Thursday, December 6, 2012

नास्तिक कैसे होते हैं ?



डॉ0 संतोष राय

सामान्यतः जो व्यक्ति ईश्वर , परलोक ,और कर्म फल के नियम पर विश्वास नहीं करता उसे नास्तिक कहा जाता .चूँकि बौद्ध और जैन ईश्वर को नहीं मानते इसलिए अज्ञानवश हिन्दू उनको नास्तिक कह देते हैं .यद्यपि बौद्ध और जैन कर्म के सिद्धांत को मानते हैं .और पाप पुण्य पर विश्वास करते हैं .लेकिन जो लोग निरंकुश होकर सिर्फ भौतिकतावाद और अपना सुख और स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं , वास्तव में वही नास्तिक होते हैं .ऐसे लोगों मान्यता एक प्रसिद्द कहावत से समझी जा सकती है ,
" लूटो खाओ मस्ती में , आग लगे बस्ती में "

ऐसे लोग सभी मर्यादाएं , परंपरा ,नियम और लोक लज्जा की परवाह नहीं करते .भले देश और समाज बर्बाद हो जाये .भगवान बुद्ध और महावीर के समय ऐसे ही विचार रखने वाला एक व्यक्ति चार्वाक था , जिसके लाखों अनुयायी हो गए थे , उसके विचारों को ही चार्वाक दर्शन कहा जाता है .

1-चार्वाक दर्शन

चार्वाक दर्शन एक भौतिकवादी नास्तिक दर्शन है। यह मात्र प्रत्यक्ष प्रमाण को मानता है तथा पारलौकिक सत्ताओं को यह सिद्धांत स्वीकार नहीं करता है। यह दर्शन वेदबाह्य भी कहा जाता है।
वेदवाह्य दर्शन छ: हैं- चार्वाक, माध्यमिक, योगाचार, सौत्रान्तिक, वैभाषिक, और आर्हत। इन सभी में वेद से असम्मत सिद्धान्तों का प्रतिपादन है।

चार्वाक प्राचीन भारत के एक अनीश्वरवादी और नास्तिक तार्किक थे। ये नास्तिक मत के प्रवर्तक वृहस्पति के शिष्य माने जाते हैं। बृहस्पति और चार्वाक कब हुए इसका कुछ भी पता नहीं है। बृहस्पति को चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र ग्रन्थ में अर्थशास्त्र में भी उल्लेख किया है ."सर्वदर्शनसंग्रह "में चार्वाक का मत दिया हुआ मिलता है  पद्मपुराण में लिखा है कि असुरों को बहकाने के लिये बृहस्पति ने वेदविरुद्ध मत प्रकट किया था

2-भोगवाद ही नास्तिकता है

भोगवाद ,चरम स्वार्थपरायण मानसिकता और अय्याशी ही नास्तिक होने की निशानी है , चाहे ऐसे व्यक्ति किसी भी धर्म से सम्बंधित हों .चार्वाक की उस समय कही गयी बातें आजकल के लोगों पर सटीक बैठती हैं ,चार्वाक ने कहा था ,

न स्वर्गो नापवर्गो वा नैवात्मा पार्लौकिकः
नैव वर्नाश्रमादीनाम क्रियश्चफल्देयिका .

अर्थ -न कोई स्वर्ग है ,न उस् जैसा लोक है .और न आत्मा ही पारलौकिक वस्तु है .और अपने किये गए सभी भले बुरे कर्मों का भी कोई फल नहीं मिलता अर्थात सभी बेकार हो जाते हैं .
यावत् जीवेत सुखं जीवेत ऋणं कृत्वा घृतं पीबेत
भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः .
अर्थात-जब तक जियो मौज से जियो और कर्ज लेकर घी पियो मतलब मौज मस्ती करो
कैसी चिंता, शरीर के भस्म हो जाने के बाद फिर वह वापस थोड़े ही आती है।
"पीत्वा पीत्वा पुनः पीत्वा यावतपतति भूतले , पुनरुथ्याय वै पीत्वा 
पुनर्जन्म न विद्यते .
अर्थ -पियो ,पियो खूब शराब पियो ,यहाँ तक कि लुढ़क कर जमीन पर गिर जाओ . और होश में आकर फिर से पियों .क्योंकि फिरसे जन्म नही होने वाला .
वेद शाश्त्र पुराणानि सामान्य गाणिका इव, मातृयोनि परित्यज विहरेत सर्व योनिषु .
अर्थ -वेद , और सभी शास्त्र और पुराण तो वेश्या की तरह हैं .तुम सिर्फ अपनी माँ को छोड़कर सभी के साथ सहवास कर सकते हो .
3-यूनानी नास्तिक
भारत की तरह यूनान (Greece ) भी एक प्राचीन देश है ,और वहां की संस्कृति भी काफी समृद्ध थी .वहां भी नास्तिक लोगों का एक बहुत बड़ा समुदाय था .जिसे एपिक्युरियनिस्म (Epicureanism)कहा जाता है .जिसे ईसा पूर्व 307 में एपिक्युरस (Epicurus)नामके एक व्यक्ति ने स्थापित किया था .ग्रीक भाषा में ऐसे विचार को "एटारेक्सिया (Ataraxia Aταραξία )भी कहा जाता है .इसका अर्थ उन्माद , मस्ती ,मुक्त होता है .इस दर्शन(Philosophy ) का उद्देश्य मनुष्य को हर प्रकार के नियमों , मर्यादाओं .और सामाजिक . कानूनी बंधनों से मुक्त कराना था .ऐसे लोग उन सभी रिश्ते की महिलाओं से सहवास करते थे . जिनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाना पाप और अपराध समझा जाता था .

