HRF, Pakistan)
 (Photo : 2011 Holi Festival in Multan By Pakistan Hindu Post and HRF, Pakistan)

Haroon Khalid participates in a Hindu celebration of the ancient spring festival in Multan, Pakistan


 (Photo : 2011 Holi celebration at Multan, Pakistan)
 (Photo : 2011 Holi celebration at Multan, Pakistan)

"Bolo Durga Mata ki,” and the crowd responded in a loud uniform shout of “Jai”. “Bolo Sheran wali ki,” “Jai”. I had been warned of getting my clothes spoiled on Holi, but nobody had told me that I would be made to take part in the traditional sport of matka breaking too. Because I was a first-timer, I got the (not so) easy job of forming the human base. Six of us stood with our hands on each other’s shoulders; we bent, our heads joined, and our right legs were brought into the center. I don’t know how many people climbed, but it felt like an entire army every time. The ones who were not participating threw water and color at us, some of it entering my lungs, some my eyes. The dhol played in the background. There were four matkas to be broken, and every one of them required many failed attempts. The pot was filled with color and water. Traditionally, butter and milk are used, as this is supposed to re-enact the young Lord Krishna’s stealing of butter.

At one point in the ritual, a young man standing next to me couldn’t take the pressure anymore and backed out, causing the entire pyramid to fall. I know of no other sport that requires greater team coordination.

Holi marks the advent of spring and is the most colorful festival of South Asia. The celebrations, which start the night before, are attended by young and old, men and women alike, and zealously. Near midnight, an effigy of Holka is burned to commemorate her death while she was trying to kill Prahlad Bhagat, an avatar of the Lord. According to folklore, many thousands of years ago Multan was ruled by a tyrant called Hiranyakashipu. As a result of his devotion he had been given special powers by Lord Vishnu, one of the gods of the Hindu trinity. In his arrogance Hiranyakashipu made the people of Multan worship him instead of Lord Vishnu. But his son Prahlad Bhagat remained a devotee of the Lord. Many attempts were made on his life, but he escaped them every time. Holka was the sister of Hiranyakashipu. She had a magical shawl which prevented her from being burned by fire. She offered to take Prahlad in her lap and enter fire. This way Prahlad would be burned, whereas Holka would remain protected by her shawl. Legend has it that when she entered the fire, a strong wind blew and the protective shawl covered Prahlad instead of Holka. Holi in Punjab begins with the symbolic burning of an effigy of Holka.
(Photo : Remains of a Hindu temple and Muslim shrine, in the citadel of Multan, Pakistan)

Multan, which once boasted a huge Hindu population, now only has 1200 Hindu voters. All of them belong to the Balmiki group, followers of Lord Balmik the Shudra. The Balmikis too are Shudras or “untouchables”. They are divided into various clusters within the city, the largest of which is near the railway station. Here there are about 10-12 Hindu houses. However, despite being registered as Hindus, it is not always possible to identify them within a society. The men no longer wear the vermillion on their persons, nor the women their mangal suttree or sari . Most of them have dual names, e.g. Barkat Ali and Tara Chand. Others openly practice Christian tenants, but revert to Hindu practices at the time of a festival or a grand pooja (prayer).

One such Hindu woman living in Multan is Shakuntala Devi. Her name is inspired by a character in the Mahabharata, one of the holiest Hindu books. Shakuntala Devi is a classically trained singer who has been regularly appearing on radio and television shows since the late 1980s. Things changed for her after the destruction of the Babri Mosque in 1992. In retaliation the Muslim zealots of Multan destroyed the ancient Prahlad Temple near the mausoleum of Bahauddin Zakariya. Shakuntala Devi says that after the destruction she heard that the mob was now coming towards her, as she was a famous face. “They wanted to burn me,” she says. She escaped with her sister and an old, blind mother. She also adopted a Muslim name after this, which according to her she hates using. She also complains of discrimination at radio and the television stations. This wasn’t the case in the late and early 1990s.

Despite all of these setbacks, the Hindu community in Multan celebrates the event of Holi every year. Waqas Falak, President of the Neengar society, a non-profit organization from Multan, working with the youth of religious and sexual minorities, says that Multan is the home of Holi, and the Hindus of Multan are determined to keep the tradition alive. This is the reason why, despite such a backlash from the religious right in recent years, including the murders of Governor Salmaan Taseer and Minorities Minister Shahbaz Bhatti, hundreds of Hindus gathered at the Christian colony near the WAPDA office for Holi. In Punjab, it doesn’t matter if one is a Hindu or a Christian, as long as one is an “Untouchable”. Falak feels that the growing conversion trend among Hindus in Pakistan is likely to give a major blow to the community in the coming years. Neengar society has filed a case in the Multan High Court to restore the Prahlad Temple and restart pooja here, since it is said to be the birthplace of Holi. On the 22nd of January 2010, they held a prayer outside the Multan Press Club to raise awareness for their cause, but Falak feels that they didn’t get the kind of response they were expecting. “The media portrayed a different message than the one intended by us,” says Falak. Every year for Holi, Falak invites his Muslim friends to participate with Christians and Hindus for Holi. Media representatives also are not spared from the heady mix of color and water.

