Friday, June 15, 2012

भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में पाकिस्तान की परोक्ष भूमिका

डॉ0 संतोष राय


वर्तमान राष्ट्रपति के चुनाव को जब दूरदर्शिता के  परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है तो हमें पता चलता है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान परोक्ष रूप से  इस चुनाव के अंदर अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के लिये एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सतही तौर पर तो भारत की राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रपति के चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाती दृष्टिगोचर होती हैं मगर कठपुतलियों के नाच की तरह इन भारतीय राजनीतिक पार्टियों का डोर पाकिस्तान के शासकों के द्वारा संचालित रहता है।


 हाल ही में उत्तर प्रदेश के चुनाव में पाकिस्तान के तथाकथित आईएसआई के एजेंट शाही ईमाम के फतवे पर मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव को भारी बहुमत से भारत के सबसे बड़े प्रांत  का मुख्यमंत्री बना दिया। ज्ञात रहे कि कुछ वर्ष पहले मुलायम सिंह यादव की पाकिस्तान के शासकों के साथ टेलीफोन पर हो रही राष्ट्र विरोधी गुफ्तगू को भारत की इंटेलीजेन्स ब्यूरो के संयुक्त निर्देशक नें मीडिया के द्वारा उजागर किया था।


डॉ0 ए.पी.जे. अब्दुल कलॉम को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी जी नें ऑपरेशन पराक्रम के दौरान कुछ गंभीर राष्ट्र विरोधी आरोपों के मद्देनजर प्रिंसिपल साइंटीफिक एडवायिजर के पद से बर्खास्त किया था। मगर बाद में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की नीति के तहत डॉ0 मुरली मनोहर जोशी जो कि मुलायम सिंह यादव के घनिष्ठ मित्र थे, के कहने पर राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित कर दिया। हमारे देश का भावी प्रधानमंत्री भी आईएसआई के एजेंट शाही ईमाम के फतवे पर मुस्लिम वोट बैंक के समर्थन से मुलायम सिंह का 2014 के चुनाव में चुने जाना कोई अजूबा नही होगा। कुल मिलाकर भारत के तीन सर्वोच्च पदों यानिकि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति पर पाकिस्तान की कठपुतलियां ही आसीन नजर आयेंगी। दूसरे शब्दों में भारत का संचालन रिमोट कंट्रोल के द्वारा पाकिस्तान के शासक ही करेंगे। जबकि भारत की मुख्य राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा के नेता अपनी-अपनी भ्रष्टाचार की कमाई को देशी-विदेशी बैंकों में जमा करवाकर हर्षित होते रहेंगे। 


इस खतरनाक खेल को भारतीय राजनीतिक पार्टियां जानते हुये भी पैसे के लालच में नजरअंदाज कर रही हैं। बेहतर है कि भाजपा और कांग्रेस प्रणव मुखर्जी और जसवंत सिंह को क्रमशः राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद पर नियुक्त करके देशद्रोही कलाम और हामिद अंसारी जैसे प्रत्याशियों से देश को निजात दिलायें। इन दोनों पार्टियों का आपस में समझौता पाकिस्तान के खतरनाक मंसूबों पर पानी फेर देगा।

Thursday, June 14, 2012

फ़रिश्ते नहीं परियां कहिये !!

सत्‍यवादी  प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय

वास्तव में मुसलमानों का अल्लाह सर्वशक्तिमान नहीं है बल्कि किसी बादशाह तरह उसे हर काम के लिए नौकरानियों की जरुरत पड़ती है ,जिसे फ़रिश्ता कहा जाता है .फिर भी मुसलमान अल्लाह के साथ फरिश्तों का नाम लेकर शिर्क करते हैं ,
वास्तव में "फ़रिश्ता "फारसी भाषा का शब्द है .कुरान के अनुसार अल्लाह ने फरिश्तों के सामने मनुष्य को मिट्टी से और जिन्नों को आग से बनाया था .अर्थात सृष्टि के समय से पूर्व भी फ़रिश्ते मौजूद थे .लेकिन कुरान में यह नहीं लिखा है कि फ़रिश्ते कब और किस चीज से बनाये गए हैं .फिर भी उन पर ईमान रखने को कहा जाता है यहाँ तक .लोग यह भी नहीं जानते कि फ़रिश्ते पुरुष है ,या स्त्री है .इसी का खुलासा यहाँ पर किया जा रहा है .
इस्लाम में फरिश्तों का इतना बड़ा ऊँचा दर्जा है कि अल्लाह और रसूल के साथ उन पर भी विश्वास करने के लिए कहा गया है .लेकिन लोग बिना किसी तर्क के इस बात को स्वीकार कर लेते है . और इस विश्वास को ईमान(Faith ) कहा जाता है .और अल्लाह के साथ फरिश्तों ,किताबों ,और रसूलों पर इमान रखने को इमाने मुफस्सिल कहा जाता है ,अरबी में इस प्रकार है -
"آمَنْتُ بِاللهِ وَمَلاَئِكَتِه وَكُتُبِه وَرُسُلِه وَالْيَوْمِ الآخِرِ وَالْقَدْرِ خَيْرِه وَشَرِّه مِنَ اللهِ تَعَالى وَالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَ "
I have faith in Allah and His Angels, His Books and His Messengers, and the Day of Judgement and that all good and evil and fate is from Almighty Allah and it is sure that there will be resurrection after death.
इस ईमाने मुफस्सिल में अल्लाह के बाद दुसरे नंबर पर फरिश्तों पर ईमान रखने को कहा है ,और फरिश्तों को अरबी में "मलायकतु" कहा काया है .जिसे लोग अंगरेजी में Angels या Fairy भी कहते हैं .फरिश्तों का काम,उनके बारे में कुरान और हदीसों में यह लिखा है ,(कुरान में यह शब्द 68 बार आया है .)
1-फरिश्तों की संख्या और काम 
वैसे तो फरिश्तों का मुख्य काम अल्लाह की रात दिन बंदगी करना है ,लेकिन वह उन से और भी काम करवाता है ,जैसे कि,
"और वह फ़रिश्ते अल्लाह की बंदगी करने और उसके हुक्म का पालन करने में लगे रहते है "सूरा -अस साफ्फात 37 :165 
"यह तुम्हारे ऊपर जासूसी भी करते हैं ,और तुम जोभी करते हो वह बारीकी से लिखते रहते हैं "सूरा-अल इन्फितार 82 :10 से 12 
"और आदमी के मुंह से जोभी बात निकलती है ,उसे सुनने के लिए ताक में रहते हैं "सूरा -काफ 50 :18 
"अल्लाह लोगों के आगे पीछे फ़रिश्ते लगा देता और जब अल्लाह का आदेश होता है वह उस व्यक्ति की रक्षा करते हैं "सूरा -रअद 13 :11
"मौत से समय तुम्हारे ऊपर मौत का फ़रिश्ता लगा दिया जाएगा जो ,तुम्हें ग्रस्त कर लेगा ,और तुम अल्लाह के पास वापस भेज दिए जाओगे "
सूरा -अस सजदा 32 :11 
"जो नेक लोग जन्नत में जायेंगे तो उनको बधाई देने के लिए हर दरवाजे पर फ़रिश्ते खड़े मिलेंगे "सूरा-रअद 13 :23 
"अल्लाह का सिंहासन उठाने के लिए आठ फ़रिश्ते उसे किनारों से पकड़ कर रखेंगे "सूरा -हाक्का -69 :17 
"कठोर लोगों को काबू करने के लिए बलवान फ़रिश्ते लगाये जाते हैं ,जो अल्लाह के आदेशों का पालन करवाते हैं "सूरा -अत तहरीम 66 :6 
"और निश्चय ही यह सन्देश (कुरान ) एक फ़रिश्ते द्वारा ही पहुंचाई हुयी बात है "सूरा -अत तकवीर 81 :19 
"नरक वासियों के ऊपर उन्नीस फ़रिश्ते नियुक्त किये गए हैं "सूरा -अल मुदस्सिर 74 :30 
इन सभी विवरणों से पता चलता है कि अल्लाह कि हुकूमत में फ़रिश्ते ,मजदूरी ,जासूसी ,और चुगली के साथ जेलर का काम भी करते हैं .और जरुरत होने पर पोस्टमेन का काम भी करते हैं .
2-फरिश्तों के कितने पंख 
कुछ लोगों को ऐसा लगता होगा कि फरिस्तों कन्धों पर दायें और बाएं एक एक पंख होगा ,जैसे पक्षियों के होते हैं .ईसाई भी दो ही पंख मानते है .लेकिन इस्लाम की बात और ही है .इसमे फरिश्तों के पंखों की संख्या दी जा रही है ,
"कुछ ऐसे भी फ़रिश्ते हैं ,जिनके ,दो -दो ,तीन-तीन , चार -चार पंख होते हैं "सूरा -फातिर 35 :1 
हदीस ने तो एक फ़रिश्ते के 600 पंख बताये है ,हदीस इस प्रकार है 
"अबू इशाक शैवानी ने कहा कि जब वह जिब्रील से मिलने गए तो उनके बीच में दो कमान की दूरी (two bow length ) थी .और उन्होंने जरीर बिन मसूद से कहा था कि जिब्रील के 600 पंख हैं "बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 455 
3-फरिश्तों को स्त्रियाँ बताने का विरोध 
अभी तक फरिश्तों के बारे में जोभी दिया गया वह विश्वास यानि ईमान पर आधारित है .चूँकि लगभग 97 % मुसलमान कुरान की व्याकरण नहीं समझते ,और उनको जो अर्थ बताया जाता है ,उसी को सही मानते है .यद्यपि कुरान में भी फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहा गया है ,जिसका मुसलमान विरोध करते हैं ,क्योंकि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसमे स्त्रियों को हीन समझा जाता है .और जब लोगों ने फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां या स्त्रियाँ कहा तो ,अल्लाह इस बात का खंडन करने के लिए दलीलें देने लगा ,और कहने लगा ,
"यह लोग अल्लाह की बेटियां होने को बुरा मान रहे हैं ,क्योंकि जब इनके यहाँ जब को बेटी होने की सूचना मिलाती है ,तो इनके मुंह काले पड़ जाते हैं ,और वह कुढ़ जाते हैं "सूरा -अन नहल 16 :57 और 58 
"क्या तुम इसे बड़ी भारी बात मान रहे हो कि अल्लाह ने फरिश्तों को बेटियां बना लिया है "सूरा बनी इस्रायेल 17 :40 
"क्या अल्लाह ने लड़कों की जगह लड़कियों को पसंद कर लिया है ? सूरा -अस साफ्फात 37 :153 
"क्या तुम्हारे दिलों में यह बात खटकती है ,कि अल्लाह के घर में बेटियां हों ,और तुम्हारे घर बेटे पैदा हों "सूरा -अस साफ्फात 37 :149 
"क्या अल्लाह ने खुद के लिए बेटियां पसंद कर लीं ,जो आभूषणों और श्रृंगार में पलती हैं ,और वादविवाद में ठीक से जवाब नहीं दे सकती हैं "
सूरा-जुखुरुफ़ 43 :16 और 18 
"तुम्हारे घर बेटे हों ,और अगर अल्लाह के घर बेटियाँ हों तो तुम्हें बहुत गलत लग रहा है "सूरा -अन नज्म 53 :21 और 22 
4-फरिश्तों का स्त्रियाँ होने का प्रमाण 
सब जानते हैं कि ,झूठे बहाने बनाकर सच को नहीं छुपाया जा सकता .और जैसे अदालत में जिरह के दौरान सच बाहर निकल ही आता है ,वैसे अल्लाह के इस झूठ की पोल खुद कुरान ने खोल दी है कि फ़रिश्ते स्त्रियाँ नहीं है .यह बात तब खुली जब अल्लाह ने यह कहा था ,(इस आयत को गौर से पढ़ने की जरुरत है .) देखिये
"क्या हमने फरिश्तों को स्त्रियाँ बनाया ,तब यह साक्षी थे "सूरा -अस साफ्फात 37 :150
Did We create the angels as females the while they witnessed?” 37:150
."اَمۡ خَلَقۡنَا الۡمَلٰٓٮِٕكَةَ اِنَاثًا وَّهُمۡ شٰهِدُوۡنَ‏"37:150(अम खलक ना मलायकतु निसा अन व् हुम शाहिदून)
इसी आयत की तफ़सीर में भी फरिश्तों को स्त्री बताने का खंडन किया है .
"وجعلوا الملائكة الذين هم عباد الله والإناث "
And they make the angels who are servants of the  Allah  are females.
5-अरबी व्याकरण से प्रमाण 
लेकिन अल्लाह की इस आयत में खुद विरोधाभास है ,क्योंकि वह अरबी में जिन फरिश्तों के लिए "मलायकतुملائكة "
 "शब्द का प्रयोग कर रहा है वह व्याकरण के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन  Feminine GendarPlular शब्द है .जिसे अरबी में "मुअन्निस जमा " कहते हैं .जो इस प्रकार है मुअन्निसالمؤنث सीगा जमाصيغة الجمع .अर्थात फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही हैं .क्योंकि अरबी व्याकरण के अनुसार किसी भी संज्ञा (Noun ) या सर्वनाम (Pronoun ) का स्त्रीलिंग (Feminine ) बनाने के लिए उसके आगे गोल ते के साथ ऊपर दो पेश(ةٌ ) लगा दिए जाते हैं ,जिसे ते मरबूता ( ta marbouta)कहते हैं 
  .उदाहरण हामिद ( حامِدُ) एक वचन पुर्लिंग इसका स्त्रीलिंग होगा (حامِدةٌ ) हामिदः जिसे हामिदतुन लिखते हैं और हामिदा बोलते हैं .ऐसे ही नासिर ( ناصِرُ) का स्त्रीलिंग नासिरा (ناصِرةٌ ) होगा .इस व्याकरण के नियमानुसार ("मलायकतुملائكة "  शब्द स्त्रीलिंग ही है .भले मुसलमान फरिश्तों (परियों ) को अल्लाह की बेटियां मानने से इनकार करें ,लेकिन इस बात से कोई मुल्ला इंकार नहीं कर सकता की अरबी व्याकरण के अनुसार फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही है .और अल्लाह ने औरतों की सेना बना रखी है .शायद अल्लाह से ही प्रेरणा लेकर गद्दाफी ने औरतों की सेना बना डाली थी .