ऐसे लोग जीवन को क्षणभंगुर मानते थे .और मानते थे कि जब तक दम में दम है हर प्रकार का सुख भोगते रहो .क्योंकि फिर मौका नहीं मिलेगा .जब इन लोगों को स्वादिष्ट भोजन मिल जाता था तो यह लोग इतना खा लेते थे कि इनके पेट में साँस लेने की जगह भी नहीं रहती थी . तब यह लोग उलटी करके पेट खाली कर लेते थे .स्वाद लेने के लिए फिर से खाने लगते थे .

4-असली नास्तिक सेकुलर

सेकुलर प्राणियों की एक ऐसी प्रजाति है ,अनेकों प्राणियों गुण पाए जाते हैं .गिरगिट की तरह रंग बदलना , लोमड़ी की तरह मक्कारी ,कुत्तों की तरह अपने ही लोगों पर भोंकना ,अजगर की तरह दूसरों का माल हड़प कर लेना .और सांप की तरह धोके से डस लेना .इसलिए ऐसे प्राणी को मनुष्य समझना बड़ी भारी भूल होगी . ऐसे लोग पाखंड और ढोंग के साक्षात अवतार होते हैं .दिखावे के लिए ऐसे लोग सभी धर्मों को मानने का नाटक करते हैं, लेकिन वास्तव में इनको धर्म या ईश्वर से कोई मतलब नहीं होता . अपने स्वार्थ के लिए यह लोग ईश्वर को भी बेच सकते हैं .ना यह किसी को अपना सगा मानते है .और न कोई बुद्धिमान इनको अपना सगा मानने की भूल करे .

वास्तव में आजकल के सेकुलर ही नास्तिक हैं .बौद्ध और जैन नहीं .मुलायम सिंह , लालू प्रसाद ,दिग्विजय सिंह ,और अधिकांश कांगरेसी सेकुलर- नास्तिक है .

http://en.wikipedia.org/wiki/C%C4%81rv%C4%81ka

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खतना कराना शैतान की चाल है !



डॉ0 संतोष राय

वैसे तो सभी मुसलमान मानते हैंकि इंसान को अल्लाह ने बनाया है.और उसका अकार,रूप संतुलित और ठीकठाक बनाया है .उसे किसी तरह की कमी नहीं रखी.और यह भी दावा करते हैं कि अल्लाह ने कुरआन में सारी बातें खोल खोल कर साफ़ बता दी हैं.लेकिन जब उनसे खतना के बारे में पूछा जाता है ,तो वे बेकार के बहाने करने लगते हैं.एक व्यक्ति ने जब इसके बारे में सवाल किया तो इम्पेक्ट उर्फ़ सलीम ने कहा कि अप फल को छीलकर क्यों खाते हैं.हमने कहा अगर अल्लाह को छिला हुआ फल पसंद है तो फल का नाम भी बता देते ?लेकिन मेरा मुसलमानों से सवाल है कि वे एक भी आयत बताएं जिसमे खतना का हुक्म हो .या वे बता दें कि मुहम्मद ने कब खतना कराई थी ?.,इसकी कोई हदीस बता दें?
 अब हम मुख्य विषय पर आते हैं कि यह अल्लाह का हुक्म नहीं !!

1 -अल्लाह ने इंसान को उचित रूप में बनाया
"हमने तुम्हें बनाया तो ,ठीक अनुपात और आकार में बनाया और इस प्रकार की रचना बनाई जैसी होना चाहिए .सूरा अल इनफितार 82 :7 -8
"तुम क्यों नहीं मानते कि हमने ही तुम्हें पैदा किया और तुम्हारा आकार देने वाले हम हैं ,या तुम आकार देने वाले हो .सूरा अल वाकिया -56 :57
"हमने तुम्हारा अकार बनाया और अच्छा आकार बनाया .सूरा अल मोमिनीन -40 :64
"अल्लाह ने जो भी चीज बनाई व्यर्थ नहीं बनाई .सुरा आले इमरान -3 :191
"हमने इन्सान को अच्छे से अच्छी स्थिति में बनाया .सूरा अत तीन -95 :3