This year Holi was celebrated on the 18th and 19th of March in Multan, whereas in the rest of the province it was celebrated on the 19th and 20th. It was a success: untoward incidents were avoided, not counting the severe bruises and a few minor fractures that were suffered after a fall from the human pyramid. Young men and women threw colors and water on each other all day. They danced to the dhol and traveled between different temples. Muslims from the neighborhood stared at them, while their children got scared. But the devotees and their friends continued to walk on the streets, reveling. However, given the sharp rise in fundamentalism in Pakistani society, and especially in Punjab, it is likely that festivals like these, which are deeply rooted in the cultural life of this area, will disappear, and the small freedom to celebrate these events that these people enjoy at the moment will be taken away.

Haroon Khalid is the Coordinator for the Minority Project of ‘The Citizens Archive of Pakistan’ (CAP)
Photos: Courtesy The Citizens Archive of Pakistan (CAP). Taken by Maryam Altaf and Samra Noori

बंगलादेशी घुसपैठ कितना खतरनाक ?

भारत की स्वतंत्रता के उपरान्त से ही जिस प्रकार विभिन्न देशों से लोग यहां आये उनमें से अनेक तो शरणार्थी के रूप में थे और अनेक चोरी छिपे घुसपैठिये थे। इससे भारत में जहां जनसंख्या में असंतुलन उभरा वहीं देश में अनेक प्रकार की समस्याएं खडी हो गईं। गत दस वर्षों में बांग्लादेश से लगभग 5.8 करोड की एक बडी आबादी ने भारत में अवैध रूप से घुसपैठ कर ली है जिससे देश में अनेक सीमावर्ती जिले इन घुसपैठियों के लगभग कब्जे में ही आ गये है। परन्तु सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि देश के तथाकथित गैर साम्प्रदायिक राजनीतिक नेता इन अवैध घुसपैठियों की बांग्लादेश में वापसी के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं तथा जो राजनेता इनको वापिस भेजने की मांग करते हैं उनको साम्प्रदायिक कह कर गाली दी जाती है ।अब भारत की एकता व अखण्डता भी खतरे में पडती जा रही है । बढ़ती घुसपैठ व बढती जनसंख्या के असंतुलन से देश की आंतरिक सुरक्षा भी खतरे में पड गई है। देश को बाह्य आक्रमण से बचाने के लिए देश की सम्पूर्ण जनता जाति, बिरादरी, मजहब व पंथ को छोड कर एकजुट हो जाती है लेकिन आंतरिक आक्रमण-घुसपैठ होने से आंतरिक असुरक्षा उत्पन्न हो जाती है जिसको सामान्य जन के साथ-साथ हमारे राजनेता भी गम्भीरता से नहीं लेते है। इससे आतंकवाद को शरण मिल जाती है। बढते आतंकवाद ने अब तक कई लाख लोगों को लील लिया है वहीं अरबों रुपये की राष्ट्र की सम्पत्ति को हानि पहुंची है एवं देशवासी भी एकजुट होकर इस आतंकवाद से लड़ने में स्वयं को तैयार नहीं कर पाते हैं ।भारत ने स्वतंत्रता के अपने साठ साल के जीवन में पांच प्रमुख युध्द झेले है जिनमें हमारे रणबांकुरों ने दुश्मनों के दांत खट्टे किये है, परन्तु युध्दोपरांत वार्ता की मेज पर दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति के अभाव व अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीतिक दुष्प्रवृति व मानसिकता के कारण भारत का जीता हुआ युध्द भी सदैव पराजित होता रहा है। लगभग वैसी ही स्थिति बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ को लेकर हमारे राजनीतिक दलों की हो रही है। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने तो भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की कुल संख्या ही घटा कर 15 से 20 लाख बतायी है जिसे विपक्ष ने लोकसभा में सफेद झूठ बताया है। दिल्ली में ही विभिन्न क्षेत्रों में लगभग पांच लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए निवास करते हैं। मुम्बई, कोलकाता तथा पश्चिमी बंगाल के विभिन्न हिस्सों में राजनेताओं की कृपा दृष्टि से तीस लाख से अधिक बांग्लादेशी बसे हुए हैं। असम के कई जिलों में इन घुसपैठियों के कारण आबादी में (भारतीय व विदेशी घुसपैठियों के बीच) संतुलन का खतरा पैदा हो गया है। राष्ट्रवादी शक्तियां इन अवैध घुसपैठियों से देश में बढ़ते हुए खतरे को लेकर चिन्तित रहती है। परन्तु पूर्वोत्तर राज्यों के राजनेता एकदम से आंख मूंदे हुए हैं । समूचे भारत में लगभग 5.8 करोड बांग्लादेशी निवास करते हैं जिनके कारण भारत में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक (खाद्यान्न सहित) तानाबाना तहस-नहस हो रहा है। देश की एकता व अखंडता निरन्तर खतरे में पडती जा रही है सो अलग।यह कई बार साबित हो चुका है कि मुस्लिम आतंकवादी पकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश के लोगों व जमीन का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं । पाकिस्तान से प्रशिक्षित आंतकवादी बांग्लादेश के रास्ते भारत में प्रवेश कर जाते हैं । बांग्लादेश से भारत में आ रहे बांग्ला घुसपैठिए महज रोजी रोटी के लिए भारत की सीमाओं का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। भारत में पकडे गये आतंकवादियों से खुलासा हुआ है कि उन्होंने बांग्लादेश की कई बार यात्रा की है। हमारे राजनेताओं के दब्बूपन और सत्ता के लिए वोट बैंक की राजनीति ने राष्ट्र को एक गम्भीर खतरे की ओर बढा दिया है।केन्द्र सरकार की ढिलाई के कारण प्रतिदिन 12,000 बांग्लादेशी घुसपैठिए अवैध रूप से भारत की सर-जमीन पर दाखिल हो जाते हैं। भारतीय सुरक्षा बलों के कुछ भ्रष्ट सिपाहियों व अधिकारियों को मात्र हजार पांच सौ रुपये देकर बांग्लादेशियों को भारत की सीमा में चुपचाप दाखिल करवा दिया जाता है। भारत में घुसे इन अवैध घुसपैठियों को फिर भारतीय राजनेताओं का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो जाता है तथा भारत में रहने के लिए आवश्यक सभी प्रपत्र फर्जी रूप से तैयार करवा दिये जाते हैं। अवैध घुसपैठियों के कारण भारत के मूल नागरिकों के काम धन्धे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं ।भारत में बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सरकार को दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रारम्भ में दो काम करने चाहिए-अवैध रूप से भारत में रहने वालों को वापस खदेडा जाए तथा बांग्लादेश की पूरी सीमा को कंटीले लोहे के तारों से सील किया जाए वरना तो भारत का एक बडा हिस्सा भारत से पृथक हो जायेगा।सन् 1800 में अफगानिस्तान व ईरान भारत के ही हिस्से थे किन्तु विदेशी आक्रमणकारियों से उत्पन्न हुए आतंक के कारण ही यह हिस्सा भारत से अलग हो गया। कश्मीर में फैलता आतंकवाद व 1960 से शुरू हुआ माओ आतंक भारत की आंतरिक सुरक्षा को भेदने का निरन्तर प्रयास कर रहा है। 21 वीं शताब्दी में विश्व में दो बडे आतंकवादी हमले हुए है। अमेरिका के पैंटागन और वर्ल्ड सेंटर पर हुआ हमला जिसने अमेरिका जैसी महाशक्ति को हिला कर रख दिया और दूसरा हमला विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत की संसद पर किया गया जिससे पाक प्रायोजिक आतंकवाद बेनकाब हुआ । 1971 में हमारे वीर सैनिकों ने अपना खून बहा कर जिस बांग्लादेश का निर्माण किया वही आज भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।5.8 करोड से अधिक बांग्लादेशी भारत की संस्कृति, आंतरिक सुरक्षा व रोजगार में सेंध मार रहे हैं वहीं प्रतिदिन 3,90,000 कुंतल खाद्यान्न चट कर जाते है। परन्तु अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण में तल्लीन हमारे राजनेता इस महत्वपूर्ण समस्या को गम्भीरता से नहीं ले रहे है तथा घुसपैठियों से उत्पन्न हुआ रोग अब नासूर बन चुका है जिसका एक बड़ा ऑपरेशन शीघ्र अतिशीघ्र करना आवश्यक हो गया है। जिसमें बांग्लादेश की सीमा पर 100 प्रतिशत तार बंदी शामिल है।