मुझे पूरा यकीन है कि जब इस लेख को पढ़ने के बाद मुस्लिम बहिनों को यह पता चलेगा कि फ़रिश्ते वास्तव में पुरुष नहीं ,बल्कि स्त्रियाँ हैं ,तो वह जरुर खुश होंगी ,और उनको स्त्री होने पर गर्व होगा .लेकिन आगे से उनको जहाँ भी फ़रिश्ता लिखा हुआ दिखे ,उसकी जगह "फरिश्तिनी " या "परियां " शब्द प्रयोग करना होगा 
बताइए क्या अब भी आप फरिश्तों को परियां कहने से इंकार करेंगे ?

http://islamzpeace.com/2008/09/03/the-duties-of-angels/

साभार: भांडाफोडू ब्‍लॉग

भगवान बुद्ध और औरतें भी अल्लाह के नबी !!

सत्‍यवादी  प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय


भारत के लगभग सभी धर्मों की यह मान्यता है ,कि जब जब धरती के किसी भी हिस्से में लोग अमानवीय और अनैतिक कामों में लिप्त होकर पाप या अधर्म के काम करने लगते हैं ,तो उनको सही रास्ता दिखाने और अधर्म को समाप्त करने के लिए समय समय पर अनेकों महापुरुष आते रहते हैं . जिनको अवतार कहा जाता है ,लेकिन यहूदी , इसाई और इस्लाम धर्म इसके विपरीत मानते हैं ,वह अल्लाह द्वारा भेजे गए यानि नियुक्त किये गए ऐसे महापुरुषों को "नबी " कहते हैं .नबी भी लोगों को अल्लाह द्वारा दिखाए रस्ते पर चलने को कहते हैं .
इस विषय को और स्पष्ट करने के लिए पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि , यहूदी ,ईसाई और मुसलमानों का अल्लाह एक ही है .मुझे विश्ववास है कि इस बात से किसी को कोई आपात्ति नहीं होना चाहिए .दूसरी बात यह है कि यह तीनों धर्म मानते हैं कि मनुष्यों को सही रस्ते से भटकाने और पाप कर्म करने प्रेरणा शैतान ही देता है .
इसीलिए अपने बन्दों को शैतान के फंदे से बचाने और सीधे मार्ग पर लेजाने के लिए अल्लाह अपने नबियों को उठाता है , देखिये .
1-अल्लाह और शैतान का झगडा 
कुरान के अनुसार आदम के बनने बाद से ही अल्लाह को चुनौती दी थी कि वह उसके बन्दों को गुमराह करेगा ,यही बात बाइबिल में भी है ,यहाँ कुरान में इस प्रकार कहा गया है -
"शैतान ने अल्लाह से कहा ,जैसा तूने मुझे गुमराह किया है मैं तेरे लोगों के रस्ते में घात लगा कर बैठूँगा ,और उनके आगे और पीछे से आक्रमण करूँगा ,और तू अधिकांश को कृतज्ञ नहीं पायेगा "सूरा-अल आराफ 7 :14 -17 
"अल्लाह ने कहा निस्संदेह मेरे बन्दों पर तेरा कोई बस नहीं चलेगा ,सिवाय को बहके हुए लोग है "सूरा-अल हिज्र 15 :42
2-नबियों की संख्या 
अल्लाह ने आदम से लेकर कई भेजे भेजेइस्लामी मान्यता के अनुसार हैं जो अल्लाह का सन्देश लोगों को देते थे , यह कुरान और हदीस में है ,
"कितने रसूल हैं ,जिनका विवरण हम बयान कर चुके हैं और कितने ऐसे हैं जिनका वृतांत हमने नहीं दिया है "सूरा -अन निसा 4 :164 
( नोट - कुरान में सिर्फ 27 नबियों का विवरण मिलता है )
 "और हरेक जाति के लिए एक मार्ग दिखाने वाला ( हादी ) हुआ है "सूरा -रअद 13 :7 
रसूल ने कहा कि आदम से लेकर मुझ तक एक लाख चौबीस हजार (124000 )नबी आये है ,जिनमे तीन सौ पंद्रह ( 315 ) रसूल थे ,जिनके सन्दर्भ मिलते हैं .
"قال النبي (صلي الله عليه وسلم): "من آدم لي، بعث الله من مائة وأربعة وعشرون ألف الأنبياء، من بينهم 315 كانوا رسل
كما يشير التقرير.
Prophet(peace be upon him) said:"From Adam to me, Allah sent a hundred and twenty-four thousand Prophets ,of whom three hundred and fifteen were messengers 
Reference is given .
Musnad Ahmed  Hanbal-Hadith No-21257

3-सभी नबी समान हैं 
इसके बाद कुरान में यह भी कहा गया है कि,
"हम अल्लाह की किताबों और उसके भेजे नबियों के बीच में कोई अंतर नहीं करते हैं "सूरा -बकरा 2 :285 
जो दूसरे सभी नबियों को और जो उनके रब की ओर से मिली (नबूवत ) उनमे किसी के बीच में अंतर (distinction ) नहीं करते और हम उसी के आज्ञाकारी हैं . सूरा -बकरा 2 :136 और सूरा -आले इमरान -3 :84 
4-तफ़सीर में वर्णित नबी 
यह ऐसे नबी है जिनका नाम दिए बिना इनकी कथाएं कुरान में दी गयी हैं .(और कुरान की तफसीर अल मीजान बाब 15 में हैं) 
There are some prophets whose stories are given in the Qur'an without mentioning their names. These are:
No. Arabic Name Transliteration English Version
1. خضر Khidhr (a.s.) —खिज्र 
2. يوشع بن نون Yusha bin Nun (a.s.) Joshua-जोशुआ बिन नून 
3. شموئيل Shamuel (a.s.) Samuel-समूएल (इस्माइल )
4. حزقيل Hizqueel(a.s.) Ezekiel-हिजकिएल 
5. ذو القرنين Dhul-Quarnain[2]-जुलकरनैन (सिकंदर )
6. رسول اصحاب الاخدود An Ethiopean Prophet [3]-रसूल असहाब अल्खुद ( हब्शी)
7. شمعون الصفا Shamun Simon (Peter)-शिमॉन पीटर ( ईसा का शिष्य और प्रथम पोप )
8- 9. حواريان آخران لعيسى Two other disciples of Jesus Christ -हवारियान ( ईसा के दो शिष्य )
5-अल मीजान में वर्णित नबी
यह ऐसे नबियों के नाम है ,जिनका उल्लेख इस्लामी इतिहास की किताबों जी अल मीजान और परंपरा में मिलते है .इनमे भगवान बुद्ध का नाम भी है जिसे अरबी में बुजास्फ़ कहा गया है .(न .9 )
Now we may mention some of the prophets whose names are found in the traditions:
No. Arabic Name Transliteration English Version

1. شيت Sheth Seth-सैस
2. سام Saam Shem-साम 
3. ارميا Armia Jeremiah-यिर्मियाह 
4. دانيال Danial Daniel-दानिएल 
5. عموس Amus Amos-आमोस 
6. عبيدة Obaidiah Obaidiah-ओबैदयाह 
7. حبقوق Habakkuk Habakkuk-हबक्कूक 
8. جرجيس Jirjis —जिरजिस 
( इन आठ नबियों के नाम तौरेत यानि बाइबिल में मौजूद हैं )
9. بوذاسف Budhastav Budhastav-बुजास्फ़ ( बोधिसत्व यानि गौतम बुद्ध )(Gotam Bodh)
10. خالد بن سنان Khalid bin Sanan -खालिद बिन सनान 
6-महिला नबीया 
आजकल के कठमुल्ले भले इस बात को स्वीकार नहीं करें कि ,उन्हीं के अल्लाह ने औरतों और क्वांरी लड़कियों को भी अपना नबी बना दिया था .तौरेत के समय तो अल्लाह को औरतों को नबी बनाने में कोई आपति नहीं थी ,लेकिन मुहमद के अमे अल्लाह को मुस्लिम औरतों से इतनी नफ़रत हो गयी कि उसने एक भी अरबी औरत को नबी बनने के लायक नहीं समझा ,और माहवारी का बहाना बना कर उनको नबी नहीं बनाया .
तौरेत अर्थात बाइबिल के पुराने नियम ( Old Testament ) में इन महिला नबियों (prophetesses. )के नाम सन्दर्भ दिए गए हैं इन्हें हिब्रू और अरबी में नबीया कहा गया है .-हिब्रू में ( נביאה)अरबी में ( نبية)
http://bibleq.info/answer/4201/
नोट - दी गयी लिंक को देखें )
Several women are described as prophetesses. In the Old Testament we have the following five:
Miriam (Exodus 15:20-21) -मरियम (हारून की बहिन )
Deborah (Judges 4:4) -देबोरा -लप्पीदोत की स्त्री 
Huldah (2 Kings 22:14) -हुलदा-शल्लूम की पत्नी 
Noadiah (Nehemiah 6:14) -नोअद्याह 
Isaiah’s wife (Isaiah 8:3) -यशायाह की पत्नी 
तौरेत में दी गयी इन महिला नबीया के आलावा यहूदी धर्मग्रंथ तलमूद में इन महिला नबीया के नाम मिलते हैं 1 .सारह ,हन्नाह ( नबी समूएल की पत्नी ) 2 .अबीगेल ( नबी दाऊद की पत्नी ) 3 .एस्तेर(पुस्तक एस्तेर )इनको भी नबीया माना गया है .
The Jewish Talmud counts some additional women as prophets including Sarah, Hannah (mother of Samuel), Abigail (wife of David) and Esther. However, these are not called prophets or prophetesses in the Bible.
नए नियम में इन नबीया के नाम दिए हैं 
In the New Testament, there are another five:
-अन्ना -फ़नूएल की बेटी -Anna (Luke 2:36) 
राजा फिलिप की चारों पुत्रियाँ -Philip’s four daughters (Acts 21:8-9) -
इसा मसीह की माता मरियम और यूहन्ना बपतिस्ती की माता एलियाबेथ भी नबूवत करती थीं लेकिन उनको नबीया नहीं कहा गया है .
Although not called prophetesses, both Mary mother of Jesus (Luke 2:46-55) and Elizabeth mother of John Baptist (Luke 2:41-45) both made prophecies.

मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे इस लेख को पढ़कर हिन्दू और मुस्लिम बहिने जरुर खुश होंगी कि यदि जहन्नम जैसे कोई जगह है तो उस से डरने की कोई जरुरत नहीं है ,क्योंकि वहां पर हिन्दुओं मदद के लिए अल्लाह के नबी बुध भगवान होगे ,और मुस्लिम बहिनों को मुस्लिम मर्दों के अत्याचार से बचाने के लिए अल्लाह की कई नबीया मिल जाएँगी .यातो यह कुतर्की मुल्ले अल्लाह के इन नबियों को झूठ काह दें ,या फिर कह दें कि यहूदी ,इसी ,हिन्दू और मुसलमानों का अल्लाह अलग या कोई दूसरा है .याद रखिये इन सभी नबियों के नाम अल्लाह कि किताबों में लिखे हैं 
.
हमें इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि अल्लाह के सभी नबी समान हैं .

http://www.imamreza.net/eng/imamreza.php?id=9455
 
साभार: भांडाफोडू ब्‍लॉग

तकफीर मुल्लों का हथियार !

सत्‍यवादी  प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय


मुसलमान मौलवी जब किसी दुसरे गिरोह के लोग पर काफ़िर ,या मुशरिक होने का झूठा आरोप लगाते हैं ,तो इसे तकफीर(تكفير  ) कहा जाता है . मेरे एक मुस्लिम दोस्त ने इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने को कहा था ,क्योंकि अक्सर देखा गया है कि जोभी व्यक्ति इन मुल्लों के विचारों से रत्ती भर भी असहमति प्रकट करता है ,यह मुल्ले उसे काफ़िर(كافر     ) ,मुशरिक( مُشرك) ,और बिदअती( بِدعتي) घोषित करके उसके खिलाफ फ़तवा दे देते हैं .इस लिए बिना किसी द्वेषभाव के यह लेख दिया जा रहा है .
यद्यपि मुस्लिम विद्वान दावा करते हैं कि इस्लाम में बादशाही , और तानाशाही के लिए कोई स्थान नहीं है .औरमुस्लिमों को सिर्फ अल्लाह के द्वारा बताये गए मार्ग पर चलना चाहिए ..लेकिन इतिहास गवाह है कि , जैसे जैसे इस्लाम का विस्तार होता गया उसमे मुल्लों, मुफ्तियों का वर्चस्व होने लगा .पहले जब यजीद नामके अत्याचारी शासक ने इस्लाम के नाम पर अपनी मर्जी लोगों पर थोपना चाही थी ,जिसका परिणाम कर्बला के युद्ध के रूप में सामने आया था .और मुहम्मद साहिब के नवासे इमाम हुसैन ने खुद अपने और अपने परिवार के 72 लोगों की क़ुरबानी देकर इस्लाम को सही रस्ते पर लाना चाहा था .लेकिन कुछ समय के बाद फिर से इस्लाम में कई फिरके हो गए , और हरेक गिरोह मुसलमानों की नकेल अपने हाथों में रखना चाहता है .सब जानते हैं कि कुरान की 114 सूरतें करीब 23 साल में जमा की गयीं थी . और कालक्रम के अनुसार संकलित नहीं की गयी हैं .इसलिए ही उसका सही अर्थ और भाव , तात्पर्य समझने में कठिनता होती है .कुरान की किसी सूरा या आयत का सही भाव समझने के लिए उसका समय (Time), स्थान (Place),परिस्थिति (Circumstances)और जिसको संबोधित कर के कहा गया है , उसके बारे जानना जरुरी है ,और ऐसा न करने से वैचारिक मतभेद होजाने से फिरके बन जाते हैं .जो एक दूसरे के शत्रु बन जाते हैं .शिया और सुन्नियों में अक्सर खून खराबा होता रहता है , लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सुन्नियों में भी कई मज़हब (Sects ) है जो एक दुसरे को काफ़िर ,या मुशरिक कहते रहते हैं .इनमे ,हनफी , मलिकी ,शाफयी,और हम्बली ,मुख्य है , भारत में देवबंदी और बरेलवी अक्सर लड़ते रहते हैं .यहाँ पर कुरान और प्रमाणिक हदीसों के आधार इसका खुलासा दिया जा रहा है -
1-तकफीर के कुछ नमूने 
एक दूसरे के इमामों के अनुयायिओं को काफर या मुशरिक बताना कोई नयी बात नहीं है ,पहले भी ऐसा होता था ,देखिये
A.शाफयी कहते हैं कि इस्लाम में अबू हनीफा जैसा बुरा आदमी नहीं हुआ .
"ولدت لا أحد في الإسلام أكثر شرا من "أبو حنيفة"
Imam Dhahabi records in Syar alam al-Nubala, Volume 10 page 95:
B.इमाम अब्दुल हयी काजी बिन मूसा अल हनफी ( मृत्यु 506 हि) ने शाफियों के बारे में कहा ,अगर मेरे पास हुकूमत होती तो ,मैं शाफियों पर जजिया लगवा देता .
لو كان لى أمر لاخذت الجزية من الشافعية


Meezan al Etidal, Volume 4 page 52

C.शाफयी विद्वान् मुहम्मद बिन मुहम्मद अबू मंसूर ने कहा ,अगर मेरे हाथोंमे सत्ता होती तो ,मैं हम्बलियों पर जजिया लगाने का आदेश जारी कर देता .
وقيل أن البروي قال لو كان لي أمر لوضعت على الحنابلة الجزية
Shazarat al-Dahab, Volume 4 page 271:
D.शेख अबू हातिम हम्बली ने अपने फिरके के बारे में कहा है 
जो भी हम्बली नहीं है ,वह मुस्लिम नहीं है 
فكل من لم يكن حنبليا فليس بمسلم
जो भी व्यक्ति इमाम हम्बल के निर्णय नहीं मानता उस पर इतनी लानत है ,जितनी जमीन पर धूल के कण है .
فلعنة ربنا أعداد رمل على من رد قول أبي حفيفة 
Al-Dur al-Mukhtar Sharah Tanveer al-Absar, page 14

E..इमाम याफी ने अपनी किताब"अल जनान " में लिखा है ,कि जब में दमिश्क में था तो उसके आसपास के शहरों में घोषणा कि गयी थी ,कि जोभी इब्ने तय्यमा कि किताब " मिन्हाज अस सुन्नाह " पर विश्वास करेगा तो उसे क़त्ल किया जाये और उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी 
ثم نودي بدمشق وغيرها من كان على عقيدة ابن تيمية حل ماله ودمه 
Mirat al-Janan, Volume 2 page 248:

2-तकफीर का कारण
देखा गया है कि ,जब कोई खुद को बहुत बड़ा विद्वान समझने लगता है ,तो उसमे घमंड आ जाता है ,और वह दूसरों का मजाक उड़ाने लगता है ,यही बात कुरान ने इन आयतों में बताई है,मुसलमानों को इसे जरुर समझना चाहिए .
"क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जो , खुद को बड़ा पवित्र होने का दम भरते हैं ,लेकिन अल्लाह जिसे चाहे पवित्रता प्रदान करता है " 
सूरा -निसा 4 :49 
 यह लोग समझते हैं कि यही बुनियाद पर हैं ,सुन लो यह बिलकुल झूठे है इनपर शैतान छा गया है "सूरा- मुजादिला 58 :18 -19 
"हे ईमान वालो कोई गिरोह दूसरे गिरोह का मजाक नहीं उडाये ,हो सकता है वह उन से भी अच्छे हों "सूरा -हुजुरात 49 :11 
3-मौलवियों कि चालाकी 
जादातर मुसलमान अरबी भाषा में निष्णात नहीं होते हैं . और मौलवी कुरान कि आयतों का जो भी अर्थ करदेते हैं मुसलमां उसी पर यकीं कर लेते हैं . इसी तरकीब से मौलवी मुसलमानों को जहाँ चाहे भिड़ा देते हैं .,जैसा इस हदीस में है
अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि हजरत उमर खारजियों को दुनिया कि सबसे ख़राब मखलूक कहते थे , और कहते थे यह लोग पहले जो आयतें काफिरों के लिए कही गयी थीं ,उनको ईमान वालों के लिए लागु कर देते हैं ."
باب ‏ ‏قتل ‏ ‏الخوارج ‏ ‏والملحدين ‏ ‏بعد إقامة الحجة عليهم ‏ ‏وقول الله تعالى ‏
وما كان الله ليضل قوما بعد إذ هداهم حتى يبين لهم ما يتقون ‏‏وكان ‏ ‏ابن عمر ‏ ‏يراهم شرار خلق الله ‏ ‏وقال إنهم انطلقوا إلى آيات نزلت في الكفار فجعلوها على المؤمنين
Sahih Bukhari, Chapter of Killing the Khawarjites and Mulhideen, Volume No. 6, Page No. 2539]

और इसीलिए यह आयत नाजिल हुई थी .
ऐसा नहीं हो सकता कि अल्लाह लोगों को मार्ग दिखाने के बाद फिर से पथभ्रष्ट कर दे ,जबकि उनको पता हो कि उनको किस से बचना चाहिए .सूरा -तौबा 9 :115 
4-रसूल की भविष्यवाणी 


रसूल को मुसलमानों के इस स्वभाव का पता था ,कि यह लोग आगे चल कर फालतू बातों पर एक दुसरे का खून बहायेंगे .इसी लिए हदीस के कहा है
उकबा बिन आमिर ने कहा ,एक बार जब रसूल उहद के शहीदों के जनाजे की नमाज पढ़ चुके तो बोले मैंने तुम्हें कौसर का झरना और दुनिया के खजानों की चाभियाँ अता कर दी हैं .मुझे इस बात का डर नहीं है की तुम मेरे बाद अल्लाह के साथ किसी को शरीक करोगे ,लेकिन मुझे यह डर है की तुम नाहक की बात पर एक दुसरे का खून बहाओगे "


أن النبي ‏ ‏صلى الله عليه وسلم ‏ ‏خرج يوما فصلى على أهل ‏ ‏أحد ‏ ‏صلاته على الميت ثم انصرف إلى المنبر فقال ‏ ‏إني ‏ ‏فرط ‏ ‏لكم وأنا شهيد عليكم وإني والله لأنظر إلى حوضي الآن وإني أعطيت مفاتيح خزائن الأرض ‏ ‏أو مفاتيح الأرض ‏ ‏وإني والله ما أخاف عليكم أن تشركوا بعدي ولكن أخاف عليكم أن تنافسوا فيها 
Sahih Bukhari-Volume 2, Book 23, Number 428: 
5-रसूल की नसीहत 


जो मौलवी किसी को काफ़िर या मुशरिक कहकर झूठा आरोप लगाते हैं उनके बारे में यह हदीस में यह कहा है
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने इन तीन बातों से बचने को कहा है ,किसी ऐसे व्यक्ति का क़त्ल करना जो कलमा पढ़ता हो ,चाहे वह कैसा भी गुनाहगार हो ,किसी को काफ़िर कहना और किसी को इस्लाम से खारिज बताना .रसूल ने कहा कि यही इमान की बुनियाद है .