2 -अल्लाह के दिए आकार को बदलना शैतान की चाल है -

"शैतान ने अल्लाह से कहा ,मैं तेरे बन्दों को बहकाऊँगा ,उनको वासना के मायाजाल में फंसऊँगा ,फिर वे अपने चौपायों के कान फडवाएंगे और अलाह की रचना में बदलाव करेंगे ,और पशुओं को देवताओं के नाम छोड़ देंगे ,ऐसा करने वाले शैतान के मित्र हैं "सूरा अन निसा -4 :119

इस आयत की तफ़सीर में "अल्लाह की रचना "में बदलाव का उदहारण दिया गया है जैसे -नसबंदी करना .किसी को बाँझ करना ,परिवार नियोजन करना ,आजीवन ब्रह्मचारी रहना ,और किसी को हिजड़ा बनाना है .इसी आयत कि बदौलत मुसलमान परिवार नियोजन नहीं करते हैं .इसे गुनाह मानते है .

3 -खतना कराना यहूदिओं की नक़ल है -

वैसे तो मुसलमान यहूदिओं को रोज गालियाँ देते हैं .लेकिन उनकी नक़ल करके छोटे छोटे बच्चों की खतना कर देते है .जब वह नादान होते है .कुरआन में ऐसा कोई आदेश नहीं है ,यह बाईबिल का आदेश है -
" खुदा ने कहा तू और तेरे बाद तेरे वंशज पीढी दर पीढी हरेक बच्चे का खतना कराये,और उनके लिंग की खलाड़ी काट दे   जो तेरे   में पैदा हो या जिसे मोल से खरीदा हो सबका खतना कर
"बाइबिल -उत्पत्ति अध्याय -17 :9 से 14

 4 -मूसा और उसके पुत्रों का खतना नहीं हुआ

" मिस्र निकालने बाद जितने लोग पैदा हुए किसी का खतना नहीं हुआ -यहोशु-5 :5
"अपना नहीं बल्कि अपने ह्रदय का खतना करो "बाइबिल व्यवस्था -10 :16

यहाँ तक तो लड़कों के खतना की बात है .लेकिन मुहम्मद ने अल्लाह से आगे बढ़ कर औरतों के खतना का हुक्म दे डाला

5 -औरतों का खतना -female genital mutilation

यह मुहमद के दिमाग की खुराफात है .इसका कुरान में कोई जिक्र नहीं है चूँकि यहूदी लड़कों का खतना करते थे मुहम्मद उसका उलटा करा चाहता था .उसे यहूदिओं से नफ़रत थी .उसने कहा -
"रसूल ने कहा कि काफिर और यहूदी जैसा करते हैं ,उम उसका उलटा करो .
बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 780

एक दिन मदीना में उम्मे अत्तिया लड़किओं की खतना करने जा रही थी ,मुहम्मद ने उस से कहा कि लड़की की योनी को गहराई से मत छीलो .ऐसा न हो कि वह उसके पति को अच्छी न लगे -अबू दाऊद-किताब 41 हदीस 5149 ,5151 और 5152

"रसूल ने कहा कि लड़किओं की सिर्फ भगनासा clitoris और आस पास के भागोस्ष्ठ छील दो बुखारी जिल्द 7 किताब 72 हदीस 779

6 -महिला खतना में क्या होता है

भगनासा को बिलकुल निकाल देना -removal clitoris भगोष्ठ को छील देना या काट देना trimming of labia majora .और cutting

महिला खतना अरब में अधिक है .लेकिन भारत के मुसलमान भी अपनी औरतो की खतना इस लिए करा देते है कि उनकी औरतें किसी गैर मुस्लिम के साथ न भाग जाए ,क्योंकि सिर्फ मुस्लिम ही ऎसी बर्बाद और बिद्रूप औरत को रख सकता है.
( नोट -यह लेख भंडाफोडू ब्लॉग में 30 अगस्त 2010 को प्रकाशित हुआ था . जिसमे हमने जब सलीम नामके जकरिया समर्थक से खतना के बारे में कुरान का आदेश पूछा था तो उसे सांप सूँघ गया था ,इसलिए यह लेख फिर से प्रकाशित किया है . ताकि लोग मुल्लों की असलियत समझ सकें .और जो लोग कुरान के आदेश के बिना खतना करते हैं उन्हें काफिर क्यों नहीं माना जाये )

http://sheikyermami.com/2009/09/30/are-you-a-sponsor-of-female-genital-mutilation/

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अल्‍लाह अपने रसूल और उनकी 11 पीढि़यों को नही बचा सका


सत्‍यवादी

प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय

अल्लाह अपने रसूल और उनकी ग्यारह पिढियो को नही बचा सके.सभी की ह्त्या की गयी .तो हम मुश्किल मे होगे तो कैसे बचायेगा. -मुहम्मद का वंश बर्बाद हो गया ?.सभी का नाम व
विवरण यहा दिया जा रहा है...

अल्लाह ने मुहम्मद को सिर्फ एक ही लड़का दिया था .जिसका नाम मुहम्मद ने इब्राहीम रखा था .लेकिन वह कुछ समय के बाद मर गया था .मुहम्मद की पहिली पत्नी खदीजा से सिर्फ एक लड़की फातिमा हुई थी .जिसके बारे में मेरी पिछली पोस्ट में दिया गया है अगर हम फातिमा को मुहम्मद का वंशज मानें तो आप देखेंगे कि फातिमा के वंश में दस पुश्तों तक कोई भी अपनी आयु पूरी नहीं कर सका .सभी की ह्त्या की गयी और सब दुखदायी मौत मारे गए .देखिये विवरण -

1-अली -पिता अबूतालिब ,यह मुहम्मद के दामाद और फातिमा के पति थे इनके ही पुत्र हसन और हुसैन थे सन 661में इनको अब्दुल रहमान नामके आदमी ने जहर बुझा खंजर मार कर ह्त्या की थी .इनका मजार नजफ़ में है 

2- इमाम हसन -खलीफा मुआविया के कहने पर हसन की औरत ने हसन को जहर देकर मारा था सन 680 में इनकी मौत हुई और इनको मदीना में जन्नतुल बाक़ी में दफन किया गया 

3- इमाम हुसैन -इनको कर्बला के मैदान में यजीद की फौजों ने इनके परिवार के 72 लोगों के साथ क़त्ल कर दिया था .इनकी कब्रें कर्बला में हैं आज भी शिया इनका मातम करते हैं

4-जैनुल आबीदीन -यह हुसैन के पुत्र थे 659 में खलीफा अल वलीद के कहने पर जहर देकर मारा गया था.इनकी कब्र मदीना में है .

5-मुहम्मद वाकिर या अली -इनको भी 732 में इब्राहीम इब्ने अब्दुल सत्तार ने जहर देकर मारा था .ह्त्या का आदेश खलीफा हिशाम इब्ने अब्दे मालिक ने दिया था .इनकी कब्र मदीना में है .

6-जाफर सादिक -पिता का नाम मुहम्मद इसे भी 765 में खलीफा मंसूर के हुक्म से जहर देकर मारा गया था .कब्र मदीना में है 

7- मुसा काजिम- पिता जाफर -इसे भी बगदाद में खलीफा हारून अल रशीद ने कैद कर लिया था ,और 799 में जहर देकर मार दिया था .कब्र काजियान बगदाद में है 

8- अली इब्ने मूसा -इसको भी खलीफा अल मामून ने 817 में तूस नाम की जगह में जहर देकर ह्त्या की थी.इसकी कब्र मशहद में है 

9-मुहम्मद इब्ने अली तकी-इसकी ह्त्या भी खलीफा मुतास्सिम के कहने से इसकी औरत ने की थी.

10-हसन इब्ने मुहम्मद- इसे भी खलीफा मुताम्मिद के आदेश से 874 में जहर देकर मारा गया था 

इस विवरण से आप खुद समझ सकते हैं कि अगर मुहम्मद अल्लाह का इतना प्यारा था कि लोगों को दोजख से बचा सके तो अल्लाह ने उसके वंशजों को क्यों नही बचाया .एक भी फ़रिश्ता नहीं भेजा न कोई चमत्कार ही किया.
शायद मुहम्मद को आभास हो गया था कि उसके कर्मों का फल उसकी औलादों को भुगतना पडेगा .इसी लिए उसने मुसलमानों को कहा था कि वे हरेक नमाज के बाद उसकी औलादों के लिए दुआ करते रहें .इस दुआ को दरूद कहा जाता है .यह नमाज का जरूरी अंग है.

मुझे पूरा यकीन है ,कि इस तारीखी हकीकत को जानकार जाकिर नाइक की शिकायत दूर हो गयी होगी कि कोई हवाला नहीं दिया जाता है .इस्लाम की सारी तारीख की किताबों में यह हवाले मिल जायेंगे.यह भी कहा गया था कि आज भी फातिमा के वंशज हैं ,लेकिन आज जो खुद को सय्यद बताकर खुद को फातिमा के वंशज होने का दावा करते वे सब या तो इस्माइली हैं या बोहरा या इशना अशरी ,जिन्हें सुन्नी काफिर तक कह देते हैं अजमेर के खादिम टीका भील की औलादें हैं और खुद को सय्यद बताते हैं .