‏ ‏عن ‏ ‏أنس بن مالك ‏ ‏قال ‏
قال رسول الله ‏ ‏صلى الله عليه وسلم ‏ ‏ثلاث من ‏ ‏أصل ‏ ‏الإيمان ‏ ‏الكف ‏ ‏عمن قال لا إله إلا الله ولا نكفره بذنب ولا نخرجه من الإسلام بعمل والجهاد ماض منذ بعثني الله إلى أن يقاتل آخر أمتي ‏ ‏الدجال ‏ ‏لا يبطله ‏ ‏جور ‏ ‏جائر ‏ ‏ولا عدل عادل والإيمان بالأقدار 
Sunnan Abu Dawud, Volume No. 2, Hadith # 2170]
कुरान में भी कहा गया है ,
हे ईमान वालो जब तुम बाहर निकलो तो ध्यान से देख लो , और जो कोई तुम्हें सलाम करे तो ,उस से यह नहीं कहो ,कि तू मोमिन नहीं है " 
सूरा - निसा 4 :94 
6-झूठा आरोप लगाने का नतीजा 
यदि कोई किसी पर काफ़िर या मुशरिक होने का मिथ्या आरोप लगता है तो उसकी सारी इबादत का फल छिन जाता है ,
अबू हुजैफा इब्न यमामा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कुरान कि इतनी तिलावत करे कि उसका चेहरा ऐसा नूरानी हो जाये कि वह दूर से ही पहचान लिया जाये ,लेकिन उसकी यह सारी विशेषता उसी समय छिन जाएगी जब वह पडौसी के पीठ पीछे उसकी निंदा करेगा ,या उसपर हथियार उठाएगा , या मोमिन को मुशरिक बताएगा "


أن حذيفة يعني ابن اليمان رضي الله عنه حدثه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلّم «إن مما أتخوف عليكم رجل قرأ القرآن حتى إذا رؤيت بهجته عليه وكان رداؤه الإسلام اعتراه إلى ما شاء الله انسلخ منه ونبذه وراء ظهره وسعى على جاره بالسيف ورماه بالشرك» قال قلت يانبي الله أيهما أولى بالشرك المرمي أو الرامي ؟ قال «بل الرامي»
إسناد جيد


Sahih, Tahqiq Nasir Albani, Volume 001, Page No. 200, Hadith Number 81
Silsilat al-ahadith al-sahihah - Albani Volume 007-A, Page No. 605, Hadith Number 3201
7-शांतिपूर्ण समाधान 
यदि कोई मुल्ला मौलवी किसी पर काफ़िर और मुशरिक होने का आरोप लगाता है ,और आपस में विवाद पैदा करता है ,तो इस हदीस में एकही शांति पूर्ण उपाय बताया गया है , के वह किसी के बहकाने में न आयें .
उबैदुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि मेरा एक पडौसी कहता है कि मैं शिर्क करता हूँ , उमर ने कहा तुम कलमा पढो ,पडौस का शक दूर हो जायेगा .
عن عبيد الله بن عمر عن نافع أن رجلا قال لإبن عمر أن لي جارا يشهد علي بالشرك فقال قل لا إله إلا الله تكذبه
Imam Ibn Asakir in Tibyan al Kadhib al Muftari, Page No. 373] 
जकारिया नायक किस तरह के कुतर्कों से लोगों में विवाद करता है उसका प्रमाण देने के लिए यह विडियो देखिये
http://www.youtube.com/watch?v=CS2lB07Ve9s
बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज भी इमाम बुखारी जैसे लोग मुसलमानों के ठेकेदार बने हुए हैं , और अपने निजी स्वार्थों के लिए मुसलमानों को किसी न किसी पार्टी को वोट देने का फतवा देते रहते हैं .इसी तरह सलमान खुर्शीद मुसलमानों का हमदर्द होने का ढोंग करके ,उनके वोटों से राहुल विंची उर्फ़ "गंदी " को जीवन भर के किये प्रधानमंत्री बनाना चाहता है .और मुसलमानों को हमेशा के लिए उसका मुहताज बनाना चाहता है .
मेरा सभी मुस्लिम युवा पीढ़ी के लोगों को सलाह है कि , वह ऐसे स्वार्थी मुल्लों और नेताओं के चक्कर में न फसें और खुले दिमाग से देश की मुख्यधारा में शामिल हों .और किसी की कठपुतली नहीं बनें .

http://www.ahlus-sunna.com/index.php?option=com_content&view=article&id=82&Itemid=14.

साभार: भांडाफोडू ब्‍लॉग

इमाम हुसैन का भारतप्रेम !!

सत्‍यवादी  प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय

यह एक सर्वमान्य सत्य है कि इतिहास को दोहराया नहीं जा सकता है और न बदलाया जा सकता है ,क्योंकि इतिहास कि घटनाएँ सदा के लिए अमिट हो जाती है .लेकिन यह भी सत्य है कि विज्ञान कि तरह इतिहास भी एक शोध का विषय होता है .क्योंकि इतिहास के पन्नों में कई ऐसे तथ्य दबे रह जाते हैं ,जिनके बारे में काफी समय के बाद पता चलता है .ऐसी ही एक ऐतिहासिक घटना हजरत इमाम हुसैन के बारे में है वैसे तो सब जानते हैं कि इमाम हुसैन मुहम्मद साहिब के छोटे नवासे ,हहरत अली और फातिमा के पुत्र थे .और किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं ,उनकी शहादत के बारे में हजारों किताबें मिल जाएँगी .काफी समय से मेरे एक प्रिय मुस्लिम मित्र हजरत इमाम के बारे में कुछ लिखने का आग्रह कर रहे थे ,तभी मुझे अपने निजी पुस्तक संग्रह में एक उर्दू पुस्तक "हमारे हैं हुसैन " की याद आगई ,जो सन 1960 यानि मुहर्रम 1381 हि० को इमामिया मिशन लखनौउसे प्रकाशित हुई थी .इसकी प्रकाशन संख्या 351 और लेखक "सय्यद इब्न हुसैन नकवी " है .इसी पुस्तक के पेज 11 से 13 तक से कुछ अंश लेकर ,उर्दू से नकवी जी के शब्दों को ज्यों का त्यों दिया जा रहा , जिस से पता चलता है कि इमाम हुसैन ने भारत आने क़ी इच्छा प्रकट क़ी थी (.फिर इसके कारण संक्षिप्त में और सबूत के लिए उपलब्ध साइटों के लिंक भी दिए जा रहे हैं .)
 1-इमाम क़ी भारत आने क़ी इच्छा 
नकवी जी ने लिखा है "हजरत इमाम हुसैन दुनियाए इंसानियत में मुहसिने आजम हैं,उन्होंने तेरह सौ साल पहले अपनी खुश्क जुबान से ,जो तिन रोज से बगैर पानी में तड़प रही थी ,अपने पुर नूर दहन से से इब्ने साद से कहा था "अगर तू मेरे दीगर शरायत को तस्लीम न करे तो , कम अज कम मुझे इस बात की इजाजत दे दे ,कि मैं ईराक छोड़कर हिंदुस्तान चला जाऊं"
नकवी आगे लिखते हैं ,"अब यह बात कहने कि जरुरत नहीं है कि ,जिस वक्त इमाम हुसैन ने हिंदुस्तान तशरीफ लाने की तमन्ना का इजहार किया था ,उस वक्त न तो हिंदुस्तान में कोई मस्जिद थी ,और न हिंदुस्तान में मुसलमान आबाद थे .गौर करने की बात यह है कि,इमाम हुसैन को हिंदुस्तान की हवाओं में मुहब्बत की कौन सी खुशबु महसूस हुई थी ,कि उन्होंने यह नहीं कहा कि मुझे चीन जाने दो ,या मुझे ईरान कि तरफ कूच करने दो ..उन्होंने खुसूसियत से सिर्फ हिंदुस्तान कोही याद किया था 
गालिबन यह माना जाता है कि हजरत इमाम हुसैन के बारे में हिन्दुस्तान में खबर देने वाला शाह तैमुर था .लेकिन तारीख से इंकार करना नामुमकिन है .इसलिए कहना ही पड़ता है कि इस से बहुत पहले ही " हुसैनी ब्राह्मण "इमाम हुसैन के मसायब बयाँ करके रोया करते थे .और आज भी हिंदुस्तान में उनकी कोई कमी नहीं है .यही नहीं जयपुर के कुतुबखाने में वह ख़त भी मौजूद है जो ,जैनुल अबिदीन कि तरफ से हिन्दुतान रवाना किया गया था .
इमाम हुसैन ने जैसा कहा था कि ,मुझे हिंदुस्तान जाने दो ,अगर वह भारत की जमीन पर तशरीफ ले आते तो ,हम कह नहीं सकते कि उस वक्त कि हिन्दू कौम उनकी क्या खिदमत करती"
2-इमाम हुसैन की भारत में रिश्तेदारी 
इस्लाम से काफी पहले से ही भारत ,इरान ,और अरब में व्यापार होता रहता था .इस्लाम के आने से ठीक पहले इरान में सासानी खानदान के 29 वें और अंतिम आर्य सम्राट "यज्देगर्द (590 ई ) की हुकूमत थी .उस समय ईरान के लोग भारत की तरह अग्नि में यज्ञ करते थे .इसी लिए "यज्देगर्द" को संस्कृत में यज्ञ कर्ता भी कहते थे .
प्रसिद्ध इतिहासकार राज कुमार अस्थाना ने अपने शोधग्रंथ "Ancient India " में लिखा है कि सम्राट यज्देगर्द की तीन पुत्रियाँ थी ,जिनके नाम मेहर बानो , शेहर बानो , और किश्वर बानो थे .यज्देगर्द ने अपनी बड़ी पुत्री की शादी भारत के राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय से करावा दी थी .जिसकी राजधानी उज्जैन थी ..और राजा के सेनापति का नाम भूरिया दत्त था .जिसका एक भाई रिखब दत्त व्यापर करता था . .यह लोग कृपा चार्य के वंशज कहाए जाते हैं .चन्द्रगुप्त ने मेहर बानो का नाम चंद्रलेखा रख दिया था .क्योंकि मेहर का अर्थ चन्द्रमा होता है ..राजाके मेहर बानो से एक पुत्र समुद्रगुप्त पैदा हुआ .यह सारी घटनाएँ छटवीं शताब्दी की हैं
. यज्देगर्द ने दूसरी पुत्री शेहर बानो की शादी इमाम हुसैन से करवाई थी . और उस से जो पुत्र हुआ था उसका नाम "जैनुल आबिदीन " रखा गया .इस तरह समुद्रगुप्त और जैनुल अबिदीन मौसेरे भाई थे .इस बात की पुष्टि "अब्दुल लतीफ़ बगदादी (1162 -1231 ) ने अपनी किताब "तुहफतुल अलबाब " में भी की है .और जिसका हवाला शिशिर कुमार मित्र ने अपनी किताब "Vision of India " में भी किया है .
3-अत्याचारी यजीद का राज 
इमाम हुसैन के पिता हजरत अली चौथे खलीफा थे . और उस समय वह इराक के शहर कूफा में रहते थे . हजरत prm अली सभी प्रकार के लोगों से प्रेमपूर्वक वर्ताव करते थे . उन के कल में कुछ हिन्दू भी वहां रहते थे .लेकिन किसी पर भी इस्लाम कबूल करने पर दबाव नहीं डाला जाता था .ऐसा एक परिवार रिखब दत्त का था जो इराक के एक छोटे से गाँव में रहता था ,जिसे अल हिंदिया कहा जाता है . जब सन 681 में हजरत अली का निधन हो गया तो , मुआविया बिन अबू सुफ़यान खलीफा बना . वह बहुत कम समय तक रहा .फउसके बाद उसका लड़का यजीद सन 682 में खलीफा बन गया . यजीद एक अय्याश , अत्याचारी . व्यक्ति था .वह सारी सत्ता अपने हाथों में रखना चाहता था .इसलिए उसने सूबों के सभी अधिकारीयों को पत्र भेजा और उनसे अपने समर्थन में बैयत ( oth of allegience ) देने पर दबाव दिया .कुछ लोगों ने डर या लालच के कारण यजीद का समर्थन कर दिया . लेकिन इमाम हुसैन ने बैयत करने से साफ मना कर दिया .यजीद को आशंका थी कि यदि इमाम हुसैन भी बैयत नहीं करेंगे तो उसके लोग भी इमाम के पक्ष में हो जायेंगे .यजीद तो युद्ध कि तय्यारी करके बैठा था .लेकिन इमाम हुसैन युद्ध को टालना चाहते थे ,यह हालत देखकर शहर बानो ने अपने पुत्र जैनुल अबिदीन के नाम से एक पत्र उज्जैन के राजा चन्द्रगुप्त को भिजवा दिया था .जो आज भी जयपुर महाराजा के संग्राहलय में मौजूद है .बरसों तक यह पत्र ऐसे ही दबा रहा ,फिर एक अंगरेज अफसर Sir Thomas Durebrught ने 26 फरवरी 1809 को इसे खोज लिया और पढ़वाया ,और राजा को दिया , जब यह पत्र सन 1813 में प्रकाशित हुआ तो सबको पता चल गया . 
उस समय उज्जैन के राजा ने करीब 5000 सैनिकों के साथ अपने सेनापति भूरिया दत्त को मदीना कि तरफ रवाना कर दिया था .लेकिन इमाम हसन तब तक अपने परिवार के 72 लोगों के साथ कूफा कि तरफ निकल चुके थे ,जैनुल अबिदीन उस समय काफी बीमार था ,इसलिए उसे एक गुलाम के पास देखरेख के लिए छोड़ दिया था .भूरिया दत्त ने सपने भी नहीं सोचा होगा कि इमाम हुसैन अपने साथ ऐसे लोगों को लेकर कुफा जायेंगे जिन में औरतें , बूढ़े और दुधापीते बच्चे भी होंगे .उसने यह भी नहीं सोचा होगा कि मुसलमान जिस रसूल के नाम का कलमा पढ़ते हैं उसी के नवासे को परिवार सहित निर्दयता से क़त्ल कर देंगे .और यजीद इतना नीच काम करेगा . वह तो युद्ध की योजना बनाकर आया था . तभी रस्ते में ही खबर मिली कि इमाम हुसैन का क़त्ल हो गया . यह घटना 10 अक्टूबर 680 यानि 10 मुहर्रम 61 हिजरी की है .यह हृदय विदारक खबर पता चलते ही वहां के सभी हिन्दू( जिनको आजकल हुसैनी ब्राहमण कहते है ) मुख़्तार सकफी के साथ इमाम हुसैन के क़त्ल का बदला लेने को युद्ध में शामिल हो गए थे .इस घटना के बारे में "हकीम महमूद गिलानी" ने अपनी पुस्तक "आलिया " में विस्तार से लिखा है 
4-रिखब दत्त का महान बलिदान 
कर्बला की घटना को युद्ध कहना ठीक नहीं होगा ,एक तरफ तिन दिनों के प्यासे इमाम हुसैन के साथी और दूसरी तरफ हजारों की फ़ौज थी ,जिसने क्रूरता और अत्याचार की सभी सीमाएं पर कर दी थीं ,यहाँ तक इमाम हुसैन का छोटा बच्चा जो प्यास के मारे तड़प रहा था , जब उसको पानी पिलाने इमाम नदी के पास गए तो हुरामुला नामके सैनिक ने उस बच्चे अली असगर के गले पर ऐसा तीर मारा जो गले के पार हो गया . इसी तरह एक एक करके इमाम के साथी शहीद होते गए .
और अंत में शिम्र नामके व्यक्ति ने इमाम हुसैन का सी काट कर उनको शहीद कर दिया , शिम्र बनू उमैय्या का कमांडर था . उसका पूरा नाम "Shimr Ibn Thil-Jawshan Ibn Rabiah Al Kalbi (also called Al Kilabi (Arabic: شمر بن ذي الجوشن بن ربيعة الكلبي) था. यजीद के सैनिक इमाम हुसैन के शरीर को मैदान में छोड़कर चले गए थे .तब रिखब दत्त ने इमाम के शीश को अपने पास छुपा लिया था .यूरोपी इतिहासकार रिखब दत्त के पुत्रों के नाम इसप्रकार बताते हैं ,1सहस राय ,2हर जस राय 3,शेर राय ,4राम सिंह ,5राय पुन ,6गभरा और7 पुन्ना .बाद में जब यजीद को पता चला तो उसके लोग इमाम हुसैन का सर खोजने लगे कि यजीद को दिखा कर इनाम हासिल कर सकें . जब रिखब दत्त ने शीश का पता नहीं दिया तो यजीद के सैनिक एक एक करके रिखब दत्त के पुत्रों से सर काटने लगे ,फिर भी रिखब दत्त ने पता नहीं दिया .सिर्फ एक लड़का बच पाया था . जब बाद में मुख़्तार ने इमाम के क़त्ल का बदला ले लिया था तब विधि पूर्वक इमाम के सर को दफनाया गया था .यह पूरी घटना पहली बार कानपुर में छपी थी .story had first appeared in a journal (Annual Hussein Report, 1989) printed from Kanpur (UP) .The article ''Grandson of Prophet Mohammed (PBUH