दूसरी बात यह है कि अगर कोई हिन्दू की तारीफ़ करे ,या शायरी करे तो दोजखी कैसे हो सकता है .बताये गए मुहम्मद के वंशजों की हत्याएं जिन लोगों ने की थी उनको मुसलमान रजी अल्लाहू अन्हु कहकर आदर करते हैं क्या यह हत्यारे जन्नत में ,और सिर्फ शायरी करने से दोजख में चले जायेंगे.मेरा सिर्फ यही सवाल है ,जो अल्लाह अपने प्यारे नबी की औलादों की हिफाजत नहीं कर सका वह मुसलमानों को क्या बचा सकेगा .जबकी ह्त्या करने वाले कलमा पढ़ने वाले ,और सहाबा भी थे .इसके बारे में जल्द ही पोस्ट करेंगे .इंतज़ार करिए


Wednesday, December 5, 2012

श्रीराम जन्‍मभूमि की एक इंच जमीन बाबरी मस्जिद के लिये नही छोड़ेंगे-डॉ0 संतोष राय



                                                           
                               डॉ0 संतोष राय

नई दिल्ली, 5 दिसंबर। अखिल भारत हिन्दू महासभा उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ0 संतोष राय ने आज अपने लिखित वक्तव्य में कहा कि अखिल भारत हिन्दू महासभा अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि  का मुस्लिमों को मिले एक हिस्से को प्रभु श्री रामश्री राम भक्तों व पूरे हिन्दू समाज के साथ बहुत बड़ा अन्याय समझती है। हिन्दू महासभा श्रीराम जन्मभूमि के बगल में बाबरी मस्जिद के लिये एक इंच जमीन देने का पुरजोर विरोध करती है।


ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा गत 30 सितंबर वर्ष 2010 में सुनाए गए फैसले के खिलाफ अखिल भारत हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। पीठ ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को हिंदू-मुस्लिम में तीन हिस्सों में बांट दिया था। इसमें एक हिस्सा मुस्लिमों के पास है जबकि दो हिस्से हिंदू संगठनों को मिले हैं।



आगे डॉ0 संतोष राय ने कहा कि  बाबर के नाम की मस्जिद अयोध्या क्या पूरे भारत में कहीं भी बनाये जाने का हिन्दू महासभा पूर्ण विरोध करेगी। डॉ0 संतोष राय ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि बाबर एक इस्लामिक जेहादीआक्रमणकारी थाउसके नाम की मस्जिद का समर्थन करना जेहादी मानसिकता व आतंकवाद को बढ़ावा देना है। जो देश के एकता और अखण्डता के लिये विनाशकारी होगा।


                डॉ0 संतोष राय ने सांसद असादुद्दीन अवेसी की निंदा करते हुये कहा अवेसी जैसे मुस्लिम नेता बाबरी मस्जिद के नाम पर आज के मुस्लिमों के दिमाग में जेहाद का जहर भर रहे हैंवे भारत के मुसलमानों को हजारों साल पीछे ले जाकर गंदी जेहादीतालीबानी मानसिकता के दलदल में झोंक देना चाहते हैं। डॉ0 संतोष राय ने सांसद अवेसी के आतंकी मानसिकता का कठोर शब्दों में निंदा करते हुये कहा कि ऐसे नेता देश की एकता और अखण्डता पर महाकलंक हैं।


                डॉ0 संतोष राय ने कहा कि इतिहास प्रमाणों के साथ भरा पड़ा है कि बाबर ने जेहादी मानसिकता से प्रेरित होकर प्रभु श्रीराम मंदिर को गिरायाजिसकी रक्षा के लिये हजारों हिन्दू योद्धाओं नें  अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। यदि असादुद्दीन अवेसी जैसे लोग मुसलमानों को इस तरह से गलत दिशा में ले जायेंगे तो परिणाम भयावह हो सकता है।


                राष्ट्रवादी नेता डॉ0 संतोष राय ने कहा कि बाबर ने श्रीराम मंदिर तोड़कर मस्जिद निर्माण कराया जो पूरी तरह से गलत व इस्लाम के सिद्धांतों के विपरीत था। अब पुनः मंदिर के बगल में बाबरी मस्जिद के निर्माण का कोई प्रश्न ही नही उठता। आगे उन्होने कहा कि देश में शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिये श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बगल में मस्जिद का निर्माण कदापि नही होना चाहिये। श्रीराम मंदिर परिसर का एक हिस्सा मुसलमानों को मिलना हिन्दुओं के साथ बहुत बड़ा धोखा हैजिसे हिंदू समाज किसी भी कीमत पर सहन नही करेगा।


हिन्दूवादी नेता डॉ0 संतोष राय ने पुरातत्व सर्वेक्षण की प्रशंसा करते हुये कहा कि भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण अपने कार्य को बहुत ईमानदारी व निष्पक्षता से निभाया है जिसकी हमें प्रशंसा व धन्यवाद करनी चाहिये।


                अखिल भारत हिन्दू महासभा के कद्दावर नेता डॉ0 संतोष राय ने उन समस्त हिन्दू बलिदानियों को नमन किया जो श्रीराम मंदिर के बचाने में अपने प्राणों की आहुति दे दिये हैं। डॉ0 संतोष राय ने कहा कि यदि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिये पुनः अपने प्राणों को न्योछावर करना होगा तो हम कदापि पीछे नही हटेंगे।


हिन्दू रत्न डॉ0 संतोष राय ने कहा कि श्रीराम मंदिर का एक हिस्सा मुस्लिमों को देना  न्याय व धर्म निरपेक्षता की हत्या  हैऐसे अन्याय को हिंदू समाज किसी भी कीमत पर सहन नही करेगा। बाबरी मस्जिद का निर्माण करने वालों को पाकिस्तान चले जाना चाहिये। ऐसे लोग कभी देशभक्त नही हो सकते।

Monday, December 3, 2012

पाकिस्‍तान में मंदिर ढहाये जाने की हिंदू महासभा ने की निंदा





अखिल  भारत हिन्‍दू महासभा केन्‍द्रीय उच्‍चाधिकार  समिति  के अध्‍यक्ष  डॉ0  संतोष   राय ने कराची पाकिस्‍तान  में 100 साल पुराना मंदिर को ढहाये जाने पर पाकिस्‍तान सरकार की तीव्र भर्त्‍सना की है। ज्ञात हो कि कराची  पाकिस्तान में कराची की एक अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद एक वहां के बिल्डर द्वारा आनन-फानन में सरकारी मदद से सौ साल पुराने मंदिर को गत शनिवार ढहा दिया गया,  जो वहां के सरकार के हिन्‍दुओं के प्रति अ‍सहिष्‍णुता को  दर्शाता है।


हिन्‍दू महासभा नेता डॉ0 संतोष  राय ने पाकिस्‍तान सरकार को लताड़ते हुये आगे कहा कि  कराची के सोल्जियर बाजार में विभाजन से पहले का अत्‍यंत पुराना श्रीराम मंदिर था, इस मंदिर से  लाखों हिन्‍दुओं की आस्‍था थी। ऐसे प्राचीन मंदिर को तोड़ा जाना सत्‍य सनातन धर्म का अपमान है।

डॉ0 संतोष राय ने आगे पाकिस्‍तानी शासन-प्रशासन की कड़ी निंदा करते हुये बताया कि मंदिर ढहाने के  साथ-साथ वहां का बिल्डर जिससे वहां की सरकार व पुलिस मिली हुयी थी,  ने गत शनिवार को निकट के  कई मकान तोड़ दिए। परिणामस्वरूप करीब 40 लोग बेघर हो गए, जिनमें से अधिकांशत: हिन्दू हैं।

  डॉ0 संतोष राय ने भारत सरकार की चुप्‍पी की कड़ी निंदा की और आगे कहा कि पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यक हिन्‍दुओं के साथ इतना अत्‍याचार  होने के बावजूद यहां की सरकार अल्‍पसंख्‍यक मुसलमानों  के वोट के लालच के  कारण ऐसे अत्‍याचारों पर मौन  साधे रहती है। मगर कोई मुस्लिम आतंकी पकड़ा जाता है तो हमारे प्रधानमंत्री को पूरी रात नींद ही नही आती। डॉ0  राय  ने भारत के हिन्‍दुओं  को  ऐसे धर्मनिपेक्ष सरकार व उसका समर्थन करने वाली  धर्म निरपेक्ष  पार्टियों से सावधान रहने को  कहा।

वरिष्‍ठ  नेता डॉ0 संतोष राय ने कहा कि मंदिर  को ऐसे समय तोड़ा गया जब मंदिर का मामला सिंध हई कोर्ट में चल रहा  था। उन्‍होंने कहा कि मंदिर में भगवान के श्रृंगार में  जो  सोने के आभूषण आदि थे, वहां के पुलिस-प्रशासन ने उसे उतरवा ले गयी। साथ में देवी-देवताओं का भी अपमान किया।
हिन्‍दूवादी राष्‍ट्रवादी नेता  डॉ0 संतोष राय ने अंर्तराष्‍ट्रीय जगत से आह्वान किया है कि पाकिस्‍तान को आतंकी राष्‍ट्र का दर्जा दें साथ में  विश्‍व स्‍तर पर पाकिस्‍तान का बहिष्‍कार  करें। 

भारत मां के वीर सपूत खुदीराम बोस



डॉ0 संतोष राय





भारत माता के गगनांचल रूपी आंचल में ऐसे-ऐसे दीप्तिमान नक्षत्र उद्दीप्‍त हुये जो कि न केवल भारत भूमि को बल्कि संपूर्ण धरा को अपने दीप्ति कीर्ति से अवलोकित किया है। ऐसे ही एक भारत माता के वीर सेनानी खुदीराम बोस थे। जिनके अपार जोश ने देश के युवाओं एक ओजस्‍वी ऊर्जा से भर दिया। खुदीराम बोस देश की स्‍वतंत्रता के लिये सिर्फ १९ साल की उम्र में ही बलिदान हो गये। सच्‍चाई यह है कि ऐसे ही वीर जवान क्रांतिकारियों से से देश आजाद हुआ है न कि अहिंसा की ढपली पीटने वाले गांधी जैसे लोगों से। क्‍या अंग्रेज मकड़ी थे जिसे गांधी अपने चरखे की जाल में फंसा लेते। महान् खुदीराम बोस अपने देश के लिये फाँसी के
तख्‍त पर  चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के युवा क्रान्तिकारी देशभक्त थे। मगर एक सच कहानी यह भी है कि खुदीराम से पहले १७ जनवरी १८७२ को ६८ कूकाओं के सार्वजनिक नरसंहार के समय १३ वर्ष का एक बालक भी अपनी आहुति दिया था। वह बीर बालक  जिसका नम्बर ५०वाँ था, जब उसे  तोप के सामने लाया गया, उसने लुधियाना के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर कावन की दाढ़ी  पूरे बल से  पकड़ लिया और तब तक नहीं छोड़ी  जब तक उसके दोनों हाथ को एक निर्मम अंग्रेज ने तलवार से काट नहीं दिये गये अंतत:  उसे उसी तलवार से मौत की नींद सुला दिया गया था।