रिखब दत्त के इस बलिदान के कारण उसे सुल्तान की उपाधि दी गयी थी .और उसके बारे में "जंग नामा इमाम हुसैन " के पेज 122 में यह लिखा हुआ है ,"वाह दत्त सुल्तान ,हिन्दू का धर्म मुसलमान का इमान,आज भी रिखब दत्त के वंशज भारत के अलावा इराक और कुवैत में भी रहते हैं ,और इराक में जिस जगह यह लोग रहते है उस जगह को आज भी हिंदिया कहते हैं यह विकी पीडिया से साबित है 
Al-Hindiya or Hindiya (Arabic: الهندية‎) is a city in Iraq on the Euphrates River. Nouri al Maliki went to school there in his younger days. Al-Hindiya is located in the Kerbala Governorate. The city used to be known as Tuwairij (Arabic: طويريج‎), which gives name to the "Tuwairij run" (Arabic: ركضة طويريج‎) that takes place here every year as part of the Mourning of Muharram on the Day of Ashura.
http://en.wikipedia.org/wiki/Hindiya

तबसे आजतक यह हुसैनी ब्राह्मण इमाम हुसैन के दुखों को याद करके मातम मनाते हैं .लोग कहते हैं कि इनके गलों में कटने का कुदरती निशान होता है .यही उनकी निशानी है .
5-सारांश और अभिप्राय 
यद्यपि मैं इतिहास का विद्वान् नहीं हूँ ,और इमाम हुसैन और उनकी शहादत के बारे में हजारों किताबे लिखी जा सकती हैं ,चूँकि मुझे इस विषय पर लिखने का आग्रह मेरे एक दोस्त ने किया था ,इसलिए उपलब्ध सामग्री से संक्षिप्त में एक लेख बना दिया था , मेरा उदेश्य उन कट्टर लोगों को समझाने का है ,कि जब इमाम हुसैन कि नजर में भारत एक शांतिप्रिय देश है ,तो यहाँ आतंक फैलाकर इमाम की आत्मा को कष्ट क्यों दे रहे हैं .भारत के लोग सदा से ही अन्याय और हिंसा के विरोधी और सत्य के समर्थक रहे हैं .इसी लिए अजमेर की दरगाह के दरवाजे पार लिखा है ,
"शाहास्त हुसैन बदशाहस्त हुसैन ,दीनस्त हुसैन दीं पनाहस्त हुसैन 
सर दाद नादाद दस्त दर दस्ते यजीद ,हक्का कि बिनाये ला इलाहस्त हुसैन "
इतिहास गवाह है कि अत्याचार से सत्य का मुंह बंद नहीं हो सकता है ,वह दोगुनी ताकत से प्रकट हो जाता है ,जैसे कि ,
" कत्ले हुसैन असल में मर्गे यजीद है "
6-संदर्भित किताबें और साइटें
अपने लेख को प्रमाणित करने के लिए यह सूचि दी जा रही है , ताकि लोग भी विस्तार से जान सकें और सच्चाई को स्वीकार करें
1-Brahmis followers of Imaam  Hussain
http://www.milligazette.com/Archives/2004/16-31May04-Print-Edition/1605200441.htm

2-Brahmins Fought for Imam Hussain in the Battle of Karbala

http://smma59.wordpress.com/2007/09/19/brahmins-fought-for-imam-hussain-in-the-battle-of-karbala/


3-The Hindu Devotees of Imam Hussain (A.S.)
http://smma59.wordpress.com/2006/09/05/the-hindu-devotees-of-imam-hussain-as-2/
4-Relation of Imam Hussain with Indiaહજરત ઇમામ હુસેનના ભારત સાથેના સંબંધો
http://hi.shvoong.com/humanities/religion-studies/1909198-relation-imam-hussain-india/
5-The Story of Imam Hussein
http://hammorabi.blogspot.com/Imam%20Hussein/Imam%20Hussein.html
6-Relationship  of Imam Husain  with India 
http://www.balawaristan.net/Documents/relationship-of-different-religions.html
7-Azadaar e Husain

http://alqaim.info/?p=1417


8-Hindus in Iraq

http://www.qatarliving.com/node/12239
9-Mohyal history
http://www.mohyal.com/index.php/general-mohyal-sabha/mohyal-history
10-Hussaini Brahmin 
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-01-21/patna/27750686_1_muharram-procession-hazrat-imam-hussain-month-of-islamic-calendar
11-JANG NAMA IMAM HUSSAIN
جنگ نامہ امام حسین
Auther Name : Dr.Qureshi Ahmed Hussain Ailadri
First Edition : 2001-Rs.150.00
http://www.punjabiadbiboard.com/index.php?main_page=product_info&cPath=5&products_id=26

मुझे पूरा विश्वास है कि इतने सबूतों के देखने के बाद लोग हिंसा का रास्ता छोडके मानवता और इमाम हुसैन के प्रिय भारत देश की सेवा जरुर करेंगे 

http://www.shiaforums.com/vb/f25/hindu-followers-muslim-imam-imam-hussain-s-9251/

साभार: भांडाफोडू ब्‍लॉग

मुस्लिम देशों में अशांति क्यों है ?

सत्‍यवादी   प्रस्तुति: डॉ0 संतोष राय


आजकल लगभग सभी मुस्लिम देशों में विभिन्न कारणों से खूनी संघर्ष हो रहे हैं , जिसके फलस्वरूप रोज हजारों लोग मारे जा रहे हैं , फिरभी कुछ मुस्लिम धार्मिक नेता वास्तविकता पर परदा डालने के लिए कभी अमेरिका और कभी दुसरे देशों को इसका जिम्मेदार बताते रहते हैं . यह तो अच्छा है कि इन देशों में हिन्दू नहीं हैं , वर्ना यह मौलवी वहां के उपद्रवों और हत्याओं के लिए आर. एस .एस का नाम लगा देते .चूंकि इन मुस्लिम देशों के उपद्रवग्रस्त और अशांत होने से विश्व के सभी देशों से प्रभाव पड़ रहा है ,जो एक चिंता का विषय है ,कि आखिर क्या वजह है ,जिस के कारण न तो यह देश शांत रहते हैं ,और न ही दूसरों को शांतिपूर्वक रहने देते हैं .क्योंकि यह समस्या मुस्लिम देशों से सम्बंधित है , जहाँ बड़े बड़े उग्रवादी संगठन मौजूद है ,इसलिए कुरान और हदीसों आधार पर अशांति   के असली कारण बताये जा रहे हैं ,जो इस प्रकार हैं ,
1-वहां सभी मुसलमान हैं 
कुरान और हदीसों से साबित होता है कि , अल्लाह जिस बच्चे को भी जन्म देता है , वह धर्म के अनुसार पक्का मुसलमान होता है ,मुसलमानों का स्वभाव कैसा होता है ,सब जानते हैं ., और मुसलमानों के स्वभाव में किसी भी प्रकार का परिवर्तन संभव नहीं है .क्योंकि उनका स्वभाव ही उनका दीन( धर्म ) है .देखिये
"अल्लाह की सृष्टि में कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है ,क्योंकि यही दीन(धर्म ) है .लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते "सूरा -रूम 30 :30 
अबू हुरैरा ने कहा कि इस आयत के बारे में रसूल ने कहा कि ,हरेक बच्चा असली( ईमान )इस्लाम में जन्म लेता है ,"
"وروى أبو هريرة:
قال رسول الله: "كل مولود يولد مع الايمان الحقيقي للإسلام"
Narrated Abu Huraira:
Allah's Apostle said, "Every child is born with a true faith of Islam
Sahih Al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 441)
Sahih Al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 467
2-मनुष्य में अल्लाह की आत्मा 
इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह ने स्रष्टि का प्रथम व्यक्ति आदम बनाया था . और उसके शरीर बनाने के बाद उसमे अपनी आत्मा फूंक दी थी . इस तरह सभी आदम की संतानें हैं , और सभी में आदम के गुण मौजूद है ,
"हमने इन्सान को नख शिख से बिलकुल ठीक बनाया और ,फिर उसमे अपनी रूह फूंक दी "सूरा -अस सजदा 32 :9 
"और फिर उसकी आत्मा को जैसा रचाना चाहा वैसा बनाया ,और जब इस काम में सफल हो गया तो ,आत्मा को और नीखर दिया "
सूरा -अश शम्श 91 :1 और 91 :9 
3-अल्लाह ने मनुष्य को कैसा बनाया 
कुरान के अनुसार अल्लाह ने आदम को नापतौल करके खोट रहित बिलकुल सही सही बनाया था ,और उसे अच्छा रूप ,और निष्पाप बनाया था
"हमने मनुष्य को सुन्दरतम रूप से बनाया है ,और उसे अच्छी प्रकृति प्रदान की है "सूरा -अत तीन 95 :4 
"उसी ने हरेक चीज को बनाया है ,फिर उसका ठीक से अंदाजा भी ठहराया है "सूरा -अल फुरकान 25 :2 
उसी ने इन्सान का अच्छा स्वभाव दिया है "सूरा -तागाबुन 64 :3 
4-आदम अल्लाह प्रतिरूप है 
अगर हम इन हदीसों को गौर से पढ़ें तो पता चलता है कि आदम की केवल शक्ल ही नहीं सभी गुण भी अल्लाह के जैसे ही थे .यानि जो आदतें और स्वभाव अल्लाह के हैं ,वही आदम के भी थे , देखिये
"अबू हुरैरा ने कहा ,कि रसूल ने कहा है , अल्लाह ने आदम को प्रतिरूप बनाया है "


Narrated Abu Huraira:The Prophet said, "Allah created Adam in HIS IMAGE
"
"وروى أبو هريرة: أن النبي قال: "خلق الله آدم على صورته"


 (Sahih al-Bukhari, Volume 8, Book 74, Number 246,

अबू हुरैरा ने कहा ,कि रसूल ने कहा है ,कि महान अल्लाह ने आदम को अपना प्रतिरूप बनाया है "


Abu Huraira reported Allah's Messenger as saying: Allah, the Exalted and Glorious, created Adam in HIS own image 


"عن أبي هريرة رسول الله قوله: الله، عز وجل، ومجيد، وآدم خلق على صورته"


Sahih Muslim, Book 040, Number 6809
"अल्लाह के रसूल ने कहा ,यदि कोई अपने भाई से मारामारी करे ,तो उसके चहरे पर प्रहार करने से बचे , क्योंकि अल्लाह ने आदम को अपनी सूरत जैसा बनाया है "
The Messenger of Allah, may Allah bless him, said:“When any one of you fights with his brother, he should avoid his face for Allah created Adam in his or His own image.”
إِذَا قَاتَلَ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ فَلْيَجْتَنِبْ الْوَجْهَ فَإِنَّ اللَّهَ خَلَقَ آدَمَ عَلَى صُورَتِهِ
 Sahih Muslim-BK 20  Hadith 4731
http://www.sahihmuslim.com/sps/sp.cfm?secID=GSC&loadpage=displaysection.cfm
सही मुस्लिम कि इस हदीस व्याख्या करते हुए इब्न अजीबा ने "अल मुबहदिस अल असलिया" में कहा है ,इसका तत्पर अल्लाह जैसी सूरत नहीं ,उसके गुणों के बारे में कहा गया है ,
Ibn `Ajibah writes in the explanation of this hadith [al-Mabahith al-Asliyyah,(المباحث العامة )
line 22: "And the reality of the human has a pattern in the manners"] hadith 20:4731
5-मनुष्यों को सारे गुण आदम से मिले 
चूँकि अल्लाह ने अपनी आत्मा और अपने सभी गुण जो आदम में प्रविष्ट कर दिए थे , वह पीढी दर पीढ़ी आदम की संतानों में पहुंचते रहे , और मनुष्य उसी के प्रभाव से काम करता रहा .
"लोग बोले यह गुनाह तो हमारे पूर्वज से आया है , हम तो उसके बाद पैदा हुए हैं ,क्या तू इसके लिए हमें विनष्ट कर रहा है "
सूरा -अल आराफ 7 :173 
6--दुर्गुण अल्लाह की देन हैं 
एक साधारण सा व्यक्ति भी समझ सकता है ,कि जिस दुकानदार के पास जो और जैसा माल होगा , वह ग्राहक को वैसा ही माल देगा . अल्लाह के पास आदम को देने के लिए जिस प्रकार के गुण थे उसके कुछ उदहारण दिए जारहे हैं ,जो कुरान में बताये हैं ,
1 - कृतघ्न और अन्यायी 
"मनुष्य बड़ा ही अन्यायी और कृतघ्न है "सूरा -इब्राहिम 14 :34
"निश्चय ही मनुष्य खुला कृतघ्न है 'सूरा-अज जुखुरुफ़ 43 :15
"नाश हो जाये इस मनुष्य का ,कितना कृतघ्न है "सूरा - अबस 80 :17
2-झगड़ालू 
"मनुष्य प्रतक्ष्य झगडालू और विवाद करने वाला है "सूरा -अन नहल 16 :4
"परन्तु मनुष्य सबसे बड़ा झगडालू है "सूरा -अल काफ 18 :54
3-उतावला 
"मनुष्य बड़ा उतावला है ,और बुराई मांगता है "सूरा-बनी इस्राइल 17 :11
"मनुष्य को उतावला पैदा किया गया है "सूरा -अल अम्बिया 21 :37
4-पीड़ित 
"निस्संदेह हमने मनुष्य को कष्टों में ग्रस्त बनाया है "सूरा -अल बलद 90 :4
5-तंग दिल
"मनुष्य का दिल बड़ा ही तंग बनाया गया है "सूरा - बनी इसराइल 17 :100
"मनुष्य कंजूसी करता है ,और दूसरों से कंजूसी करवाता है "सूरा -अल हदीद 57 :24
6-भुलक्कड़ 
"जब उसे कोई नेमत प्रदान की जाती है ,तो फ़ौरन भूल जाता है "सूरा अज जुमुर 39 :8 और 39 :49
7-अत्याचारी 
"निश्चय ही मनुष्य बड़ा ही जालिम और जाहिल है "सूरा -अहजाब 33 :72
8-चिड़चिड़ा 
"मनुष्य बड़े ही कच्चे दिल का बनाया गया है "सूरा -अल मुआरिज 70 :19
9-स्वार्थी 
"जब कृपा की जाती है तो ,किनारा कर देता है ,और जब तकलीफ पड़ती है तो दुआ करता है " सूरा अस सजदा 41 :51
"लोभ तो इन्सान के सामने ही रहता है " सूरा अन निसा 4 :128
7-निष्कर्ष 
जिस देश और समाज के लोगों का चारित्रिक रूप से घोर पतन हो गया हो ,जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हों ,वह विश्व के लिए खतरा बने रहेंगे .जब खुद अल्लाह ने ऐसे लोगों में ठूंस ठूंस कर सारे दुर्गुण भर दिए हैं .इसका एक नमूना देखिये ( विडियो )
Mullha-who raped 48 dead bodies in Pakistan Must watch

http://www.youtube.com/watch?v=M4Pg-teqraY

जब अल्लाह ने ऐसे ऐसे लोग बना दिए हैं ,और जिनका स्वभाव बदल नहीं सकता ,तो वह हमेशा अशांति ही फैलाते रहेंगे .इनको शांत करने का वही उपाय है जो अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन पर आजमाया था.

http://abdurrahman.org/character/negativequalitiesmankind.html

साभार: भांडाफोडू ब्‍लॉग

बाईबिल और कुरान का अल्लाह ?