वीर युवा सेनानी खुदीराम बोस का जन्म ३ दिसंबर १८८९ को पश्चिम बंगाल केमिदनापुर जिले के बहुवैनी नामक गाँव में बाबू त्रैलोक्यनाथ बोस के यहाँ जनम लिया था। उनकी मां अत्‍यंत धार्मिक स्‍वभाव वाल थी जिनका  नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। बालक खुदीराम बोस के हृदय में  देश को स्‍वतंत्र  कराने की ऐसी भावना थी कि वे बहुत कम उम्र में ही पढ़ायी छोड़ कर देश को स्‍वतंत्र कराने के लिये बढ़चढ़ कर हिस्‍सा लेने लगे। इस वीर नौजवान ने देश  पर अत्याचारी सत्ता चलाने वाले ब्रिटिश साम्राज्य का किला ध्‍वस्‍त करने के दृढ़ निश्‍चय से अत्‍यन्‍त  धैर्य पूर्वक प्रथम  बम फेंका और मात्र १९ वें वर्ष में हाथ में भगवद गीता लेकर हँसते - हँसते फाँसी के फन्दे पर चढ़करएक महान् इतिहास को रचा।

खुदीराम रिवोल्यूशनरी पार्टी के सक्रिय सदस्य बने और वन्दे मातरम् लिखी पर्चियां बंटवाने में  बढ़-चढ़ कर हिस्‍सा लेते थे।  १९०५ में बंगाल के विभाजन (बंग - भंग) के विरोध में चलाये गये आन्दोलन में उन्होंने अपनी सक्रिय भूमिका निभाया।

फरवरी १९०६ में मिदनापुर में एक औद्योगिक तथा कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ था। प्रदर्शनी में भारी भीड़ थी। बंगाल के एक क्रांतिकारी सत्येंद्रनाथ द्वारा लिखे सोनार बांगलानामक क्रांतिकारी पत्रक की प्रतियाँ खुदीराम ने इस प्रदर्शनी में खूब बांटी और बंटवायी।  एक पुलिस वाले की नजर उन पर पड़ गयी और वह  उन्हें पकड़ने के लिये भागा । खुदीराम ने इस सिपाही के मुँह पर पूरे जोर से घूँसा मारा, खून की धारा उसके नाक से बह निकली। तत्‍पश्‍चात वे और शेष पत्रक बगल में दबाकर रफूचक्‍कर हो गये। इस मामले पर राजद्रोह के आरोप में सरकार ने खुदीराम पर अभियोग चलाया परन्तु गवाही न मिलने से खुदीराम निर्दोष साबित हुये और जेल से निजात मिल गयी।

६ दिसंबर १९०७ को खुदीराम ने नारायणगढ़ रेलवे स्टेशन पर बंगाल के गवर्नर की ट्रेन पर जबरजस्‍त हमला किया परन्तु गवर्नर बाल-बाल बच गया। सन १९०८ में उन्होंने दो अंग्रेज अधिकारियों वाट्सन और पैम्फायल्ट फुलर पर बम फेंका मगर दैववश वे भी बच निकले। मिदनापुर में युगांतरनाम की क्रांतिकारियों की गुप्त संस्था के माध्यम से खुदीराम क्रांतिकार्य पहले से ही सक्रिय थे।



                               



१९०५ में लॉर्ड कर्जन ने जब बंगाल का विभाजन किया तो उसके महाविरोध में सड़कों पर उतरे अनेकों भारतीयों को उस समय के कलकत्ता के मॅजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने क्रूरतम से क्रूरतम  दण्ड दिया। इसके परिणामस्वरूप किंग्जफोर्ड को पदोन्नति देकर मुजफ्फरपुर में सत्र न्यायाधीश के पद से सुशोभित किया गया। युगान्तरसमिति कि एक गुप्त बैठक में किंग्जफोर्ड को ही मारने का संकल्‍प लिया गया। इस कार्य हेतु खुदीराम तथा प्रफुल्लकुमार चाकी को चुना गया । खुदीरामको एक बम और पिस्तौल उपलब्‍ध करायी गयी। प्रफुल्लकुमार को भी एक पिस्तौल दिया गया। मुजफ्फरपुर में आने पर इन दोनों क्रांतिकारियों ने सबसे पहले किंग्जफोर्ड के बँगले की अच्‍छे तरह से रेकी की । उन्होंने उसकी बग्घी तथा उसके घोडे का रंग पहचान लिया । खुदीराम तो किंग्जफोर्ड को उसके कार्यालय में जाकर अच्‍छी तरह से पहचान आये।