सत्‍यवादी  प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय


चूंकि ईसाई और मुसलमान भारतीय धर्म ग्रंथों को मानवनिर्मित और कपोलकल्पित बताते हैं , और अपनी किताबों जैसे तौरेत ,जबूर,इंजील और कुरान को अल्लाह की किताबें और प्रमाणिक बताते हैं ,इसी लिए उन्हीं को सही मानकर चलते हैं .यह सभी मानते हैं कि तौरेत यानी बाइबिल कुरान से काफी पहले की अल्लाह की किताब है . यद्यपि मुसलमान यह भी कहते हैं कि तौरेत में लोगों ने बदलाव कर दिया है .लेकिन अधिकांश बाते बाइबिल और कुरान में एक जैसी मिलती हैं यही नहीं कुछ ऐसी परम्पराएँ और रिवाज है ,जो मुसलमानों ने तौरेत से अपना लिए हैं , जिनको यह सुन्नते इब्राहीम भी कहते हैं , जैसे खतना कराना और कुर्बानी का रिवाज ,यानि अल्लाह के नाम पर जानवरों कि हत्या करना ईसाई और मुसलमान दौनों यह मानते हैं कि अल्लाह के पहला व्यक्ति आदम को बनाया था ,जिसके दो पुत्र काबिल और हाबिल हुए थे .जिनमे से एक की संतान से सारे मनुष्य पैदा हुए है .मुसलमानों का यह भी दावा है कि , अल्लाह ने इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए अपने लडके इस्माइल की क़ुरबानी देने को कहा था .लेकिन इस्माइल की जगह एक मेंढा रख दिया था .और उसी की याद में जानवरों की हत्या की जाती है .मुसलमानों का यह भी दावा है कि , अल्लाह को न मांस चाहिए और न खून चाहिए .इस बात में कितनी सच्चाई है , और हकीकत क्या है ,यह बाइबिल और कुरान के आधार पर दिया जा रहा है , देखिये
1-सृष्टि का प्रथम मांसाहारी 
मुसलमान "तौरेत " यानि बाइबिल को अल्लाह की किताब कहते हैं, तो इसके अनुसार सृष्टि का पहला मांसाहारी अल्लाह ही है ,
बाइबिल के अनुसार आदम का बड़ा बेटा काबिल खेती करने लगा ,और छोटा बेटा भेड़ बकरियां पालने का काम करने लगा .कुछ समय बाद जब काबिल अपनी उपज से कुछ भेंट खुदा को चढाने के लिए गया तो खुदा ने उसे अस्वीकार कर दिया .लेकिन जब हाबिल ने एक पहिलौठे भेड़ को मारकर उसकी चर्बी खुदा को चढ़ाई ,तो खुदा ने खुश होकर कबूल कर लिया ." बाइबिल -उत्पत्ति 4 :1 से 6 
इस बात से पता चलता है कि अल्लाह स्वभाव से हिंसक और मांसप्रेमी है उस समय खुदा का घर नहीं था ,इसकिये उसने आसान तरकीब खोज निकाली
2-स्थायी वधस्थान 
कुछ समय के बाद खुदा ने एक जगह स्थायी वधस्थल ( slaughter place ) बनवा दिया जिसे मिज्बह Altars (Hebrew: מזבח‎, mizbe'ah,  कहते हैं ,वहीँ पर खुदा जानवरों की बालियां .स्वीकार करता था .ताकि भटकना नहीं पड़े .खुदा ने कहा ,
"तू मेरे लिए एक मिट्टी की वेदी बनवाना ,और उसी पर अपनी भेड़ -बकरियां और अपने गाय बैलों की होम बलियां चढ़ाना .और मैं वहीँ रह कर तुझे आशीष दूंगा .और अगर तू पत्थर की वेदी बनाये तो तराशे हुए पत्थरों की नहीं बनाना "बाइबिल .व्यवस्था 20 :24 -25 
3-खुदा की मांसाहारी पसंद 
जब एक बार खुदा में मुंह में मांस का स्वाद लग गया तो छोटे बड़े सभी शाकाहारी जानवरों की कुर्बानियां लेने लगा ,और उनकी आयु .रंग और मरने की तरकीबें भी लोगों को बताने लगा ,जो बाइबिल और कुरान में बतायीं हैं
"खुदा ने कहा ,क्या मनुष्य के और क्या पशु के जोभी अपनी माँ की बड़ी संतान हो ,वे सब तू मेरे लिए रख देना " Exodus 13:2 
"खुदा ने कहा कि याजक पाप निवारण के लिए वेदी पर निर्दोष मेंढा लेकर आये "बाइबिल .लेवी 5 :15 
अल्लाहने मूसा से कहा गाय न बूढ़ी हो और न बछिया .इसके बीच की आयु की हो "सूरा -बकरा 2 :68 
"तुम ऊंटों को पंक्ति में खड़ा कर देना ,और जो गोश्त के भूखे हों वह धीरज रखें ,जब ऊंट ( रक्तस्राव ) के किसी पहलू पर गिर जाये तो उसको कट कर खुद खा लेना और भूखों को खिला देना "सूरा -हज्ज 22 :36
ऊंट के गले में छेद कर देते हैं ,इसे नहर कहते है .कुरान ने विधि बताई है .
4-जानवर कटने के लिए हैं 
अपने लिए मांस पहुंचता रहे इसलिए अल्लाह ने घर बैठे ही इतजाम कर लिया और कहा कि,
"क़ुरबानी के जानवरों की बस यही नियति है की , उनको क़ुरबानी की पुरानी जगह तक पंहुचना है "सूरा -हज्ज 22 :33 
"हमने प्रत्येक गिरोह के लिए क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है "सूरा-हज्ज 22 :34 
5-खून हराम क्यों किया गया 
मुस्लिम विद्वान् खून को हराम बताने के पीछे अनेकों कुतर्क करते हैं ,लेकिन असली कारण तौरेत यानि बाइबिल में मिलता है ,खून खुदा को सबसे अधिक पसंद है .कुरान और बाइबिल के कथन देखिये
"क्योंकि हरेक देहधारी के प्राण उसके खून में रहते हैं ,और इसलिए मैंने लोगों से वेदी पर खून चढाने को कहा है .इसलिए कोई भी व्यक्ति खून नहीं खाए .
 बाईबिल लेवी -17 -11 -13 
"याजक पशु का खून वेदी के पास रखदे " बाइबिल लेवी -4 : 30 
क्योंकि बलि का खून तो खुदा का भोजन है .इसलिए तुम खून नहीं खाना "बाइबिल लेवी -3 :17 
"मूसा से खुदा ने कहा ,की तुम पर मुरदार ,खून ,और सूअर और जिसपर अलह के सिवा किसी का नाम लिया गया हो ,सब हराम"
सूरा -बकरा 2 :173 और सूरा-मायदा 5 :3 
"तुम मांस को प्राणों के साथ यानि खून के साथ नहीं खाना " बाइबिल उत्पति 9 :4 -5 
तौरेत यानी बाइबिल की इन आयतों से साबित हैं कि खून तो खुदा का भोजन है ,इसलिए उसने दूसरोंके किये खून हराम कर दिया था ,
6-खुदा मांस खाकर ऊब गया 
जब कई बरसों तक खुदा जानवरों का कच्चा मांस खा कर ,और खून पी चुका तो वह अघा गया ,और उसे इन चीजों से अरुचि होने लगी थी , जो बाइबिल में इन शब्दों में वर्णित है
खुदा ने कहा अब जानवरों की कुर्बानियां मेरे किसी काम की नहीं हैं ,मैं मेढ़ों और जानवरों के खून  से अघा गया हूँ .अब में बछड़ों ,और भेड़ के बच्चों और  बकरों के खून से प्रसन्न नहीं होता " बाइबिल .यशायाह 1 :11 -12 
  तब खुदा ने सोचा कि नमक से मांस में स्वाद आयेगा ,तो उसने कहा ,
"खुदा ने कहा ,तू क़ुरबानी की बलियों को नमकीन बनाना ,और बलि को बिना नमक नहीं रहने देना ,इसलिए चढ़ावे में नमक भी रख देना "
बाइबिल लेवी 2 :13 
7-लडके लड़कियों कि क़ुरबानी 
जब खुदा को जानवरों कि कुर्बानियों से संतोष नहीं हुआ ,तो वह इसानों के लडके लड़कियों कि क़ुरबानी लेने लगा .इब्राहीम और इसहाक ( इस्माइल ) की कथा तो लोग जानते हैं ,लेकिन खुदा ने लड़की की क़ुरबानी भी ले ली थी .देखिये .
"खुदा ने इब्राहिम से कहा तू मेरे द्वारा बताई गयी जगह मोरिया पर जा ,और अपने प्रिय बेटे इसहाक की मेरे लिए होम बलि चढ़ा दे "Genesis 22:1-18
फिर इब्राहीम ने लडके को माथे के बल लिटा दिया ,तब हमने उसकी जन बचाने के लिए एक विशेष कुर्बानी पेश कर दी "
सूरा -अस साफ्फात 37 :103 से 107 
बाद में खुदा लड़कियों की कुर्बानियां भी लेने लगा ,यानि मनुष्यभक्षी बन गया .जो बाइबिल से सिद्ध होता है .
"यिप्ताह के कोई पुत्र नहीं था,उसने मन्नत मांगी कि यदि वह युद्ध से कुशल आ जायेगा तो अपनी संतान कि क़ुरबानी कर देगा ,एक ही पुत्री मिज्पाह थी थी . उसने पुत्री की कुर्बानी कर दी .Judges 11:29-40 

विश्व के अनेकों लोग मांसाहार करते हैं ,और उसके पक्ष में तरह तरह के तर्क भी देते हैं .और कुछ ऐसे भी धर्म हैं , जिनमे पशुबलि और नरबलि की कुरीति पाई जाती है.जिसको वह लोग अपने धर्मग्रंथ की किसी कथा से जोड़कर ,रिवाज और आवश्यक धार्मिक कार्य मानते हैं .इस्लाम की ऐसी ही परंपरा क़ुरबानी की है , पैगम्बर इब्राहीम द्वारा अपने पुत्र की क़ुरबानी से सम्बंधित है . ,और इसकी कथा , बाइबिल ,और कुरान में मौजूद है . यद्यपि इब्राहीम द्वारा बाइबिल में इसहाक की क़ुरबानी , और कुरान में इस्माइल की क़ुरबानी बताई गई है .अब सवाल यह उठता है कि एक विवादग्रस्त किंवदंती के आधार हर साल करोड़ों निरीह मूक प्राणियों की क्रूर हत्या को एक धार्मिक कार्य मानना कहाँ तक उचित मानना चाहए .जबकि उसी इब्राहीम के अनुयायी यहूदियों और ईसाईयों ने क़ुरबानी को धार्मिक रूप नहीं दिया है .क्या कारण है कि दयालु , और कृपालु ईश्वर , खुदा ,God या अल्लाह अचानक इतना हिंसक और रक्तपिपासु कैसे बन गया कि वह जानवरों के साथ मनुष्यों की कुर्बानियां भी लेकर खुश होने लगा .ड्रैकुला एक ऐसा नरपिशाच होता है जो लोगों का खून पीकर युगों तक जीवित रहता है .इसी तरह बाईबिल के समय खून पीने वाला जो ईसाईयों का खुदा था ,वह कुरान के समय अल्लाह बन गया है .शायद इसीलिए मुसलमान कहते हैं कि अल्लाह एक ही है .
जो खुदा लोगों के सत्कर्मों से नाराज ,और पशुबलि (कुर्बानी ) से प्रसन्न होता है ,वह ईश्वर नहीं हो सकता .
.
http://www.evilbible.com/Ritual_Human_Sacrifice.htm

साभार: भांडाफोडू ब्‍लॉग

Saturday, June 9, 2012

आरएसएस को हिन्दुत्व का पाठ पढ़ायेंगे सावरकर के लोग

पुण्‍य प्रसून वाजपेयी







राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की मानें तो एटीएस पंचतंत्र की कहानी लिख रहा है। क्योंकि जो लोग मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी हो सकते हैं वही लोग संघ के कार्यवाह मोहनराव भागवत और कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार की हत्या की साजिश कैसे रच सकते हैं। लेकिन हिन्दुत्व की जिस राह को अभिनव भारत सरीखा संगठन पकड़े हुये है और हिन्दुत्व का नाम लेते-लेते आरएसएस जिस राह पर जा चुका है अगर दोनों की स्थिति को दोनों के घेरे में ही देखें तो पहला सवाल यही उठेगा कि मालेगांव को लेकर जो सोच अभिनव भारत में है कमोवेश वही सोच आरएसएस को भी लेकर है। यानी मालेगांव और संघ के हिन्दुत्व में कोई अंतर करने की स्थिति में अभिनव भारत नहीं है। इस स्थिति को समझने से पहले जरा दोनों के अतीत को समझ लें।
दरअसल अभिनव भारत जिस हिन्दू महासभा से निकला उसके कर्ता-धर्ता सावरकर थे जो सीधे कहते थे," इस ब्रह्माण्ड में हिन्दुओं का अपना देश होना ही चाहिये जहां हम हिन्दुओं के रूप में, शक्तिशाली लोगों के वंशज के रूप में फलते-फूलते रहें। सो, शुद्दि को अपनायें, जिसका केवल धार्मिक नहीं, राजनीतिक पहलू भी है।" वहीं हेडगेवार समाज के शुद्दिकरण के रास्ते हिन्दु राष्ट्र का सपना देशवासियों की आंखों में संजोना चाहते थे। सावरकर पुणे की जमीन और कोकणस्थ ब्रह्माणों के बीच से हिन्दुसभा को खड़ाकर सैनिक संघर्ष के लिये 1904 में अभिनव भारत को लेकर ब्रिटिश सरकार को चुनौती दे रहे थे। वहीं दो दशक बाद हेडगेवार नागपुर की जमीन पर तेलुगु बह्माणों के बीच से हिन्दुओं के अनुकुल स्थिति बनाने के लिये कांग्रेस की नीतियों का विरोध कर हिन्दुत्व शुद्दिकरण पर जोर दे रहे थे।
उस दौर में सावरकर के तेवर के आगे आरएसएस कोई मायने नहीं रखती थी। ठीक उसी तरह जैसे अब आरएसएस के आगे हिन्दू महासभा कोई मायने नहीं रखती। सावरकर की पुत्रवधु हिमानी सावरकर 2004 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हिन्दूमहासभा का अलख लिये चुनाव लड़ रही थीं। उस समय बीजेपी ही नहीं आरएसएस के स्वयंसेवक भी मजा ले रहे थे। हिमानी अपना चुनाव प्रचार करने ऑटो पर निकलती थीं और बीजेपी के समर्थक जो शायद आरएसएस से भी जुडे रहे होंगे, ऑटोवाले को कहते थे "हिमानी पैसा न दे पाये तो हमसे ले लेना।" लेकिन वही दौर ऐसा भी था जब आरएसएस के भीतर बीजेपी को लेकर घमासान मचा हुआ था। इसलिये कार्यवाह का पद जब मोहन राव भागवत ने संभाला तो मोहनराव में लोग मधुकर राव भागवत को देख रहे थे।
मधुकर राव भागवत न सिर्फ मोहन भागवत के पिता थे बल्कि हेडगेवार जब आरएसएस को भारत की घमनियों में दौड़ाने की बात कहते थे तो मधुकरराव हमेशा उनके साथ खड़े रहे। उस दौर में मधुकर राव भागवत गुजरात में संघ के प्रांत प्रचारक थे। जो राजनीतिक नजरिये को खारिज कर हिन्दुत्व के जरिये समाज का शुद्दिकरण सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर करना चाहते थे। लेकिन मोहन भागवत ने जब कार्यवाह का पद संभाला तो अयोध्या में मंदिर निर्माण एक सपना बना दिया गया था। स्वदेशी मुद्दा एफडीआई के आगे घुटने टेक रहा था। गौ-रक्षा का सवाल उठाना आर्थिक विकास की राह में पुरातनपंथी राग अलापने सरीखा करार दिया जा रहा था। धारा-370 का जिक्र राजनीतिक तौर पर एक बेमानी भरा शब्द हो चुका था। धर्मातरंण के आगे आरएसएस नतमस्तक नजर आ रहा था। बांग्लादेशी घुसपैठ का मामला वाजपेयी सरकार में ठंडे बस्ते में डल चुका था। पूर्वोत्तर में संघ के चार स्वंयसेवको की हत्या के बावजूद तब के गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की खामोशी ने संघ के माथे पर लकीर खींच दी थी। जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सो में बांटकर देश को जोड़ने के संघ कार्यकारिणी के फैसले को वाजपेयी सरकार ने ही ठेंगा दिखा दिया था। और इन सबके बीच बीजेपी की तर्ज पर मुस्लिमों को साथ लाने की जो पहल संघ के भीतर इन्द्रेश कुमार कर रहे थे उसने संघ के एक बड़े तबके में बैचेनी पैदा कर दी थी।
जाहिर है इन परिस्थितियों को महज संघ के भीतर का कट्टर हिन्दुत्व ही नहीं देखकर खुद को अलग-थलग समझ रहा था बल्कि मराठी समाज का वह तबका जो सावरकर के आसरे कभी आरएसएस को मान्यता नहीं देता था वह कहीं ज्यादा खिन्न भी था। 2002 से लेकर 2006 के दौरान विश्व हिन्दु परिषद से लेकर भारतीय मजदूर संघ,स्वदेशी जागरण मंच और किसान संघ के बीच का तालमेल भी बिगड़ता गया।
इन सब के बीच सरसंघचालक कुपं सीं सुदर्शन की उस पहल ने आग में घी का काम किया जब आरएसएस पर लगी सांप्रदायिक छवि को धोने के लिये सुदर्शन ने मुस्लिम समारोह-सम्मेलनों में जाना शुरू कर दिया। महाराष्ट्र के हिन्दुवादी आंदोलन में संघ की इन तमाम पहल का नतीजा समाज के भीतर संघ की घटती हैसियत से साफ नजर आने लगा। 2004 में वाजपेयी सरकार की चुनाव में हार ने न सिर्फ संघ के एंजेडे की हवा निकाल दी जो संघ के लिबरल होने पर बीजेपी की सत्ता का स्वाद चख रहा था और सत्ता को अपना औजार बनाकर हिन्दुत्व का राग अलापने से भी नहीं कतरा रहा था। बल्कि इस दौर में संघ के भीतर जिस मराठी लॉबी को हाशिये पर धकेला गया था उसने खुलकर संघ की सेक्यूलर सोच को निशाना बनाना शुरू किया।
इस दौर में सावरकर -गोडसे की नयी पीढ़ी जो संघ से पहले अंसतुष्ट थी उसने सावरकर की संस्था अभिनव भारत को फिर से सक्रिय करने की दिशा में वर्तमान कालखंड को ही उचित माना। इस विंग ने संघ पर भी मुस्लिम परस्ती और हिन्दु विरोधी सेक्यूलर राह पर जाने के आरोप मढ़ा। ऐसा नहीं है कि अभिनव भारत एकाएक उभरा और उसने संघ को निशाने पर ले लिया। दरअसल 2006 में अभिनव भारत को दोबारा जब शुरू करने का सवाल उठा तो संघ के हिन्दुत्व को खारिज करने वाले हिन्दुवादी नेताओं की पंरपरा भी खुलकर सामने आयी। पुणे में हुई बैठक में, जिसमे हिमानी सावरकर भी मौजूद थीं उसमें यह सवाल उठाया गया कि आरएसएस हमेशा हिन्दुओं के मुद्दे पर कोई खुली राय रखने की जगह खामोश रहकर उसका लाभ उठाना चाहता रहा है। बैठक में शिवाजी मराठा और लोकमान्य तिलक से हिन्दुत्व की पाती जोड़कर सावरकर की फिलास्फी और गोडसे की थ्योरी को मान्यता दी गयी। बैठक में धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी से लेकर गोरक्षा पीठ के मंहत दिग्विजय नाथ और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के भक्तों की मौजूदगी थी या कहें उनकी पंरपरा को मानने वालों ने इस बैठक में माना कि संघ के आसरे हिन्दुत्व की बात को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। माना यह भी गया कि बीजेपी को आगे रख कर संघ अब अपनी कमजोरी छुपाने में भी ज्यादा वक्त जाया कर रहा है इसलिये नये तरीके से हिन्दूराष्ट्र का सवाल खड़ा करना है तो पहले आरएसएस को खारिज करना होगा। हालांकि ऐरएलएल के भीतर यह अब भी माना जाता है कि कांग्रेस से ज्यादा नजदीकी हिन्दू महासभा की ही रही।





1937 तक तो जिस पंडाल में कांग्रेस का अधिवेशन होता था उसी पंडाल में दो दिन बाद हिन्दूमहासभा का अधिवेशन होता और मदन मोहन मालवीय के दौर में तो दोनों अधिवेशनों की अध्यक्षता मालवीय जी ने ही की। इसलिये आरएसएस कांग्रेस की थ्योरी से हटकर सोचती रही लेकिन हिन्दु महासभा का मानना है कि संघ ने बीजेपी की सत्ता का मजा लेकर सत्ता दोबारा पाने के लिये खुद के संगठन का कांग्रेसीकरण ज्यादा कर लिया है और हिन्दू राष्ट्र की थ्योरी को पूरी तरह नकार दिया है।
महत्वपूर्ण यह भी है कि ब्रह्मणों की पंरपरा को लेकर भी मतभेद उभरे। चूंकि हेडगेवार की तरह सुदर्शन भी तेलुगु ब्रह्मण है तो हिन्दुत्व पर कड़ा रुख अपनाने की सुदर्शन की क्षमता को लेकर भी यह बहस हुई कि संघ फिलहाल सबसे कमजोर रूप में काम कर रहा है इसलिये संघ की मराठी लॉबी भी सावरकर की सोच को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। इन सब का असर संघ पर किस रूप में पड़ा है या फिर देश में जो राजनीतिक स्थितियां है उसमे सरसंघचालक सुदर्शन भी अंदर से किस तरह हिले हुये हैं इसका अंदाजा पिछले महीने 7 नबंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर गो-रक्षा के सवाल पर हिमानी सावरकर के साथ मंच पर खड़े सुदर्शन को देखकर समझा जा सकता था। यानी जो परिस्थितियां सावरकर और संघ को अलग किये हुये थीं उसमे पहली बार संघ के भीतर भी इस बात को लेकर कुलबुलाहट है कि जिस राह पर वह चल रही है वह रास्ता सही नहीं है।
मामला सिर्फ मोहन भागवत या इन्द्रेश की हत्या की साजिश का नहीं है, पुणे में गोखले-साठे-पेशवा-सावरकर की कतार में खड़े कोकनस्थ बह्मण अब स्वदेशी अर्थव्यवस्था के उस ढांचे को जीवित करना चाह रहे हैं जिसकी बात कभी संघ के नेता दत्तोपंत ढेंगड़ी किया करते थे लेकिन ढेंगड़ी अपनी बात कहते-कहते मर गये मगर न वाजपेयी सरकार ने उनकी बात सुनी न सरसंघचालक ने उन्हें तरजीह दी। जाहिर है आजादी के बाद पहली बार अगर अभिनव भारत को बनाने की जरूरत सावरकर को मानने वाले कर रहे हैं तो इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि हिन्दुत्व की जो थ्योरी सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर अभी तक आरएसएस परोस रही है और बीजेपी उसे राजनीतिक धार दे रही है, वह अपने ही कटघरे में पहली बार खड़ी है।

साभार: आईबीएन लाइव

Thursday, June 7, 2012

ब्रह्मेश्‍वर मुखिया की हत्‍या नीतीश व भाजपा के नेताओं ने करायी


                   ब्रह्मेश्‍वर मुखिया


बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह़मेश्वर सिंह मुखिया की गत 1 जून 2012 की शुक्रवार  सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। ब्रह्मेश्वर सिंह रणवीर सेना के संस्थापक थे। ज्ञात रहे कि रणवीर सेना का गठन बिहार में नक्सली व माओवादियों को पूरी तरह से समाप्त करने के लिये गठित किया गया था किंतु कुछ लोगों का ये आरोप रहा है कि यह ऊंची जातियों का संगठन है जो कि पूरी तरह निराधार है। बिहार में माओवादियों और नक्सलियों के द्वारा भारी आतंक व तबाही मचाने के दौरान इस सेना का गठन किया गया  था। हाल ही में ब्रह्मेश्वर सिंह को बथानी टोला नरसंहार मामले में उच्च न्यायालय द्वारा ससम्मान सहित बरी भी कर दिया गया था।


ऐसे में बिहार के नीतीश सरकार के ईशारे पर ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या करवाना अत्यंत ही लज्जास्पद और घिनौना कुकृत्य है, जिसके लिये नीतीश सरकार की जितनी भी भर्त्सना की जाये कम है। ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या में नीतीश सरकार के साथ भाजपा के कुछ नेता भी शामिल हैं, जिसकी अखिल भारत हिन्दू महासभा कठोर से कठोर शब्दों में घोर निंदा करती है।
अखिल भारत हिन्दू महासभा उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ0 संतोष राय ने कहा कि नीतीश सरकार पूरी तरह से किंकर्तव्यविमूढ़ हो गयी है, साथ में ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या में भाजपायी नेताओं का साथ देना उनके लिये बहुत आत्मघाती कदम सिद्ध होगा।


उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व मुखिया जी ने नीतीश सरकार से यह अनुरोध किया था कि पूर्व में जितने भी किसानों की भूमि  माओवादियों द्वारा जबरन कब्जाई गई हैं उन्हें समम्मान वापस दिया जाये। मुखिया के द्वारा नीतीश सरकार से समस्त किसानों के हित में माओवादियों द्वारा कब्जाई जमीन के इस मांग का समस्त जातियों के किसानों का भरपूर समर्थन मिल रहा था ऐसे में नीतीश सरकार को अपनी राजनीतिक भूमि खिसकती दिखायी देने लगी। क्योंकि मुखिया जी सक्रिय राजनीति में उतरने की घोषणा कर चुके थे। ऐसे में भाजपा समर्थित नीतीश सरकार ने बिहार के समस्त जातियों के असंतोष वर्ग के विरूद्ध जाकर मुखिया जी की हत्या का षडयंत्र रचा जो कि वर्तमान में असंतोष से आक्रोश का रूप धारण कर रहा है, जिसके परिणाम नीतीश सरकार व भाजपा के लिये आने वाले दिनों में बहुत गंभीर होंगे।


अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ0 संतोष राय ने बिहार के नीतीश सरकार व कुछ भाजपायी नेताओं जो रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की हत्या में साथ दिये थे उन्हें चेतावनी देते हुये कहा कि आगे आने वाले समय में नीतीश सरकार के साथ-साथ भाजपायी नेताओं को जनता ऐसा मुंहतोड़ जवाब देगी कि आने वाली पीढ़ियां हमेंशा याद रखेंगी।