३० अप्रैल १९०८ को ये दोनों किंग्जफोर्ड के बँगले के बाहर घोड़ागाड़ी  से उसके आने की राह तकने लगे । बँगले की पर्यवेक्षण हेतु  वहाँ मौजूद पुलिस के गुप्तचरों ने उन्हें भगाना  भी चाहा परन्तु वे दोनों  ने सही उत्तर देकर वहीं शिकार की ताक में डटे रहे। अंधेरी रात में साढ़े  आठ बजे के आसपास क्लब से किंग्जफोर्ड की बग्घी के समान दिखने वाली गाड़ी  आते हुए देखकर खुदीराम गाड़ी  के पीछे तेजी से दौड़ने लगे। रास्ते में बहुत ही घनघोर  अँधेरा था। गाड़ी  किंग्जफोर्ड के बँगले के सामने ज्‍यों ही पहुंची खुदीराम ने अँधेरे में ही आगे वाली बग्घी पर निशाना साधते हुये जोर से बम फेंका। भारतवर्ष  में इस पहले बम विस्फोट की आवाज उस रात तीन मील तक सुनाई दी जब वहाँ इस घटना की समाचार  ने तहलका मचा दिया। सच्‍चायी यह थी कि खुदीराम ने किंग्जफोर्ड की गाडी समझकर उसे मारने हेतु बम फेंका था परन्तु उस दिन किंग्जफोर्ड थोडी देर से क्लब से बाहर जाने  के कारण बच गया । दुर्भाग्‍य वश गाडियाँ एक जैसी होने के कारण दो यूरोपियन स्त्रियों को अपने प्राण गँवाने पडे। खुदीराम तथा प्रफुल्लकुमार दोनों ही रातों-रात  वहां से भाग खड़े हुये और २४ मील दूर स्थित वैनी रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर  रात बितायी।

अंग्रेज पुलिस ने उनका पीछा किया और वैनी रेलवे स्टेशन पर उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। अपने को पुलिस से घिरा देख प्रफुल्लकुमार चाकी ने खुद को गोली मारकर अपनें प्राणों की  आहुति दे दी  जबकि खुदीराम को गिरफ्तार कर लिया गया। ११ अगस्त १९०८ को उन्हें मुजफ्फरपुर जेल में फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया। मगर इस वीर ने हंसते-हंसते वंदेमातरम् के उद्घोष के साथ अपने प्राणों को भारत माता के कदमों पर न्‍योछावर कर दिया। उस समय खुदीरामबोस मात्र सिर्फ मात्र  १९ साल के थे।

फाँसी के बाद खुदीराम बोस जनता में इतने लोकप्रिय हो गये कि बंगाल के सारे जुलाहे एक खास किस्म की धोती बनाने लगे। बंगाल के राष्ट्रप्रेमियों  के लिये वह वीर शहीद और अनुकरणीय और प्रेरणादायी  हो गया। पूरे बंगाल में कई दिनों तक शोक मनाया गया व कई दिन तक स्कूल, कालेज, अस्‍पताल, दूकान व व्‍यापार सभी बन्द रहे और वीर नौजवान ऐसी धोती पहनने लगे, जिनकी किनारे पर खुदीराम लिखा होता था। ये धोती खुदीराम के शहादत को याद दिलाता था और युवाओं में प्राणार्पण की भावना भरता था।

लेकिन यह अत्‍यंत दु:खद है कि आज ऐसे क्रांतिकारियों को एक षणयंत्र के तहत आतंकवादी कहा जाता है और देश को स्‍वतंत्र कराने का श्रेय सिर्फ गांधी और नेहरू को दिया जाता है मगर सच्‍चाई इससे उलट यह है कि देश को बर्बाद कराने की नींव इन दोनों नेताओं नेहरू और गांधी  ने रखी जिसको आने वाली पीढि़यां  भुगतेगी, और ऐसे नेताओं को इतिहास कभी माफ नही करेगा।

"काफी नहीं केवल जश्न मनाना या सिर्फ झंडे लहराना,
असली वतनपरस्ती है शहीदों को नहीं भुलाना।
जो कुर्बान हुए हैं उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना,
अपने लिए नहीं बल्कि जिंदगी वतन के लिए निभाना।"
वीर हुतात्‍मा खुदीराम बोस के जन्‍मदिन पर  शत्-शत् नमन।

Curtsey: www.kranti4people.com 

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